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प्रो. स्वामीनाथन को मिलेगा 70 लाख रुपए का पुरस्कार, बने विश्व के पहले व्यक्ति

पहले विश्व कृषि पुरस्कार के लिए चुने भारत की हरित क्रांति के नायक

who is prof MS Swaminathan

नई दिल्ली. पहले विश्व कृषि पुरस्कार की ग्लोबल जूरी ने भारत की हरित क्रान्ति के चीफ आर्किटेक्ट एम एस स्वामिनाथन को चुना है। स्वामीनाथन वर्तमान समय के सबसे प्रभावी कृषि एवं पर्यावरण विज्ञानी हैं, जो भारत में खाद्य सुरक्षा के लिए हरित क्रान्ति लाने में सक्रिय रहे हैं। 

 

दुनिया भर में जाना जाता है स्वामीनाथन को 
उन्हें जेनेटिक्स, सायटोजेनेटिक्स, रेडिएशन और कैमिकल म्युटोजेनेसिस, खाद्य एवं जैव विविेधता के संरक्षण की दिशा में अनुसंधान के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। एमएस स्वामिनाथन को युनाइटेड नेशन्स एनवायरनमेन्ट प्रोग्राम द्वारा ‘फादर ऑफ इकोनोमिक इकोलोजी (आर्थिक पारिस्थितिकी के जनक)’  का दर्जा दिया गया है। 

 

गांधी, टैगोर के बाद ... 
उन्हें टाईम मैगज़ीन द्वारा बीसवीं सदी के सबसे प्रभावी बीस एशियाई लोगों की सूची में रखा गया है, इस दृष्टि से वह भारत के तीन दिग्गजों में शामिल हैं। इस सूची में मौजूद अन्य दो भारतीय महात्मा गांधी और रबिन्द्रनाथ टैगोर हैं। युनाइटेड नेशन्स के महासचिव जेवियर पेरेज़ डे स्यूलर ने कहा, ‘‘वे ऐसे अद्भुत दिग्गज हैं जिन्होंने कृषि विज्ञान के इतिहास में नया अध्याय प्रस्तुत किया है।’’ 

 

26 को मिलेगा पुरस्कार 
26 अक्टूबर 2018 को एक विशेष सत्र "Swaminathan Global Dialogue on Climate Change and Food Security"  के दौरान स्वामीनाथन को विश्व कृषि पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा । विश्व कृषि पुरस्कार की जूरी में 11 लोग हैं, जिनमें 4 भारतीय हैं- महिन्द्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिन्द्रा के अलावा खाद्य प्रसंस्करण विभाग के सचिव, डीएआरई व आईसीएआर के सचिव व नाबार्ड चेयरमैन शामिल हैं। जबकि विश्वस्तरीय दिग्गजों में आईएफपीआरआई, वाशिंगटन डीसी के डायरेक्टर जनरल, आईएलआरआई, नैराबी के डीजी, बायोडाइवर्सिटी इंटरनेशनल, रोम के डीजी, एसोसिएशन ऑफ इंटरनेशनल रीसर्च सेंटर्स इन एग्रीकल्चर के चेयरमैन व डीजी आदि प्रमुख हैं।  

 

कैसे हुई पुरस्कार की शुरुआत 
विश्व कृषि पुरस्कार की शुरूआत भारतीय खाद्य एवं कृषि परिषद द्वारा उन लोगों को सम्मानित करने के लिए की गई, जिन्होंने कृषि के माध्यम से मानवता के कल्याण में योगदान दिया हो। 100000 अमेरिकी डॉलर (लगभग 70 लाख रुपए) के विश्व कृषि पुरस्कार हर साल एशियाई, अफ्रीकी एवं लैटिन अमेरिकी देशों से लोगों एवं संस्थानों को दिए जाते हैं, जिन्होंने भुखमरी को मिटाने में अपना योगदान दिया हो। भारतीय खाद्य एवं कृषि परिषद ने इस बार प्रोफेसर डॉ. एमएस स्वामिनाथन को यह पुरस्कार देने का ऐलान किया है, जो दुनिया भर के किसानों और वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।

 

दुनिया का ध्यान भारत की ओर 

भारतीय खाद्य एवं कृषि परिषद के चेयरमैन डॉ. एम जे खान ने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था और सकल घरेलू उत्पाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, किंतु लगातार बदलते जलवायु के कारण कृषि के विकास हेतु स्थायी समाधानों की आवश्यकता है। आधुनिक तकनीकों के द्वारा कृषि क्षेत्र में सुधार किया जा सकता है। प्रोफेसर स्वामिनाथन का कार्य इन समाधानों में मदद करेगा और भारत की आधी आबादी के कल्याण में योगदान देगा जो कृषि पर निर्भर है।’’ उन्होंने कहा कि इस पुरस्कार की शुरूआत के साथ भारत दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करेगा और दुनिया भर से दिग्गज कृषि, खाद्य सुरक्षा एवं पर्यावरण स्थायित्व की दिशा में योगदान देने के लिए आगे आएंगे।’’

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