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लड़खड़ा रही है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, फंस सकता है खरीफ सीजन का क्‍लेम

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अब तक सही मकैनिज्‍म न बन पाने के कारण अब तक ट्रैक नहीं आ पाई है ओर 3 साल बाद भी लड़खड़ाती न

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नई दिल्‍ली। किसानों को फसलों के नुकसान से बचाने के लिए जोर शोर से शुरू की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अब तक सही मकैनिज्‍म न बन पाने के कारण  ट्रैक पर नहीं आ पाई है ओर 3 साल बाद भी  लड़खड़ाती नजर आ रही है। इस योजना के तहत फसलों का बीमा कराने वाले किसानों का क्‍लेम एक साल से ज्‍यादा समय से लटका हुआ है। बीमा कंपनियों को खरीफ 2017 का किसानों का डाटा अब तक नहीं मिल पाया है। इसकी वजह से खरीफ सीजन में हुए फसल की नुकसान का क्‍लेम करने वाले किसानों को क्‍लेम मिलने में देरी हो सकती है। और इसका असर रबी सीजन पर भी पड़ सकता है। ऐसे में मोदी सरकार के दावों के विपरीत यह स्‍कीम भी किसानों के लिए एक छलावा साबित हो रही है। हम आपको बता रहे हैं कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अपने मकसद में क्‍यों नहीं सफल हो पा रही है। 
 
 

पोर्टल पर अपलोड नहीं हो पा रहा कवरेज का डाटा 

 

केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़ा सारा डाटा इसके लिए तैयार किए गए पोर्टल पर डालाना जरूरी बना दिया है। बैंकों ने खरीफ 2017 में फसल बीमा योजना के तहत कवर किसानों के अकाउंट से प्रीमियम का पैसा काट लिया है और इसे बीमा कंपनियों के अकाउंट में भी जमा करा दिया है। लेकिन किस किसान ने कितने रकबे का बीमा कराया है और उस पर कितना प्रीमियम दिया गया है यह डाटा बैंक पोर्टल पर अपलोड नहीं कर पा रहे हैं। एक सरकारी बीमा कंपनी के एक वरिष्‍ठ अधिकारी ने बताया कि पोर्टल पर  कवरेज का डाटा उपलब्‍ध न होने के कारण हम प्रॉसेस को आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं। डाटा के बिना हम यह नहीं तय कर सकते हैं कि इस पर राज्‍य सरकारों को कितनी सब्सिडी देनी है और केंद्र को कितनी। डाटा फाइनल होने के बाद हम राज्‍य सरकारों को सब्सिडी की रकम जमा कराने को कह सकते हैं। 

 

स्‍क्‍ीम में 90 फीसदी कवरेज लोन लेने वाले किसानों का 

 

राज्‍यों की ओर से सब्सिडी का भुगतान होने के बाद ही केंद्र सरकार अपने हिस्‍से की सब्सिडी देगी। राज्‍यों की ओर से सब्सिडी जब तक नहीं मिलेगी तब तक हम क्‍लेम का भुगतान नहीं कर सकते हैं। अधिकारी का कहना है कि प्रॉसेस में देरी का खामियाजा किसान को उठाना होगा और उसको क्‍लेम देर से मिलेगा। अगर किसान को अपने नुकसान का क्‍लेम समय पर नहीं मिलेगा तो वह अगली फसल की तैयारी कैसे करेगा। यानी इसका असर रबी सीजन की फसल पर भी होगा। ऐसे में खुद से फसल बीमा खरीदने वाले किसान भी इस स्‍क्‍ीम से दूर हो सकते हैं। अब तक के उपलब्‍ध डाटा के अनुसार इस स्‍क्‍ीम में कवर 90 फीसदी किसान लोन लेने वाले किसान हैं। लोन लेने वाले किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा कवर अनिवार्य है। बैंक उनके लोन अमाउंट से ही प्रीमियम काट लेते हैं। सिर्फ 10 फीसदी किसान ही हैं जो खुद से फसल बीमा योजना खरीद रहे हैं। 

 

 

समय से प्रीमियम जमा नहीं कराते हैं राज्‍य 

 

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू करने वाली निजी क्षेत्र की एक और बीमा कंपनी के अधिकारी का कहना है कि इस स्‍क्‍ीम में केंद्र और राज्‍य सरकार को 50-50 फीसदी सब्सिडी 

जमा करानी होती है। केंद्र ने नियम बना दिया है कि जब तक राज्‍य सरकारें सब्सिडी नहीं देंगी वह भी सब्सिडी नहीं देगा। राज्‍य सरकारें सब्सिडी का भुगतान करने में अक्‍सर देर करती हैं। बिहार सरकार ने तो खरीफ 2016 का अब तक प्रीमियम जमा नहीं कराया है। ऐसे में किसानों को समय पर क्‍लेम का पेमेंट नहीं होता है। 

 

डाटा अपलोड नहीं हुआ तो रबी सीजन का क्‍लेम भी फंसेगा 

 

अधिकारी का कहना है कि अगर पोर्टल पर खरीफ सीजन का डाटा जल्‍द अपलोड नहीं हुआ तो रबी सीजन का क्‍लेम भी फंस सकता है। इसका कारण यह है कि पोर्टल एक ही सीजन का डाटा हैंडल नहीं पा रहा है दो एक साथ दो सीजन का डाटा कैसे हैंडल करेगा। अगर पोर्टल दो सीजन का डाटा हैंडल कर सकता है तो ठीक है वरना रबी सीजन के क्‍लेम के लिए भी किसानों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। 

 

आगे पढ़ें संसद में उठाएगी सकता है मुद्दा......


मौजूदा संसद में सत्र में उठ सकता है मुद्दा 

 

किसान नेता और स्‍वाभिमान शेतकारी संगठन से जुड़े सांसद राजू शेट्टी ने moneybhaskar.com को बताया अब तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का फायदा निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों हो ही हुआ है किसानों को इसका फायदा नहीं मिला है। उन्‍होंने माना कि पोर्टल पर प्रधानमंत्री फसल बीमा के कवरेज का डाटा अपलोड नहीं हो पा रहा है। ऐसे में खरीफ सीजन में किसानों का क्‍लेम फंस सकता है। राजू शेट्टी ने कहा कि वे संसद के मौजूदा सत्र में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़ी दिक्‍कतों का मुद्दा उठाएंगे। 

 

बढ़ा है कवरेज 

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत कवरेज बढ़ रहा है। 2014-15 में इस योजना के तहत जहां 4.67 करोड़ हेक्‍टेयर एरिया कवर हुआ था वहीं 2016-17 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत कवर एरिया बढ़ कर 5.62 करोड़ हेक्‍टेयर हो गया। 

 

 

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