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कांट्रैक्‍ट वर्कर्स को एक और झटका, नियम तोड़ने पर पेनल्‍टी देकर बच जाएंगी कंपनियां

आने वाले समय में कांट्रैक्‍ट वर्कर्स को एक और झटका लग सकता है।

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नई दिल्‍ली। आने वाले समय में कांट्रैक्‍ट वर्कर्स को एक और झटका लग सकता है। कांट्रैक्‍ट लेबर एक्‍ट के नियमों का उल्‍लंघन करने वाली कंपनियों का मामला अब अदालत नहीं जाएगा। कंपनियां अब ऐसे मामलों में गजडेट ऑफीसर के समक्ष पेनल्‍टी देकर मामला खत्‍म करा सकेंगी। मोदी सरकार ने कांट्रैक्‍ट लेबर एक्‍ट के नियमों में संशोधन का प्रस्‍ताव किया है। अगर संसद इन संशोधनों को मंजूरी दे देती है तो कांट्रैक्‍ट वर्कर्स के हितों को नुकसान होगा। 

 

एक्‍ट के उल्‍लंघन के मामले होंगे कंपाउंडेबल 

 

ट्रेड यूनियन हिंद मजदूर संभा के जनरल सेक्रेटरी हरभजन सिंह सिद्धू ने moneybhaskar.com को बताया कि मौजूदा समय में कांट्रैक्‍ट लेकर एक्‍ट के नियमों का उल्‍लंघन नॉन कंपाउंडेबल है। यानी एम्‍पलॉयर को ऐसे मामलों में कोर्ट जाना होता है और वहां से जमानत करानी पड़ती है। सरकार ने कांट्रैक्ट लेबर एक्‍ट के नियमों में संशोधन का प्रस्‍ताव किया है। इसके तहत कांट्रैक्‍ट लेबर एक्‍ट के नियमों के उल्‍लंघन को कंपाउंडेबल बनाने का प्रस्‍ताव है। यानी नियम तोड़ने वाली कंपनियों को कोर्ट नहीं जाना होगा बल्कि कंपनियां गजटेड ऑफीसर के पास पेनल्‍टी जमा करा कर मामले को खत्‍म करा सकेंगी। हरभजन सिंह सिद्धू का कहना है कि इससे एम्‍पलॉयर में कांट्रैक्‍ट लेबर एक्‍ट के नियमों का उल्‍लंघन करने की घटनाएं बढ़ेगी। 

 

शर्त पूरी न करने वाले कांट्रैक्‍टर को भी मिल जाएगा लाइसेंस 

 

इसके अलावा  संशोधन प्रस्ताव में कहा गया है कि अगर कांट्रैक्‍टर शर्ते नहीं भी पूरी करता है तो उसे सरकारी एजेंसियों के साथ काम करने का लाइसेंस एक साल के लिए मिल जाएगा। इस लाइसेंस की अवधि को बढ़ाया भी जा सकेगा। हरभजन सिंह सिद्धू का कहना है कि इससे बहुत से ऐसे कांट्रैक्‍टर को भी लाइसेंस मिल जाएगा जिनके पास पहले से काम का पर्याप्‍त अनुभव नहीं होगा। ऐसे कांट्रैक्‍टर कर्मचारियों का ईएसआई कंट्रीब्‍यूशन और पीएफ कंट्रीब्‍यूशन सरकार के पास जमा कराने के बजाए लेकर भाग सकते हैं। 

 

कांट्रैक्‍ट लेबर एक्‍ट में संशोधन करना चाहती है सरकार 

 

मौजूदा कांट्रैक्‍ट लेबर एक्‍ट में इस बात का प्रावधान है कि परमानेंट नेचर की जॉब में कांट्रैक्‍ट के आधार पर लोगों को नौकरी पर नहीं रखा जा सकता है। सरकार इस प्रावधान को हटा कर नौकरियों को कोर और नॉन कोर सेगमेंट में बांटना चाहती है। ट्रेड यूनियनों का कहना है कि सभी तरह की परमानेंट नेचर की नौकरियों को कांट्रैक्‍ट लेबर के दायरे से बाहर रख जाना चाहिए। 

 

ट्रेड यूनियन क्‍यों कर रहीं है विरोध 

 

वहीं देश की अग्रणी ट्रेड यूनियन आल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस और भारतीय मजदूर संघ ने फिक्‍स्ड टर्म के लिए नौकरी को अनुमति देने के प्रस्‍ताव का विरोध किया है। आल  इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के प्रेसीडेंट डॉ संजीव रेड्डी ने बताया कि हम फिक्‍स्ड टर्म के लिए नौकरी की अनुमति देने के प्रस्‍ताव के खिलाफ है।  संजीव रेड्डी का कहना है कि सरकार वर्कर्स के हितों की कीमत पर इंडस्‍ट्री की मदद करना चाहती है। 

 

जॉब सिक्‍योरिटी हो जाएगी खत्‍म 

 

भारतीय मजदूर संघ के महासचिव विरजेश उपाध्‍याय का कहना है कि सरकार कांट्रैक्‍ट लेबर एक्‍ट में संशोधन कर जॉब सिक्‍योरिटी खत्‍म करना चाहती है। वहीं मौजूदा कांट्रैक्‍ट लेबर एक्‍ट वर्कर्स को जॉब सिक्‍योरिटी का अधिकार देता है। विरजेश उपाध्‍याय का कहना है कि 25 साल पहले तक ट्रेड सभी नौकरियों को परमानेंट बनाने का था। वहीं मौजूदा समय में सभी नौकरियों को टेंपरेरी बनाने का ट्रेंड है। भारतीय मजदूर संघ इस ट्रेंड का पुरजोर विरोध करेगी। 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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