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खास खबर: 50 करोड़ को 5 लाख तक मुफ्त इलाज, क्‍या मोदी के लिए होगा गेमचेंजर

नई दिल्‍ली. मोदी सरकार 2019 आम चुनाव से पहले बड़ा दांव चलने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 अप्रैल को छत्‍तीसगढ़ के बीजापुर में आयुष्‍मान भारत मिशन के तहत वेलनेस सेंटर का उद्घाटन करेंगे। इस मिशन के जरिए मोदी सरकार लगभग 50 करोड़ गरीब आबादी तक पहुंचना चाहती है। इसके तहत 50 करोड़ गरीबों को 5 लाख रुपए का मुफ्त हेल्‍थ इन्‍श्‍योरेंस मिलेगा। ऐसे देश में जहां मरीज अपने इलाज पर आने वाले कुल खर्च का 62 फीसदी अपनी जेब से खर्च करता है। इलाज के लिए पैसों का इंतजाम करने के लिए लोगों की अपनी जमीन जायदाद तक बेचनी पड़ती है।

एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि अगर मोदी सरकार 2019 के चुनाव से पहले इस स्‍कीम को प्रभावी तरीके से लागू कर पाती है तो यह स्‍कीम चुनाव के लिहाज से गेम चेंजर साबित हो सकती है। इस स्‍कीम के तहत आने वाले ज्‍यादातर लोग छोटे शहरों और गांवों में रहते हैं, जहां पर स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं का ढांचा काफी कमजोर है। ऐसे में इस स्‍कीम को लागू करने की राह में बड़ी चुनौतियां भी हैं। 

 

 

मौजूदा इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का मिलेगा फायदा 

आयुष्‍मान भारत स्‍कीम को चुनावी साल में प्रभावी तरीके से लागू करने को लेकर मोदी सरकार के पास सबसे बड़ा एडवांटेज यह है कि उनको एकदम 0 से इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर नहीं तैयार करना है। भारत सरकार की राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना पहले से ही देश भर में चल रही है। इस स्‍कीम के तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को 30 हजार रुपए का कैशलेस हेल्‍थ कवर मुहैया कराया जा रहा है। इस स्‍कीम के तहत 3.5 करोड़ से अधिक परिवारों को कैशलेस स्‍मार्ट कार्ड दिया जा चुका है। इसमें से लगभग 1.5 करोड़ लोग कैशलेस इलाज की सुविधा का लाभ उठा चुके हैं।

ओरिएंटल इन्‍श्‍यारेंस कंपनी लिमिटेड के रिटायर्ड डीजीएम और राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना को लागू करने में अहम भमिका निभा चुके एनके सिंह ने moneybhaskar.com को बताया कि संभवतः सरकार आयुष्‍मान भारत स्‍कीम लागू करने में राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना का मॉडल ही अपनाएगी। इससे सरकार को कम समय में लोगों तक इसका फायदा पहुंचाने में आसानी होगी। 

 

 

आधार से रुकेगा फ्रॉड 

 

राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े की शिकायतें आती रही हैं। एनके सिंह का कहना है कि आरएसबीआई में फर्जीवाड़ा रोकना मुश्किल था, क्‍योंकि कैशलेस कार्ड लेकर कोई भी इलाज करा सकता था। लेकिन मौजूदा समय में आधार होने की वजह से मोदी सरकार के लिए आयुष्‍मान भारत स्‍कीम में फर्जीवाड़ा रोकना आसान होगा। अब सरकार लाभार्थी को कैशलेस कार्ड देने की जरूरत नहीं है और सरकार लाभार्थी की पहचान करने के साथ उसके आधार को ही आयुष्‍मान भारत स्‍कीम से लिंक कर सकती है। इससे लाभार्थी अस्‍पताल में जाकर और आधार बेस्‍ड अथेंटिकेशन प्रक्रिया के बाद कैशलेस इलाज करा सकता है। 

 

 

लागत नहीं है बड़ा मसला 

 

सरकार का मानना है कि आयुष्‍मान भारत स्‍कीम के तहत 10 करोड़ परिवारों को 5 लाख रुपए तक कैशलेस इलाज की सुविधा देने में इन्‍श्‍योरेंस प्रीमियम के तौर पर प्रति परिवार 1,000 रुपए से 1,200 रुपए तक खर्च आएगा। एनके सिंह का कहना है कि इस स्‍कीम को लागू करने में लागत बड़ा मसला नहीं है। उन्‍होंने कहा कि शुरुआत में राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना में सरकार को एक परिवार को 30,000 रुपए कैशलेस इलाज की सुविधा देने में 750 रुपए खर्च आने का अनुमान था। लेकिन बाद में बीमा कंपनियां प्रति परिवार 300 रुपए प्रीमियम पर कैशलेस इलाज की सुविधा देने को तैयार हो गईं। आयुष्‍मान भारत स्‍कीम में बीमाधारकों का बेस बढ़ जाने से भी बीमा प्रीमियम की लागत कम हो सकती है। 

 

 

देश के कमजोर तबके को होगा फायदा 

 

पूर्व आईएएस और यूपीए सरकार में नेशनल एडवाइजरी कमेटी (एनएसी) के सदस्‍य रहे हर्ष मंदर का कहना है कि इस स्‍कीम से देश के कमजोर तबके को बहुत फायदा होगा। इस स्‍कीम को लागू करने के लिए सरकार के पास पहले से आधार का डिजिटल प्‍लेटफार्म है। इससे सरकार के लिए आयुष्‍मान भारत स्‍कीम को लागू करना आसान होगा। इससे इस स्‍कीम में उस तरह से फर्जीवाड़ा होने की गुंजाइश नहीं रहेगी, जैसा राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना में था। हालांकि अभी भी बड़े अस्‍पतालों में यह आम बात है कि किसी गरीब आदमी को डांट कर भगा दिया जाता है। इस स्‍कीम को लागू करने में इस बात का ध्‍यान रखना होगा कि ऐसा न हो पाए। 

 

 

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