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खास खबर: मोदी राज में क्या आपको मिला कम महंगाई का फायदा

मोदी सरकार अपने चार साल के कार्यकाल में महंगाई कम रहने को अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है।

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नई दिल्‍ली। मोदी सरकार अपने चार साल के कार्यकाल में महंगाई कम रहने को अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है। लेकिन वास्‍तविकता यह है कि महंगाई आंकड़ों में तो कम हुई लेकिन इसका फायदा उपभोक्‍तओं को नहीं मिल पाया। बाजार में खाने पीने की चीजें अब भी लोगों को ज्‍यादा कीमत पर मिल रहीं हैं। वहीं किसानों को इसका नुकसान हुआ और उनको अपनी उपज की सही कीमत नहीं मिल रही है।

 

एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि आंकडों में महंगाई अपने आप कम नहीं हुई है। सरकार ने बाजार में हस्‍तक्षेप किया है जिसकी वजह से कीमतें कम हुई हैं लेकिन किसानों को इसका नुकसान उठाना पड़ा है। वहीं उपभोक्‍ताओं को इसका कोई खास फायदा नहीं हुआ है।  बाजार में सरकार के हस्‍तक्षेप की वजह से प्राइवेट सेक्‍टर के लिए रिस्‍क बढ़ गया है और प्राइवेट सेक्‍टर एग्री सेक्‍टर में निवेश करने से कतरा रहा है। सवाल यह है कि क्‍या एग्रो इकोनॉमी मैनेजमेंट पर सरकार की असफलता की कीमत किसानों को चुकानी पड़ रही है। 

 

2014 से लगातार कम रही है होलसेल फूड प्राइस इन्‍फ्लेशन 

 

मोदी सरकार के सत्‍ता में आने के बाद से लगातार होलसेल फूड प्राइस की वृद्धि दर कम रही है। 2014-15 में होलसेल फूड प्राइस की वृद्धि दर 5.6 फीसदी थी। 2017-18 में यह दर घट कर 2 फीसदी के स्‍तर पर आ गई। कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता और राज्‍यसभा सांसद अहमद  पटेल ने हाल में एक ट्टवीट में कहा था कि 2014 के बाद से लगातार होलसेल फूड की कीमतों में लगातार गिरावट आई है। महंगाई कम होने की कीमत किसानों को चुकानी पड़ रही है। हालांकि उनके इस ट्वीट को लेकर उनकी आलोचना हुई और यह कहा गया कि यूपीए सरकार महंगाई पर लगाम नहीं लगाई पाई और उसके कार्यकाल में महंगाई बहुत अधिक थी। हालांकि अहमद पटेल के इस ट्टवीट ने कीमतें कम रहने से किसानों पर बढ़ रहे आर्थिक दबाव को एक बार फिर से सामने ला लिया है। 

 

बाजार में सरकार के हस्‍तक्षेप से कम हुईं हैं कीमतें 

 

एग्री एक्‍सपर्ट विजय सरकार ने moneybhaskar.com को बताया कि सरकार होलसेल फूड इन्‍फलेशन कम रहने को अपनी उपलब्धि बता रही है। लेकिन वास्‍तव में यह सरकार के स्‍तर पर एग्रो इकोनॉमी के पॉलिसी मैनेजमेंट का फेल्‍योर है। कीमतें अपने आप कम नहीं हुईं हैं। सरकार द्वारा बाजार में हस्‍तक्षेप करने से कीमतें कम हुई है। सरकार बाजार को अपने तरीके से काम नहीं करने दे रही है। इसकी वजह से प्राइवेट सेक्‍टर भी एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर में निवेश नहीं कर रहा है। इसका नुकसान किसान को हो रहा है। 

 

आम ग्राहकों को नहीं मिल रहा महंगाई कम होने का फायदा 

 

सरदाना का कहना है कीमतें कम होने से एक तरफ तो किसानों को नुकसान हुआ है वहीं दूसरी तरफ उपभोक्‍ताओं को भी इसका फायदा नहीं मिल रहा है। सरदाना ने बताया कि मेरे पास पंजाब के किसान आए थे। उन्‍होंने बताया कि उनको मिच की कीमत प्रति किलो 1.5 रुपए मिल रही है जबकि दिल्‍ली की मंडी में मिर्च प्रति किलो 50 रुपए किलो बिक रही है। ऐसे में सवाल यह है कि 1.5 रुपए और 50 रुपए के बीच का अंतर कहां जा रहा है। सरकार पर कुछ नहीं कर रही है। 

 

सरकार सुनिश्चित करे किसानों के लिए तय इनकम 

 

एग्रीकल्‍चर एक्‍सपर्ट देविंदर शर्मा का कहना है कि किसानों को अपनी उपज की सही कीमत नहीं मिल रही है। अगर किसी उपज का उत्‍पादन ज्‍यादा हो जाता है तो बाजार में उसकी कीमत इतनी ज्‍यादा गिर जाती है कि किसान की लागत भी नहीं मिल पाती है। ऐसे में जरूरी यह है कि हर किसान के लिए एक निश्चित इनकम सुनिश्चित की जाए। एक किसान परिवार के लिए सरकार प्रति माह 18,000 रुपए की इनकम सुनिश्चित करे। अगर किसान की प्रति माह इनकम 6,000 रुपए है तो बाकी 12,000 रुपए की भरपाई सरकार करे। 

सरकार की पॉलिसी से किसानों की कैसे बढ़ रहीं हैं मुश्किलें 

प्‍याज 
देश की सबसे बड़ी प्‍याज मंडी महाराष्‍ट्र की लासलगांव में प्‍याज की कीमतों में जनवरी से करीब 80 फीसदी की गि‍रावट दर्ज की जा चुकी है। यहां इसी साल जनवरी में प्‍याज का मॉडल प्राइज 3540 रुपए प्रति‍ क्‍विंटल था जो अप्रैल के दूसरे सप्‍ताह में 600 रुपए तक आ गया। यहां रिटेल में प्‍याज 10 से 15 रुपए कि‍लो बि‍क रही है। दि‍ल्‍ली में प्‍याज का फुटकर रेट 20 रुपए है। 
चना 
राजस्‍थान, मध्‍यप्रदेश और महाराष्‍ट्र में कि‍सानों को एमएसपी से 23.86 % से 30.15 % कम दाम मि‍ल रहे हैं। इसकी एमएसपी 4400 रुपए प्र ति‍ क्‍विंटल है। मि‍नि‍मम मॉडल स्‍पॉट प्राइज 3073 है और मैक्‍सि‍मम मॉडल स्‍पॉट प्राइज 3350 रुपए प्रति क्‍विंटल है। 

चीनी 
चीनी की कीमतें 28 महीने के निचले स्‍तर पर आ गई हैं। एक कि‍लो चीनी के उत्‍पादन की लागत करीब 36 रुपए है, जबकि थोक में चीनी के भाव 29 रुपए तक आ गए हैं। केवल अप्रैल में ही चीनी की कीमत में 10.2 फीसदी की गि‍रावट दर्ज की जा चुकी है। अक्‍टूबर में शुरू हुए पेराई सत्र से अब तक करीब 25 फीसदी दाम गि‍र चुके हैं। 
 

 

 

 

 

 

 

 

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