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RBI VS सरकार: पिक्चर अभी बाकी है

60 से 90 दिन में आ जाएगा रिजर्व फंड का फार्मूला

RBI VS GOVERNMENT, MORE ACTION IS EXPECTED IN COMING WEEKS

नई दिल्ली। रिजर्व बैंक और सरकार के बीच चल रहा विवाद हाल में हुई मैराथन बैठक के बाद थमता हुआ जरूर दिख रहा है लेकिन विवाद पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। यह जरूर दिख रहा है कि अपने अपने रूख पर अड़े रिजर्व बैंक और सरकार दोनों ने अपनी टोन को थोड़ा नर्म जरू किया है। आने वाले हफ्तों कुछ कदम उठाए जा सकते हैं जिससे यह साफ होगा कि विवाद के मुद्दों पर आरबीआई भारी पड़ा या आरबीआई को सरकार की बात माननी पड़ी। 

 

60 से 90 दिन में आ जाएगा रिजर्व फंड का फार्मूला 

 

रिजर्व बैंक के बोर्ड की मैराथन बैठक में इस बात पर सहमति बनी है कि एक एक्सपर्ट कमेटी यह तय करेगी कि रिजर्व फंड कितना होना चाहिए। सूत्रों के मुताबिक सरकार को उम्मीद है कि अगले 60 से 90 दिन में एक्सपर्ट कमेटी अपनी राय दे देगी कि आरबीआई का रिजर्व फंड कितना होना चाहिए। आरबीआई के पास रिजर्व फंड कितना होना चाहिए इस बात को लेकर पिछले माह आरबीआई और सरकार के बीच विवाद की स्थिति पैदा हो गई थी। माना जा रहा है कि सरकार चाहती है कि रिजर्व बैंक के लगभग 9.7 लाख करोड़ रुपए का बड़ा हिस्सा उसे मिलना चाहिए जिससे वह वित्तीय घाटे के लक्ष्य को पूरा कर सके और चुनाव से पहले खर्च बढ़ा सके। हालांकि सरकारी अधिकारियों ने इस बात को खारिज करत हुए कहा है कि इस पूरी कवायद का मकसद राजस्व हासिल करना नहीं है। केंद्र सरकार का मानना है कि आरबीआई के पास जरूरत से ज्यादा रिजर्व फंड है और ज्यादातर सेंट्रल बैंक के पास इतना रिजर्व फंड नही है।

 

कहां से आता है आरबीआई का रिजर्व 

 

रिजर्व बैंक के पास कई तरह के रिजर्व फंड होते हैं। मौजूदा समय में रिजर्व बैंक और सरकार के बीच जो विवाद चल रहा है उसमें दो तरह के रिजर्व फंड शामिल हें। 

 

करंसी एंड गोल्ड रीवैल्एुशन अकाउंट 

 

रिजर्व बैंक के कुल रिजर्व में सबसे बड़ा हिस्सा करंसी एंड गोल्ड रीवैल्एुशन अकाउंट का होता है। 2017-8 में यह 6.9 लाख करोड़ था। आरबीआई भारत की तरफ से जितना सोना और विदेशी मुद्रा रखता है उसकी कुल वैल्यू करंसी एंड गोल्ड रीवैल्एुशन अकाउंट के बराबर होतीी है। सोना और विदेशी मुद्रा की बाजार कीमत घटने बढ़ने से यह घटता बढ़ता रहता है।

 

कांटीजेंसी फंड 

 

आरबीआई मॉनिटरी पॉलिसी और विदेश मुद्रा की कीमतों में उतार चढ़ाव से निपटने के लिए कांटीजेंसी फंड का उपयोग करता है। मॉनिटरी पॉलिसी की वजह से या विदेशी मुद्रा की कीमतों में उतार चढ़ाव से पैदा होने वाली स्थिति से निपटने के लिए आरबीआई बाजार में हस्तक्षेत करता है। इसके लिए आरबीआई बाजार में जरूरत पड़ने पर नगदी का प्रवाह सुनिश्चत करता है या करंसी कीमत में बड़े उतार चढ़ाव को रोकता है। 2017 -18 में रिजर्व बैंक का कांटीजेंसी फंड 2.32 लाख करोड़ रुपए था। 

 

आरबीआई का सरप्लस फंड 

 

आरबीआई हर साल केंद्र सरकार को सरप्लस फंड ट्रांसफर करता है। इसके तहत आरबीआई को अपनी जरूरतें पूरी करने के बाद बचे हुए फंड को सरकार को ट्रांसफर करना होता है। इसे ही सरप्लस फंड कहते हैं। रिजर्व बैंक को सेक्युरिटीज पर मिलने वाले ब्याज से इनकम होती है। 2017 18 में रिजर्व बैंक ने कांटीजेंसी फंड के तौर पर 14,200 करोड़ रुपए का प्रावधान किया था। यह आरबीआई का सबसे बड़ा खर्च था। रिजर्व बैंक जितना ज्यादा रकम कंटीजेंसी फंड के तौर पर रखेगा सरप्लस उतना ही कम होगा। 

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