Home » Economy » Policyकिसानों की इनकम, रूरल इनकम और हाउसिंग सेक्‍टर पर फोकस बढ़ा सकती है मोदी सरकार - state election endorse modi government policies on economic reforms

अब 2019 पर नजर: किसानों की इनकम बढ़ाने और सबको घर देने पर फोकस करेगी मोदी सरकार

मोदी सरकार अब अपने बाकी के कार्यकाल यानी 2019 तक किसानों की इनकम, रूरल इनकम और हाउसिंग सेक्‍टर पर फोकस बढ़ा सकती है।

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नई दिल्‍ली. गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद मोदी सरकार अब अपने बाकी के कार्यकाल यानी 2019 तक किसानों की इनकम, रूरल इनकम और हाउसिंग सेक्‍टर पर फोकस बढ़ा सकती है। एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि इकोनॉमिक रिफॉर्म के मोर्चे पर न तो कोई मुद्दा लंबित है और न ही मौजूदा हालात में ऐसा करना जरूरी है। अर्थव्‍यवस्‍था अभी नोटबंदी और जीएसटी के असर से उबर रही है। फिलहाल, मोदी सरकार किसी नए रिफॉर्म में हाथ डालेगी ऐसा नहीं लगता है। दोनों राज्‍यों में खास कर गुजरात में जीत से यह भी साफ है कि अब मोदी सरकार जीएसटी को लेकर डिफेंसिव नहीं होगी और विपक्ष के लिए आने वाले समय में इसे मुद्दा बनाना आसान नहीं होगा। 

 

किसानों की इनकम बढ़ाने पर रहेगा जोर 

क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्‍ट डीके जोशी का कहना है कि मोदी सरकार अब अपने बचे कार्यकाल में  जीएसटी और नोटबंदी के फॉलोअप के तौर पर जरूरी काम करने पर फोकस करेगी। जिससे इकोनॉमी इसके असर से तेजी से उबर सके। इसके अलावा बाकी कार्यकाल में मोदी सरकार एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर खास कर किसानों की इनकम बढ़ाने पर फोकस करेगी। मोदी सरकार ने 2022 तक किसानों की इनकम को दोगुना करने का वादा किया है। ऐसे में इस मोर्चे पर सरकार कदम उठा सकती है। 

 

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रूरल इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर और हाउसिंग पर भी होगा काम 

डीके जोशी का कहना है कि इसके अलावा मोदी सरकार रूरल इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर और हाउसिंग के क्षेत्र में भी कदम उठा सकती है जिससे लोगों को सीधे फायदा दिया जा सके। रूरल इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर में निवेश बढ़ने से ग्रामीण भारत में लोगों के पास पैसा पहुंगेगा और इससे इकोनॉमी की रफ्तार भी बढ़ेगी। हाउसिंग सेक्‍टर को मजबूती देने के लिए भी सरकार कदम उठाएगी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों को घर मुहैया कराना भी सरकार की प्राथमिकता होगी। 

 

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छोटे उद्योगों पर भी बढ़ेगा फोकस 

इकोनॉमिस्‍ट प्रणब सेन का कहना है कि मौजूदा समय में एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर और छोटे उद्योगों की हालत खराब है। ऐसे में मोदी सरकार को इन दो सेक्‍टर्स पर खास तौर पर फोकस करना चाहिए। जहां तक पापुलिस्‍ट कदमों की बात है तो अनुमान है कि जीएसटी की वजह से मौजूदा वित्‍त वर्ष में राजस्‍व घटेगा। ऐसे में सरकार के पास पापुलिस्‍ट कदम उठाने की ज्‍यादा गुंजाइश नहीं है। हां अलगे एक साल में जीएसटी अगर सफल होता है तो मोदी सरकार जरूर कुछ पापुलिस्‍ट कदम उठा सकती है। 

 

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गुजरात और हिमाचल के नतीजों ने जीएसटी मुद्दे की हवा निकाली 

 

गुजरात और हिमाचल प्रदेश के नतीजों ने यह साबित किया है कि जीएसटी पर कारोबारियों की नाराजगी के बावजूद यह इतना बड़ा मुद्दा नहीं बन पाया कि पीएम मोदी को इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़े। ऐसे में अब जीएसटी को लेकर कारोबारियों को सरकार और राहत देगी इसकी उम्‍मीद कम है। विपक्ष के लिए भी अब जीएसटी को मुद्दा बनाना आसान नहीं होगा। 

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