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आम बजट 2018 :सबसे जरूरी है मोदी के लिए ये बजट, इन 4 फैक्टर्स ने बनाया क्रिटिकल

1 फरवरी को मोदी सरकार अपने कार्यकाल का पांचवा और शायद आखिरी पूर्णकालिक बजट पेश करने जा रही है

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नई दिल्‍ली। 1 फरवरी को मोदी सरकार अपने कार्यकाल का पांचवा और शायद आखिरी पूर्णकालिक बजट पेश करने जा रही है । 2019 में आम चुनाव होना है। ऐसे में यह प्री इलेक्‍शन ईयर बजट भी है। इन वजहों से यह बजट मोदी सरकार के लिए बेहद खास है। मोदी सरकार इकोनॉमी, नौकरी और किसानों की आय के मोर्चे पर बड़े सुधार के वादे के साथ सत्‍ता में आई थी। लेकिन आंकड़ों के लिहाज से मोदी सरकार अपने इन वादों पर अब तक खरी नहीं उतरी है। पिछले एक साल में नोटबंदी और जीएसटी की वजह से इकोनॉमी और कमजोर हुई है। इसकी वजह से ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था दबाव के दौर से गुजर रही है हाल में गुजराज विधानसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का ग्रामीण गुजरात में प्रदर्शन बेहद खराब रहा है। विश्‍लेषकों का मानना है कि ऐसा रूरल स्‍ट्रेस की वजह से है। किसानों को न तो अपनी उपज की अच्‍छी कीमत मिल रही है और न ग्रामीण युवाओं को शहरों या स्‍थानीय स्‍तर पर रोजगार। ऐसे में इन इलाकों में लोगों की सरकार से नाराजगी बढ़ रही है। इस स्थिति को बदलने के लिए मोदी सरकार के पास यह 1 फरवरी का बजट शायद आखिरी मौका है। अगर सरकार यहां पर कारगर कदम नहीं उठाती है तो आगे सरकार के पास इसके लिए पर्याप्‍त समय नहीं होगा। moneybhaskar.com ने क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्‍ट डीके जोशी से यह जानने की कोशिश की है कि 1 फरवरी को पेश होने वाला Union Budget 2018 आम आदमी से ज्‍यादा मोदी सरकार के लिए क्‍यों बेहद खास है।  

 

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Aam Budget 2018 - जीडीपी ग्रोथ में गिरावट का दौर 

 

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 अवधि जीडीपी ग्रोथ रेट 
जून, 2016  7.9 %
सितंबर 2016  7.5 %
दिसंबर 2016  7 %
मार्च 2017  6.1%
जून 2017  5.7%

सोर्से- भारत सरकार 

 

आम बजट 2018 - ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था की खराब हालत 

 

नोटबंदी और इसके बाद जीएसटी लागू होने से ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था की हालत और खराब हो गई है। किसानों को उनकी फसल की कीमत नहीं मिल रही है। शहरों में आर्थिक गतिविधियां सुस्‍त होने का असर गांवों पर भी पड़ा है और जो वर्कर शहर में काम करते और पैसा गांव भेजते थे। उसमें कमी आई है। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले युवाओं के लिए शहरों और स्‍थानीय स्‍तर भी रोजगार के मौके कम हो गए हैं। डीके जोशी का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में लोगों की मजदूरी कम हुई है। किसानो के आत्‍महत्‍या के मामले भी सामने आए हैं। युवाओं को नौकरियां नहीं मिल रहीं हैं। ऐसे में ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था में सुधार के लिए 1 फरवरी का बजट मोदी सरकार के लिए अहम है। बजट में सरकार ग्रामीण इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर खर्च बढ़ा सकती है जिससे लोगों के पास पैसा पहुंचे। 

 

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युवाओं के लिए कम हो गईं नौकरियां 

 

 

साल नौकरियां 
2014 4.21 लाख 
2015 1.35 लाख 
2016 1.35 लाख 

सोर्स-श्रम मंत्रालय 

 

गवर्नमेंट बांड की यील्‍ड 7.4 फीसदी के स्‍तर पर 

डीके जोशी का कहना है कि पिछले कुछ महीनों के दौरान गवर्नमेंट बांड की यील्‍ड बढ़ी है। मौजूदा समय में बांड यील्‍ड 7.4 फीसदी पर पहुंच गई है। पिछले कुछ महीनों में यह 6 फीसदी से बढ़ कर 7.4 फीसदी के स्‍तर पर पहुंचा है। इसका मतलब है कि सरकार को बांड पर रिटर्न के तौर पर ज्‍यादा पैसा देना होगा। ऐसे में माकेट की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार बजट में बांड यील्‍ड को लेकर क्‍या रूख अपनाती है। 

 

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प्री इलेक्‍शन ईयर 

डीके जोशी का कहना है कि 1 फरवरी को पेश होने वाला आम बजट प्री इलेक्‍शन ईयर बजट है। इसलिए भी इस बजट की अहमियत बढ़ जाती है। इस बजट के जरिए मोदी सरकार अपनी नीतियों के साथ एक साफ संकेत दे सकती है कि वह आम लोगों के लिए क्‍या करना चाहती है और अर्थव्‍यवस्‍था को लेकर उसकी क्‍या सोच है। 2019 में चुनाव के पहले सरकार के पास चुनौतियों को एड्रेस करने का शायद यह आखिरी मौका है। 

 

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