Home » Economy » PolicyModi Government Bets Big on Fixed Term Employment

खास खबर: फिक्‍स्ड टर्म की नौकरी पर उलटा न पड़ जाए मोदी सरकार का दांव

पिछले चार साल के दौरान युवाओं को नौकरियां न मुहैया करा पाने को लेकर निशाने पर रही मोदी सरकार ने नौकरियों पर बड़ा कदम उठा

1 of

नई दिल्‍ली। पिछले चार साल के दौरान युवाओं को नौकरियां न मुहैया करा पाने को लेकर लगातार आलोचना झेल रही मोदी सरकार ने अब इस मामले में बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत सभी सेक्‍टर की कंपनियां अपने यहां फिक्‍स्ड टर्म यानी तय समय के लिए नौकरी पर रख सकेंगी। यानी जब उनके पास काम है तब वे कर्मचारियों को तय समय के लिए रख सकेंगी और जब उनके पास काम नहीं होगा तो वे दो सप्‍ताह का नोटिस देकर कर्मचारियों को आसानी से निकाल सकेंगी।

 

नौकरी पर मोदी सरकार क्‍यों है मुश्किल में 

 

 साल कितने लोगों को मिली नौकरी 
2014 4.21  लाख 
2015  1.35  लाख 
2016 1.35 लाख 
अप्रैल-सितंबर 2017  2  लाख 

 

 

हायर एंड फायर कल्‍चर को मिलेगा बढ़ावा 

एक तरह से अब भारत में भी अमेरिका और चीन की तर्ज पर हायर और फायर कल्‍चर को बढ़ावा मिलेगा। अधिकतर एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि सरकार के इस कदम से ज्‍यादा लोगों को नौकरियां मिलेंगी और इंडस्‍ट्री को भी फायदा होगा। वहीं कुछ एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि इससे कंपनियों में इम्‍पलाई की संख्‍या यानी हेडकाउंट तो बढ़ेगा लेकिन इससे इम्‍पलाइमेंट को बढ़ावा मिलेगा, ऐसा नहीं कहा जा सकता है। एक्‍सपर्ट्स के मुताबिक कंपनियां इस नियम का मिसयूज करके ऐसी जगहों पर भी फिक्‍स्ड टर्म के लिए इम्‍पलाई की नियुक्ति करना शुरू कर देंगी जहां अभी जॉब सिक्‍योरिटी जरूरी है। वहीं ट्रेड यूनियन भी फिक्‍स्ड टर्म इप्‍लाईमेंट के विरोध में उतर आई हैं और उन्‍होंने सरकार से इस बारे में जारी किए नोटिफिकेशन को तत्‍काल वापस लेने की मांग की है। 

 

कैसी होगी फिक्‍स्ड टर्म की नौकरी 

 

फिक्‍स्ड टर्म इम्‍पलॉयमेंट का मतलब है कि कंपनियां अब तय समय के लिए कर्मचारियों को रख सकेंगी और जब उनको लगेगा कि उनको इम्‍पलाई की जरूरत नहीं है तो वे उस कर्मचारी को आसानी से यानी दो सप्‍ताह का नोटिस देकर निकाल सकेंगी। फिक्‍स्ड टर्म इम्‍पलॉयमेंट के तहत रखे गए इम्‍पलाई को भी वही सब बेनेफिट और सुविधाएं मिलेंगी जो परमानेंट इम्‍पलाई को मिलती हैं। जैसे उनको भी प्रॉविडेंट फंड, पेशन, काम के घंटे और दूसरे भत्‍त मिलेंगे जैसे परमानेंट कर्मचारियों को मिलते हैं। अब एक तरह से कंपनी इम्‍पलाई को बिना कांट्रैक्‍टर की भूमिका के सीधे तय समय के लिए नौकरी पर रख सकेगी। 

 

सरकार ने क्‍यों किया यह फैसला 

 

इंडस्‍ट्री लंबे समय से सरकार से मांग कर रही थी कि इम्‍पलाई को नियुक्ति करने के नियमों को लचीला बनाया जाए, जिससे वे मांग बढ़ने पर कर्मचारियों को नौकरी पर रख सकें और काम पूरा हो जाने पर आसानी से कर्मचारियों को हटा सकें। सरकार ने पहले टेक्‍सटाइल इंडस्‍ट्री को तय समय के लिए कर्मचारियों को नौकरी पर रखने की छूट दी। इसके बाद इंडस्‍ट्री के कई और सेगमेंट ने भी सरकार के समक्ष अपना पक्ष रख कर इसकी जरूरत बताई। कंपनियों का तर्क है कि वे मौजूदा समय में इंडस्‍ट्री को अगर तेजी से आगे बढ़ना है तो कर्मचारियों को नियुक्‍त करने के नियमों में लचीलापन जरूरी है। इससे कंपनियां ज्‍यादा लोगों को नियुक्‍त करेंगी। 

 

कंपनियों को कैसे होगा फायदा 

 

अब इंडस्‍ट्री के सभी सेगमेंट में कंपनियां किसी असाइनमेंट के लिए या तय समय के लिए इम्‍पलाई रख सकेंगी और प्रोजेक्‍ट पूरा हो जाने पर इम्‍पलाई को नौकरी से हटा सकेंगी। ऐसा कंपनियां इम्‍पलाई की सहमति से करेंगी। उनको इम्‍पलाई को हटाने से कई महीने पहले नोटिस और मुआवजा नहीं देना होगा। इकोनॉमिस्‍ट पई पनिंनदकर moneybhaskar.com को बताया कि अभी कंपनियां कर्मचारी की नियुक्ति करने में बहुत सतर्क रवैया अपनाती हैं। उनको लगता है कि परमानेंट इम्‍पलाई उनके लिए लंबे समय के लिए लायबिलिटी बन जाएगा। लेकिन अब कंपनियां आसानी से तय समय के लिए इम्‍पलाई की नियुक्ति कर सकेंगी और काम पूरा होने पर इम्‍पलाई को हटा सकेंगी। 

 

ज्‍यादा लोगों को मिलेंगी नौकरियां 

 

पईपनिंनदकर का कहना है कि यह सरकार का अच्‍छा कदम है। इससे ज्‍यादा लोगों को नौकरियां मिलेंगी। उन्‍होंने कहा कि कंपनियां इम्‍पलाई की सहमति से ही तय समय के लिए उसे नौकरी पर रखेंगी। कंपनियों को इम्‍पलाई की जरूरत तो रहती है और अगर उनको लगता है कि इम्‍पलाई उनके लिए उपयोगी है तो वे उसका टर्म पूरा होने पर दोबारा रीनिगोशिएट करके उसे नियुक्‍त कर सकती हैं। चीन ऐसा पहले से कर चुका है। इंडस्‍ट्री द्वारा इस नियम का मिसयूज करने के सवाल पर पनिंदकर का कहना है कि मुझे नहीं लगता है कि कंपनियां ऐसा कर पाएंगी। सरकार अपने इस कदम को श्रम कानूनों में सुधार के तौर पर पेश कर सकती है और वह विदेशी कंपनियों और निवेशकों को बता सकती है कि भारत में इम्‍पलाई रखना और निकालना पहले की तरह अब कठिन नहीं है। 

 

कंपनियां कर सकती है दुरुपयोग 

 

यूपीए सरकार के कार्यकाल में नेशनल एडवाइजरी काउंसिल के मेंबर रहे पूर्व आईएएस अधिकारी हर्ष मंदर का कहना है कि इससे कंपनियों में हेड काउंट तो बढ़ेगा लेकिन इससे इससे रोजगार को बढ़ावा नहीं मिलेगा। इसके अलावा कंपनियां फिक्‍स्ड टर्म इम्‍पलॉयमेट के नियम का दुरुपयोग कर सकती हैं। इम्‍पलाई को कम वेतन में ज्‍यादा समय तक काम करना पड़ेगा। इससे इंडस्‍ट्री को जरूर फायदा होगा। 

स्किल्ड वर्कफोर्स की बढ़ेगी मांग 

 

एक्‍सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्रॉफ्ट के पूर्व चेयरमैन राकेश मल्होत्रा के अनुसार सरकार का यह कदम काफी अच्छा है। इससे नौकरियों के मौके बढ़ेंगे। साथ ही कारोबारियों की लागत भी कम होगी। अभी हम फिक्सड टर्म का ऑप्शन न होने से एक हद के बाद ऑर्डर नहीं लेते हैं। नए सिस्टम में हम ज्यादा बिजनेस कर पाएंगे। साथ ही अच्छे स्किल वालों का डिमांड तेजी से बढ़ेगी। ऑटो कंपनियों के ओईएम पार्टनर रघुवंश अरोड़ा के अनुसार हमारे सेक्टर में फिक्सड टर्म से ज्यादा स्किल लोगों को लांग टर्म पर रखने की जरूरत होती है। इससे बेहतर है कि आउटपुट बेस्ड सैलरी स्ट्रक्चर को प्रमोट किया जाए। 

 

 

ट्रेड यूनियन क्‍यों कर रही हैं विरोध 

 

ट्रेड यूनियन भारतीय मजदूर संघ ने केंद्र सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है। भारतीय मजदूर संघ के प्रेसिडेंट साजी नारायण का कहना है कि सभी सेक्‍टर में फिक्‍स्‍ड टर्म इम्‍पलॉयमेंट लागू करने से हायर एंड फायर कल्‍चर को कानूनी मान्‍यता मिल जाएगी और परमानेंट नौकरी का कांसेप्‍ट ही खत्‍म हो जाएगा। 

 

 

 

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट