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रोजगारपरक डायरेक्ट सेलिंग में भारत, चीन से काफी पीछे

वर्ष 2017 में डायरेक्ट सेलिंग का कारोबार 151.3 करोड़ डॉलर का रहा

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नई दिल्ली. वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ डायरेक्ट सेलिंग एसोसिएशन की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक डायरेक्ट सेलिंग  के कारोबार में भारत चीन से काफी पीछे चल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2017 में चीन में डायरेक्ट सेलिंग का कारोबार 34,291 अरब डॉलर का रहा जबकि इस अवधि में भारत में यह कारोबार सिर्फ 151.3 करोड़ डॉलर का रहा। रिपोर्ट के मुताबिक चीन में वर्ष 2017 में 53 लाख लोग डायरेक्ट सेलिंग के काम लगे थे तो भारत में 51 लाख लोग डायरेक्ट सेलिंग के कारोबार से जुड़े थे। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2017 में दुनिया भर में डायरेक्ट सेलिंग का कारोबार 189.6 अरब डॉलर का रहा। विश्व भर में 6.5 करोड़ लोग डायरेक्ट सेलिंग के काम में लगे हैं। वर्ष 2017 में डायरेक्ट सेलिंग के माध्यम से 11.7 करोड़ लोगों को स्वरोजगार के अवसर मिले। इनमें 74 फीसदी महिलाएं थीं।

 

टॉप देशों में भारत नहीं

रिपोर्ट के मुताबिक कारोबार के लिहाज से डायरेक्ट सेलिंग करने वाले दुनिया के टॉप 10 देशों में भारत शामिल नहीं है। अमेरिका पहले नंबर पर है तो चीन दूसरे नंबर पर। पहले 10 देशों में इन दोनों देशों के अलावा कोरिया, जर्मनी, जापान, ब्राजील, मेक्सिको, फ्रांस, मलेशिया व ताइवान शामिल हैं। औद्योगिक कंपनी एसोचैम में डायरेक्ट सेलिंग टास्क फोर्स के चेयरमैन विजय सरदाना ने बताया कि भारत में डायरेक्ट सेलिंग को लेकर सरकार नियम के लागू होने पर इसके तहत काफी संख्या में रोजगार निकल सकते हैं। डायरेक्ट सेलिंग कंपनी क्यूनेट के साउथ एशिया के रिजनल सलाहकार प्रमोद मंडा ने बताया कि भारत में डायरेक्ट सेलिंग कारोबार की संभावना एवं क्षमता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बिना उचित कानून के भी भारत में बिलियन डॉलर का बाजार खड़ा हो गया है।

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