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कोऑपरेटिव सेक्टर से जुड़कर युवा बना सकते हैं करियर, जागरूक करने की है जरूरत 

युवाओं के बीच सहकारिता को बढ़ावा देने में मीडिया की भूमिका विषय पर सेमिनार आयोजित

Seminar on role of Media in promotion of Cooperative among youth


 

नई दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (NCUI) के मुख्य कार्यकारी एन. सत्यनारायणा ने कहा कि भारत जैसे देश में जहां 65 फीसदी से ज्यादा आबादी 35 साल और आधी आबादी 25 साल की उम्र से कम लोगों की है, वहां युवाओं को अवसर देने और आगे बढ़ाने में सहकारी आंदोलन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सत्यनारायणा भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ और राष्ट्रीय फिल्म एवं ललित कला सहकारी लिमिटेड (NAFFAC) की ओर से आयोजित सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। सेमिनार का विषय 'युवाओं के बीच सहकारिता को बढ़ावा देने में मीडिया की भूमिका' था। 

 

सत्यनारायणा ने कहा कि इसके लिए सहकारिता क्षेत्र से जुड़ी उपलब्धियों और गतिविधियों को मीडिया के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा युवाओं तक पहुंचाने और युवाओं को सहकारिता क्षेत्र से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है। लेकिन सहकारी संस्थाएं और सहकारी आंदोलन मीडिया की उपेक्षा का शिकार रहा है। देश में कई सहकारी संस्थाएं उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं जिनकी तरफ अक्सर मीडिया का ध्यान नहीं जा पाता, लेकिन कुछ सहकारी संस्थाओं की गड़बड़ियां सुर्खियों में छा जाती है। आज के युवाओं को सहकारिता क्षेत्र के अवसरों और संभावनाओं से रूबरू कराने में मीडिया बड़ी भूमिका निभा सकता है।

 

सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) के अध्यक्ष डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव ने कहा कि सहकारिता आंदोलन लोगों की सेवा करने और साथ मिल-जुलकर आगे बढ़ने का माध्यम है। आज का युवा जिस तरह कॉरपोरेट जगत में जाने के लिए लालायित रहता है, उसी तरह युवाओं का रुझान कॉओपरेटिव क्षेत्र की संभावनाओं की तरफ बढ़ाने की आवश्यकता है। ये काम मीडिया के सहयोग के बगैर संभव नहीं है। इफको,कृभको, एनसीसीएफ जैसी कई सहकारी संस्थाएं बेहद अच्छा काम कर रही हैं। मीडिया आज लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में हर क्षेत्र में अहम भूमिका निभा रहा है। मीडिया सहकारिता क्षेत्र की कमियों और खामियों पर प्रकाश डाले तो इस क्षेत्र में जो अच्छे काम कर रह हैं, उन्हें भी लोगों तक पहुंचाए। सहकारिता क्षेत्र की सफलता की कहानियों को भी युवाओं तक पहुंचाने की जरूरत है। तभी युवा सहकारिता क्षेत्र के अवसरों का लाभ उठा पाएंगे।

 

सहकारिता के क्षेत्र में युवाओं को प्रोत्साहित करने की जरूरत और इसमें मीडिया की भूमिका पर बोलते हुए आउटलुक के संपादक हरवीर सिंह ने कहा कि सहकारिता आंदोलन का पिछले 100 साल का इतिहास रहा है जिसमें कामयाबी और नाकामियां दोनों हैं। 80 के दशक तक सहकारिता क्षेत्र निजी क्षेत्र को प्रतिस्पर्धा दे रहा था लेकिन उसके बाद सहकारिता क्षेत्र समय के साथ कदम मिलाकर चलने में नाकाम रहा। इस तथ्य को स्वीकार करने में हमें संकोच नहीं करना चाहिए। आज देश में नौकरियां और रोजगार के अवसर बड़ी चिंता का विषय हैं। देश के युवाओं में आगे बढ़ने, कुछ करने की ललक है। अर्थव्यवस्था में सहकारिता क्षेत्र की हिस्सेदारी जितनी बड़ी है, उस अनुपात में सहकारिता की संभावाओं की युवाओं को जानकारी नहीं है। संभवत: राजनीति से जुड़ा होने की वजह से सहकारिता की एक खास तरह की छवि बन गई है जिसे पेशवर तरीके और पारदर्शिता अपनाकर ही बदला जा सकता है।

 

सहकारिता क्षेत्र के प्रति मीडिया के रुख के बारे में बोलते हुए फाइनेंशिल क्रॉनिकल समाचार पत्र के वरिष्ठ संपादक के.ए. बद्रीनाथ ने कहा कि सहकारिता के क्षेत्र में इफको, कृभको के आगे हमारे में पास सफलता की कौन-सी कहानियां हैं, हमें यह बताने-दिखाने की जरूरत है। मीडिया खासकर बिजनेस अखबार आखिर क्यों कॉरपोरेट सेक्टर को इतनी तवज्जो देता है इस बारे में सोचने की जरूरत है। अगर कॉओपरेटिव सेक्टर भी मीडिया से उसी तरह के अहमियत चाहता है तो उसे कॉरपोरेट जगत से सीखना होगा। सहकारिता क्षेत्र की सफल कहानियों को मीडिया तक पहुंचाना होगा। खुद में पारदर्शिता लानी होगी।

 

सम्मेलन को संबोधित करते हुए मानव रचना यूनिवर्सिटी की डीन डॉ. नीमो धर ने कहा कि सहकारिता का कॉन्सेप्ट आज भी लोगों तक सही रूप में नहीं पहुंच पाया है। इसलिए सहकारी संस्थाओं की छवि सरकारी से जुड़ी किसानों या उत्पादकों की संस्थाओं की बनकर रह गई है। अगर सहकारी क्षेत्र की सफल कहानियां सामने आएं तो इस छवि को बदला जा सकता है। इसके लिए सभी मीडिया माध्यमों का उपयोग करते हुए 360 एप्रोच को अपनाने की जरूरत है। शॉर्ट फिल्म और सोशल मीडिया जैसे माध्यम भी इसमें अहम भूमिका निभा सकते हैं।

 

सम्मेलन में सभी विशेषज्ञों ने युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने में सहकारिता क्षेत्र की संभावनाओं पर जोर दिया है और सहकारिता आंदोलन को युवाओं से जोड़ने की जरूरत पर भी जोर दिया।

 

 इस मौके पर सहकारिता विशेषज्ञ और राष्ट्रीय फिल्म एवं ललित कला सहकारी लिमिटेड (एनएएफएफएसी) के प्रबंधन निदेशक श्री विनय कुमार, नई दिल्ली में मॉरीशस उच्चायोग के प्रथम सचिव वी. चीतू, मीडिया विशेषज्ञ और डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर दिलीप सूद समेत कई विशेषज्ञ शामिल हुए

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