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शेल कंपनियां नहीं बेच पाएंगी प्रॉपर्टी, राज्य रजिस्ट्री करने पर लगा सकेंगे रोक

शेल कंपनियों पर मोदी सरकार एक और एक्शन लेने की तैयारी कर रही है। इसके तहत कंपनियां अपनी प्रॉपर्टी बेच नहीं पाएगी ।

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नई दिल्ली। शेल कंपनियों पर मोदी सरकार एक और एक्शन लेने की तैयारी कर रही है। इसके तहत कंपनियां अपनी प्रॉपर्टी  बेच नहीं पाएगी । इस संबंध में केंद्र सरकार ने राज्यों को एडवाइजरी भी भेज दी है। जिसमें कहा गया है। ऐसी कंपनियां या उनके प्रमोटर प्रॉपर्टी बेचकर निकले के फिराक में हैं, उन पर कड़ी नजर रखी जाय। जिससे कि वह किसी भी तरह अपनी प्रॉपर्टी को बेचकर निकल न जाय। ऐसी कंपनियों के ऊपर प्रॉपर्टी बेचने पर रोक उन्हें क्लीन चिट मिलने तक बनी रहेगी।

 
राज्य रजिस्ट्री पर लगाएंगे रोक
 
कॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री से moneybhaskar.com को मिली जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार ने राज्यों को शेल या डिफॉल्टर कंपनियों पर सख्ती के लिए एडवाइजरी जारी की है। जिसमें कहा गया है कि संदिग्ध ट्रांजैक्शन करने वाली कंपनियों पर कड़ी नजर रखी जाय। इसके तहत न केवल उनके बैंक अकाउंट सीज किए जा रहे हैं, वहीं ऐसी कंपनियों की चल-अचल संपत्ति पर भी नजर रखी जाय। इसके तहत राज्यों को कहा गया है कि वह ऐसी कंपनियों को प्रॉपर्टी न बेचने दे। 
 
बंद हो चुकी हैं 5 लाख कंपनियां
 
कॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री से मिले आंकड़ों के अनुसार देश में नवंबर तक करीब 5 लाख कंपनियां बंद हो चुकी है। जिसमें 2.24 लाख कंपनियां ऐसी हैं जो दो साल से इन एक्टिव हैं। यहीं नहीं ब्लैकमनी पर लगाम कसने के लिए 3 लाख से ज्यादा डायरेक्टर को डिसक्वालीफाई भी किया गया है। सरकार को इस बात का डर है कि कई लोग शेल कंपनियों के जरिए ब्लैकमनी का ठिकाने लगा रहे हैं। जिसके आधार पर शेल कंपनियों पर सरकार सख्त नजर आ रही है।
 
नोटबंदी में 17 हजार कंपनियों ने किया हेर-फेर
 
नोटबंदी के ऐलान के बाद से हुई प्रारंभिक जांच में ये बात सामने आई है कि करीब 17 हजार कंपनियों ने 58 हजार अकाउंट के जरिए संदिग्ध ट्रांजैक्शन किए हैं। इसके तहत कंपनियों ने 17 हजार करोड़ रुपए का लेन-देन किया है। यहीं नहीं एक ऐसी कंपनी भी सामने आई है, जिसके अकाउंट में नोटबंदी के पहले निगेटिव बैलेंस था और उसके बाद 2484 करोड़ रुपए का लेन-देन  किया गया है।
 
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