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खास खबर : जब घाटे से उबर रही थी एयर इंडिया, फिर क्‍यों बेच रही सरकार

पिछले दो-तीन सालों में घाटे से उबरने के बावजूद एयर इंडिया के विनिवेश को लेकर सवाल उठ रहे हैं

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नई दिल्‍ली. केंद्र सरकार ने एयर इंडिया का 76 फीसदी हिस्‍सा बेचने की तैयारी कर ली है। यानी एयर इंडिया में सरकार की हिस्‍सेदारी केवल 24 फीसदी ही रह जाएगी। इसके साथ ही स्‍पष्‍ट हो गया कि सरकार एयर इंडिया का मैनेजमेंट  कंट्रोल अपने पास रखने का इच्‍छुक नहीं है और बायर के पास एयर इंडिया का मैनेजमेंट कंट्रोल रहेगा। लेकिन 76 फीसदी हिस्‍सेदारी बेचने और पिछले दो-तीन सालों में घाटे से उबरने के बावजूद एयर इंडिया के विनिवेश को लेकर सवाल उठ रहे हैं। 

45 फीसदी कम हुआ घाटा 
आंकड़े बताते हैं कि पिछले दो तीन सालों से एयर इंडिया का घाटा कम हो रहा था। साल 2013-14 में एयर इंडिया का घाटा 6279 करोड़ रुपए था, जो 2016-17 में घटकर 3643 करोड़ तक पहुंच गया। एविएशन एक्‍सपर्ट हर्षवर्धन ने कहा कि एयर इंडिया घाटे से उबरने ही नहीं, बल्कि प्रॉफिट में आने की स्थिति में पहुंच रहा था, ऐसे में सरकार को चाहिए था कि वह एयर इंडिया को सपोर्ट करे, लेकिन सरकार ने उसे बेच दिया। 

 

76 फीसदी ही क्‍यों ? 
लगभग नौ महीने पहले जब सरकार ने एयर इंडिया के डिसइन्‍वेस्‍टमेंट का फैसला लिया था तो उसके बाद से यही कयास लगाए जा रहे थे कि सरकार 49 फीसदी ही हिस्‍सेदारी बेचेगी और मैनेजमेंट कंट्रोल अपने पास रखेगी। एयर इंडिया के अधिकारी भी 49 फीसदी हिस्‍सेदारी बिकने की बात कर रहे थे, लेकिन बुधवार को जारी प्राइमरी इंफॉर्मेशन मेमोरेंडम में 76 फीसदी हिस्‍सेदारी बेचने की जानकारी दी गई। हर्षवर्धन ने मनीभास्‍कर से कहा कि इस फैसले से स्‍पष्‍ट हो गया कि सरकार ने ठान लिया है कि एयर इंडिया को पूरी तरह बेच दिया। 24 फीसदी हिस्‍सेदारी तो केवल दिखावा है। 

 

बायर के पास होगा मैनेजमेंट कंट्रोल 
क्रिसिल इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर एडवाइजरी के डायरेक्‍टर एंड प्र‍ेक्टिस लीड (ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक) जगननारायण पदमानाभन ने कहा कि यह साफ हो गया है कि बिडर के पास मैनेजमेंट कंट्रोल होगा। इससे बिडर एयर इंडिया के ऑपरेशन्‍स की एफिशिएंसी बढ़ाने और बड़े से बड़े फैसले लेने में सक्षम होगा। सरकार भी अपने हिस्‍से के जरिए एयरलाइंस को वेल्‍यू एडिशन का काम करेगी। 

 

ऐसे भी बढ़ सकती है एफिशिएंसी 
हालांकि हर्षवर्धन ने कहा कि यदि सरकार एयर इंडिया की एफिशिएंसी बढ़ाना चाहती थी तो उसे मैनेजमेंट में बदलाव करना चाहिए था। एक आईएएस अधिकारी को एयर इंडिया सौंपने से एफिशिएंसी नहीं सुधर सकती। किसी सक्षम अधिकारी को एयर इंडिया की बागडोर सौंपनी चाहिए थी। 

 

क्‍या कोई खरीद पाएगा एयर इंडिया ? 
पदमानाभन कहते हैं कि एयरलाइन बिजनेस एक कैपिटल इन्‍टेंसिव बिजनेस है। जो बिडर इस बिड को लम्‍बे समय के लिए देख रहा है, वह जरूर इसमें रुचि लेगा। हालांकि आरएफपी स्‍टेज पर ज्‍यादा क्लियरिटी देखने को मिलेगी। वहीं, हर्षवर्धन ने आशंका जताई कि अब सरकार ने जो निर्णय लिया है, वह किसी एक बायर को फोकस करते हुए लिया है। 

 

पूर्व चेयरमैन ने कहा था कि मुनाफे में आ सकती है एयर इंडिया 
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी इससे पहले एयर इंडिया के सीएमडी थे, ने एक साक्षात्‍कार में कहा था कि पिछला कर्ज काफी ज्यादा है और हम उसका भुगतान कर रहे हैं। इन सभी कर्जों के बावजूद हमने वित्त वर्ष 20018 तक मुनाफे में आने का लक्ष्य रखा है। उन्‍होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और बेहतर परिचालन व्यवस्था से कंपनी की स्थिति सुधर रही है।

 

बिडर को सरकार देगी सपोर्ट 
हर्षवर्धन ने कहा कि सरकार अगर एयर इंडिया को 10 हजार करोड़ रुपए का सपोर्ट कर देती तो एयर इंडिया प्रॉफिट में आ जाता है, लेकिन सरकार ने एयर इंडिया की बजाय प्राइवेट कंपनी को पैसे देने का निर्णय लिया। उन्‍होंने कहा कि एयर इंडिया पर 50 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। सरकार इस कर्ज को कम करने के लिए 25 हजार करोड़ रुपए बिड जीतने वाली कंपनी को देगी, जो जायज नहीं लगता। 

 

आगे पढ़ें : कितने कर्ज में डूबी हैंं कंपनियां 

बिकेंगी तीन कंपनियां 
एयर इंडिया के साथ उसकी दो सहायक कंपनियों को इस विनिवेश कर रही है। आइए, जानते हैं इन तीन कंपनियों की कैपेसिटी क्‍या है। 
क्‍या है कैपेसिटी 
एयर इंडिया : 115 एयरक्राफ्ट 
एयर इंडिया एक्‍सप्रेस : 23 बोइंग एरो 
एआईएसएटीएस : 6 एयरपोर्ट में ग्राउंड हैंडलिंग 

 

 

31 मार्च 2017 तक एयर इंडिया पर कुल बकाया 
एनसीडी ( गर्वनमेंट गारंटी) : 13600 करोड़ 
फाइनेंस लीज : 7445 करोड़ 
एफआरपी टर्म लोन : 12135 करोड़ 
वर्किंग कैपिटल लोन : 11552 करोड़ 
बिल डिस्‍काउंटिंग : 334 करोड़ 
कुल : 48781 करोड़ रुपए 

 

एयर इंडिया एक्‍सप्रेस पर कुल बकाया 
एनसीडी : 95 करोड़ 
लीज ऑलिगेशन : 1113 करोड़ 
बायर्स क्रेडिट : 324 करोड़ 
ओवरड्राफ्ट : 392 करोड़ 
टर्म लोन : 673 करोड़ 
कुल : 2598 करोड़ 

 

यह है एयर इंडिया की कहानी 
1932  जेआरडी टाटा द्वारा टाटा एयरलाइंस की स्थापना
1948  सरकार ने 49 फीसदी हिस्सेदारी का किया अधिग्रहण, एयर इंडिया इंटरनैशनल के तौर पर परिचालन शुरू
1953  सरकार ने कंपनी में 100 फीसदी हिस्सेदारी ले ली
1962  एयर इंडिया इंटरनैशनल का नाम बदलकर एयर इंडिया किया गया
2000  अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार ने एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस में विनिवेश के प्रस्ताव को दी मंजूरी
2007  एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस का नैशनल एविएशन कंपनी ऑफ इंडिया के नाम से विलय
2012  यूपीए सरकार ने एयर इंडिया में वर्ष 2021 तक 30,000 करोड़ रुपए पूंजी डालने के प्रस्ताव को दी मंजूरी
2017  एनडीए सरकार ने एयर इंडिया के विनिवेश को दी सैद्धांतिक मंजूरी
2018  एयर इंडिया की 76 फीसदी हिस्‍सेदारी बेचने का फैसला 

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