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Start-up इंडिया ने बदला है देश का माइंडसेट, कॉलेज के लड़के ला रहे नए आइडियाः सुरेश प्रभु

60 से 70 के दशक में सरकारी जॉब का माइंडसेट था।

startup is matter of mindset says suresh prabhu

नई दिल्‍ली. मेक इन इंडिया और स्टार्ट अप इंडिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के दो अहम कार्यक्रम हैं जिनकी शुरुआत स्वयं प्रधानमंत्री ने जोर-शोर से की थी। लेकिन लोगों के बीच यह धारणा बन रही है कि दोनों ही कार्यक्रम उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए। इस पर केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग एवं नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु ने moneybhaskar.com के राजीव कुमार से खुलकर बातचीत की। 

 

प्रश्नः लोगों में यह धारणा बन रही है कि स्टार्ट अप फेल हो गया, आप क्या कहेंगे?

उत्तरः जहां तक स्टार्टअप की बात है तो अभी 20 हजार स्टार्टअप रजिस्टर्ड हैं। लेकिन मैं पूरे देश में घूमता रहता हूं। 20-20 साल के कॉलेज में पढ़ने वाले लड़के, जिनकी मूंछें भी नहीं आई हैं, वे नए-नए आइडिया निकाल रहे हैं। यह एक आंदोलन है। यह माइंडसेट बदलने की बात है। 

 

 

प्रश्नः माइंडसेट से आपका क्या मतलब है?

उत्तरः 60 से 70 के दशक में सरकारी जॉब का माइंडसेट था। 90 के बाद बदलाव हुआ। लोगों को लगा कि सरकारी नौकरी में कुछ मजा नहीं है। प्राइवेट जॉब मिलनी चाहिए। इसके बाद प्राइवेट और सरकारी दोनों सेक्टरों में कमी आई। उस तरह की जॉब्स आज नहीं हैं। उस तरह की मानसिकता भी लोगों में आज नहीं है। इसका श्रेय पीएम मोदी को देना चाहिए। उन्होंने बदलाव लाने की कोशिश की है। विपक्ष उन पर पकौड़े आदि की टीका-टिप्पणी करता रहता है। पीएम मोदी का कहना है कि खुद के पैरों पर खड़े हों। आप बनिए, कुछ तो बनिए। धीरू भाई अंबानी पेट्रोल पंप पर काम करते थे। पेट्रोल देने का। अनिल अग्रवाल बिहार में सिर पर सामान लेकर काम करते थे। उनमें कुछ बनने की जिद थी। यह माइंडसेट की बात है, जिसे पीएम मोदी ने बदला है। अभी स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत है,  आने वाले दिनों में यह सफल होगा।

 

 

प्रश्नः जनता में यह भी धारणा है कि मेक इन इंडिया भी असफल रहा, कहां तक सच्चाई है?

उत्तर- मैं बताना चाहूंगा कि मैकेंजी ग्लोबल इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट आने जा रही है। उनका कहना है कि आने वाले समय में 60 से 65 फीसदी ग्लोबल सप्लाई के तीन रीजन से होंगे। ईस्ट एशिया, साउथ ईस्ट एशिया और साउथ एशिया। इनमें मुख्य देश इंडिया, चीन और जापान एवं कोरिया हैं। लोगों को लगता है कि हम लोगों ने मैन्युफैक्चरिंग की संधि को खो दिया है। लेकिन ऐसा नहीं है। इसलिए मैंने प्लान बनाया है कि 5 ट्रिलियन डालर का सकल घरेलू उत्पाद ( जीडीपी) बनने पर जीडीपी में 20 फीसदी हिस्सेदारी मैन्युफैक्चरिंग की हो। यह अलग-अलग सेक्टर से होगा। उसका पूरा प्लान मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी के साथ बैठकर बनाया गया है।

 

 

प्रश्न- ईज आफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग का आधार बदल रहे हैं क्या? 
उत्तर - ईज आफ डूंइिग बिजनेस की रैंकिंग में दो चीजें रहेंगी। एक तो वर्ल्ड बैंक ने जो किया है वो तो रहेगा ही। देश में पहली बार ईज आफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग में डिस्ट्रिक्ट को शामिल किया जा रहा है। हमें यह देखना होगा कि काम किधर है। जैसे कि आपको काम मुरादाबाद में करना है, लेकिन मुरादाबाद उत्तर प्रदेश में है। अब यह देखना होगा कि मुरादाबाद में क्या सुविधा है। डिस्ट्रिक्ट का जीडीपी बढ़ेगा तो ही देश का जीडीपी बढ़ेगा। मैं कमरे में जीडीपी नहीं बढ़ा सकता हूं। यहां पर सिर्फ पॉलिसी ही बना सकता हूं।

 

 

 

 

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