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Dobling of Farmers Income 

कृषि उत्पादों का दुनिया में सबसे बड़ा उत्पादक चीन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) की प्रौद्योगिकी के जरिए किसानों को सशक्त बनाने में अग्रणी देश है। चीन का मकसद साफ है। वह अपने किसानों को लागत में कटौती करने और पैदावार बढ़ाने की युक्ति डिजिटल माध्यम से बताता है। किसानों को स्मार्ट फोन पर सारी जानकारी मिल जाती है क्योंकि एआई का इस्तेमाल करके क्लाउड कंप्यूटिंग के माध्यम से किसानों के लिए आंकड़े जुटाए जाते हैं। 

Money Bhaskar

Jan 22,2019 03:48:00 PM IST


बेंगलुरू. कृषि उत्पादों का दुनिया में सबसे बड़ा उत्पादक चीन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) की प्रौद्योगिकी के जरिए किसानों को सशक्त बनाने में अग्रणी देश है। चीन का मकसद साफ है। वह अपने किसानों को लागत में कटौती करने और पैदावार बढ़ाने की युक्ति डिजिटल माध्यम से बताता है। किसानों को स्मार्ट फोन पर सारी जानकारी मिल जाती है क्योंकि एआई का इस्तेमाल करके क्लाउड कंप्यूटिंग के माध्यम से किसानों के लिए आंकड़े जुटाए जाते हैं। यह भी पढ़ें ...

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छोटे किसानों को भी होगा फायदा
भारत ने भी अब एआई सेंसर लाने की ओर कदम बढ़ा दिया है। माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के प्रेसिडेंट अनंत माहेश्वरी ने फसलों की उच्च पैदावार और बेतहर कीमत के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाकर भारत में छोटे जोत के किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है।

ये मंत्रालय कर रहे हैं काम
माहेश्वरी ने आईएएनएस एजेंसी को बताया, "कृषि में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के लिए इकोसिस्टम का निर्माण करने के लिए हम इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के साथ काम कर रहे हैं।"

इन राज्यों में मिलने लगा फायदा
तेलंगाना, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के कुछ गांवों में किसानों को कुछ ऑटोमेटेड वॉइस कॉल्स मिल रहे हैं, जिसमें उनको कपास की फसल पर कीटों के प्रकोप, मौसम की जानकारी और फसल किस चरण में है आदि की जानकारी दी जाती है।

दूसरी कंपनियों का लेंगे सपोर्ट
माहेश्वरी ने कहा, "कुछ कंपनियां किसानों को उपकरण व अन्य क्षमताओं की सेवा प्रदान कर रही हैं। हम देश में कृषि के लिए एआई आधारित बेहतर मॉडल बनाने के लिए जेनरिक क्रॉप प्रोटेक्शन व बीज कंपनी यूनाईटेड फॉस्पोरस लिमिटेड और इंजीनियरिंग कंपनी समूह एस्कॉर्ट्स जैसे कंपनियों के साथ काम कर रहे हैं।" एस्कॉर्ट्स, माइक्रोसॉफ्ट के साथ उसके क्लाउड और एआई प्रौद्योगिकी को कृषि के लिए सक्षम बनाने और किसानों को सूचनाओं के आधार पर फैसले लेने और खेती से अधिक आय कमाने में मदद करने की दिशा में काम कर रहा है।

माइक्रोसॉफ्ट ने बनाई सोइंग ऐप
माइक्रोसॉफ्ट ने इंटरनेशनल क्रॉप रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर सेमी एरिड ट्रॉपिक्स (आईसीआरआईएसएटी) के सहयोग से एक एआई-सोइंग एप बनाया है, जो मशीन लर्निंग और पावर बीआई समेत कॉरटाना इंटेलीजेंस सूट से लैस है। इस एप के माध्यम से किसानों को बुवाई के लिए उपयुक्त तिथि की सलाह दी जाएगी। किसानों को अपने खेतों में किसी प्रकार का सेंसर लगाने की कोई जरूरत नहीं है या किसी प्रकार का पूंजीगत व्यय करने की आवश्यकता नहीं है। उनको सिर्फ एक फीचर फोन की जरूरत है जिससे वे उस पर संदेश प्राप्त कर सकें।

हेल्थ सेक्टर में भी बढ़ाया कदम
स्मार्ट कृषि के लिए शुरुआती बुनियादी ढांचा तैयार करने के बाद माइक्रोसॉफ्ट ने एआई आधारित इंटेलीजेंट क्लाउड और इंटेलीजेंट एज की मदद से हेल्थ सेक्टर में टैक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने की ओर कदम बढ़ाया है। भारत में हर साल करीब 30 लाख लोग दिल हृदयाघात और तीन करोड़ लोग कोरोनरी रोग से पीड़ित होते हैं। देश में लोगों को हृदय रोग के खतरे से आगाह करने के लिए माइक्रोसॉफ्ट इंडिया ने अपोलो हॉस्पिटल के साथ मिलकर एआई से लैस पहला हृदय रोग खतरा स्कोर का एपीआई (एप्लीकेशन प्रोग्राम इंटरफेस) लांच किया है।

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