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Royal Enfield की कीमत के बराबर गांवों के लोगों पर है कर्ज

आंध्र प्रदेश, बिहार और झारखंड गरीब राज्यों में शामिलः नाबार्ड

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नई दिल्ली।

आप हैरान रह जाएंगे कि भारत के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों पर औसतन Royal Enfield बुलेट 350 की कीमत के बराबर का कर्ज है। इंडिया स्पेंड की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2013 में औसतन ग्रामीण पर 1.3 लाख रुपये से अधिक का कर्ज था जो कि उस समय के Royal Enfield 350 की कीमत के बराबर था। अब भी मुंबई में भी Royal Enfield 350 की एक्स-शो-रूम कीमत 1.16 लाख रुपये है। ग्रामीणों पर औसतन लाख रुपये से अधिक के कर्ज से इस बात का पता चलता है कि अधिकतर ग्रामीण गरीबी की जिंदगी गुजार रहे हैं। National Bank for Agriculture and Rural Development (नाबार्ड) की तरफ से इस साल अगस्त में जारी रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण इलाकों के घरों में खर्च के मुकाबले औसतन 1413 रुपये की अधिक की कमाई है, लेकिन यह राशि कर्ज चुकाने में चली जाती है। नबार्ड की रिपोर्ट ऑल इंडिया रूरल फाइनेंशियल इंक्लूजन के सर्वे पर आधारित है।

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ग्रामीण भारत की कमाई 8059 तो खर्च 6646

रिपोर्ट में कहा गया है कि आंध्र प्रदेश, बिहार और झारखंड प्रति व्यक्ति आय के मामले में अन्य राज्यों के मुकाबले काफी पीछे है। इन राज्यों के ग्रामीण लोगों की औसत मासिक बचत मात्र 95 रुपये है जिससे सिर्फ एक लीटर खाद्य तेल खरीदा जा  सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण भारत में रहने वाले लोग औसतन अपने उपभोग पर प्रतिमाह 6,646 रुपए खर्च करते है जबकि उनकी मासिक कमाई 8,059 रुपए हैं। औसतन ग्रामीण प्रतिमाह 1413 रुपए बचाते है, लेकिन यह राशि कर्ज चुकाने में चली जाती है।  सर्वे में 29 राज्यों के 245 जिलों के 40 हजार से अधिक घरों को शामिल किया गया था ताकि ग्रामीण इलाके की वित्तीय स्थिति की समग्र तस्वीर उभर कर आ सके।

 

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पंजाब और केरल के लोग करते हैं अधिक खर्च

सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में सबसे अधिक खर्च पंजाब में रहने वाले करते हैं। पंजाब के ग्रामीण इलाके के लोग हर महीने 11,707 रुपये खर्च करते हैं। दूसरा स्थान केरल है जहां के ग्रामीण 11,156 रुपये प्रतिमाह खर्च करते हैं जबकि राष्ट्रीय स्तर पर गांव के प्रति परिवार का औसत खर्च 6,646 रुपये प्रतिमाह है। लेकिन पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के ग्रामीण का मासिक खर्च स्तर राष्ट्रीय स्तर से काफी कम है। रिपोर्ट के मुताबिक आंध्र प्रदेश के गांवों में खर्च के मुकाबले प्रति परिवार औसतन सिर्फ 95 रुपये की बचत होती है जिससे अधिक से अधिक एक लीटर खाने वाले तेल की खरीदारी हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के गांवों में रहने वाले 50 फीसदी किसान प्रतिमाह औसतन 1375 रुपये से कम खर्च करते हैं।  

 

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