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Home » इकोनॉमी » पॉलिसी72th Independence day, PM narendra modi speech on independence day

​मोदी ने कहा- जल्‍द आएगी एग्री एक्‍सपोर्ट पॉलि‍सी, दुनिया के बाजार में किसानों की होगी सीधी पहुंच

अदरक, पुदीना, मेथी व हल्दी के निर्यात की तैयारी

72th Independence day, PM narendra modi speech on independence day

नई दि‍ल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जल्द ही एग्री एक्सपोर्ट पॉलिसी लाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आय को दोगुना करने में मदद मिलेगी। moneybhaskar.com आपको एग्री एक्सपोर्ट पॉलिसी की खासियतों के बारे में बता रहा है।

 

कृषि निर्यात के लिए 50 जिलों की पहचान

 

भारत के किसानों की अब दुनिया के बाजार में सीधी पहुंच होगी। सरकार ने कृषि उत्पाद के निर्यात के लिए देश के 50 जिलों की पहचान की है। इन जिलों में 20 कृषि आइटम के क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। क्लस्टर में खेती के साथ उत्पादित वस्तुओं को निर्यात के लायक बनाने की सारी सुविधाएं होंगी। मतलब, क्लस्टर के निकलने के बाद ये कृषि उत्पाद सीधे निर्यात के लिए पोर्ट पर जाएंगे।

 

2020 तक कृषि निर्यात को 60 अरब डॉलर करने का लक्ष्य

 

वाणिज्य मंत्रालय ने कृषि निर्यात को 2020 तक 60 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है। अभी कृषि निर्यात 31 अरब डालर का है। विश्व भर में होने वाले कृषि निर्यात कारोबार में भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 2.2 फीसदी है।

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20 कृषि उत्पादों पर होगा फोकस

वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक क्लस्टरों में 20 कृषि उत्पादों की खेती की जाएगी। खेती निर्यात बाजार को ध्यान में रखकर की जाएगी। चिन्हित उत्पादों में

 

अंगूरअनानासकेलासेबलीचीसंतरागुलाबी

प्याज, प्याज, आलू, टमाटर, चाय, कॉफी, मिर्च, अदरक, पुदीना, हल्दी, जीरा,मेथी, रबर व समुद्री उत्पाद शामिल हैं। क्लस्टर विकसित करने के लिए राज्य सरकार की भी मदद ली जाएगी। क्लस्टर में शामिल किसानों को सरकार की तरफ से इंसेंटिव भी दिए जाएंगे। हालांकि इंसेंटिव का मैकेनिज्म राज्य सरकार से परामर्श के बाद तैयार किया जाएगा।

 

सभी इलाके में होंगे कृषि निर्यात क्लस्टर

 

वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक क्लस्टर देश के सभी इलाके नार्थ, वेस्ट, ईस्ट, वेस्ट व सेंट्रल  में स्थित होंगे। वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक प्याज के लिए मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र में क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। मध्य प्रदेश के इंदौर, सागर व दामोह तो महाराष्ट्र के नासिक में प्याज के लिए क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। आलू के निर्यात के लिए उत्तर प्रदेश के आगरा, फर्रुखाबाद, पंजाब के जालंधर, कपूरथला,होशियारपुर, नवांशहर, गुजरात के बनस्कंथा, सबरकंथा तो मध्य प्रदेश के इंदौर व ग्वालियर में कल्स्टर तैयार होंगे। टमाटर के निर्यात के लिए मध्य प्रदेश के शहडोल, कर्नाटक के कोलार, आंध्र प्रदेश में करनूल तो उत्तरांचल में रूद्रपुर में क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। मेथी के निर्यात के लिए राजस्थान के सीकर व बीकानेर को चिन्हित किया गया है। लीची के निर्यात के लिए बिहार के मुजफ्फरपुर तो जीरा निर्यात के लिए गुजरात के मेहसाना व बनसकंथा चिन्हित किए गए हैं।

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निजी कंपनियां भी होंगी सहभागी

मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि कृषि निर्यात क्लस्टर विकसित करने में निजी कंपनियों को भी सहभागी बनाया जा सकता है। क्लस्टर में निर्यात सुविधा स्थापित करने में निजी कंपनियां अपना योगदान दे सकती है।

 

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक कृषि निर्यात में 52 फीसदी योगदान मांस, चावल व समुद्री उत्पाद का है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2013 में भारत का कृषि निर्यात 36 अरब डॉलर का था जबकि वर्ष 2017 में कृषि निर्यात घटकर 31 अरब डॉलर का रह गया।

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