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अरविंद सुब्रमण्‍यन के 5 बड़े कदम, मोदी सरकार भी है इनकी मुरीद

अमीरों को सब्‍सि‍डी छोड़ने का सुझाव देने से लेकर जीएसटी दरों का कॉन्‍सेप्‍ट देने तक का काम कि‍या।

arvind subramanian took steps to boot Indian economy

   

नई दि‍ल्‍ली। चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर (CEA) अरविंद सुब्रमण्यन ने अपना कार्यकाल खत्‍म होने से कुछ महीने पहले ही पद छोड़ दि‍या है। उनका कार्यकाल इस साल अक्टूबर में खत्म होने जा रहा है, जिसके बाद वह वापस अमेरिका लौट जाएंगे। अरविंद सुब्रमण्‍यन ने अपने कार्यकाल में अमीरों को सब्‍सि‍डी छोड़ने का सुझाव देने से लेकर जीएसटी दरों का कॉन्‍सेप्‍ट देने और इकोनॉमि‍क सर्वे को नया लुक देने तक का काम कि‍या। हालांकि‍, कई जगहों पर सु्ब्रमण्‍यन के सुझाव प्रभावशाली नहीं रहे। फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली अपनी एक फेसबुक पोस्ट के माध्यम से सुब्रमण्‍यन के पद छोड़ने की जानकारी दी है।

 

इकोनॉमि‍क सर्वे का बदला अंदाज

 

अरविंद सुब्रमण्‍यन ने इकोनॉमि‍क सर्वे का लुक बदल दि‍या और उसे नए तरीके से पेश कि‍या। उन्‍होंने पुराने डाटा की जगह नए मुद्दों को उठाने की कोशि‍श की है। उन्‍होंने नए आइडि‍या को पेश कि‍या जि‍समें क्‍लाइमेट चेंज, भारत की महि‍लाओं का योगदान, लो स्‍कि‍ल मैन्‍युफैक्‍चरिंग, यूनि‍वर्सल बेसि‍क इनकम, बि‍ना एग्‍जि‍ट कैपि‍टलि‍ज्‍म आदि‍ शामि‍ल हैं। 

 

जनधन योजना-आधार मोबाइल (JAM)   

 

सुब्रमण्‍यन ने जनधन-योजना-आधार मोबाइल फ्रेमवर्क के लि‍ए वि‍त्‍तीय समावेश को बढ़ाने में मदद की थी।

 

जीएसटी

 

उन्‍होंने जीएसटी को नि‍ष्‍पक्ष दर के करीब पहुंचाने का फ्रेमवर्क का कॉन्‍सेप्‍ट दि‍या। इसके अलावा, उन्‍होंने जीएसटी दरों पर एक समानता लाने और संवैधानि‍क संशोधनों में मदद भी की। 

 

देश की बैलेंस शीट पर नजर 

 

अरविंद सुब्रमण्‍यन ने कर्ज में दबी कंपनि‍यों और एनपीए प्रभावि‍त बैंकों की पहचान की। इसे देखते हुए सरकार ने फाइनेंशि‍यल ईयर 2016 बजट में पब्‍लि‍क इन्‍वेस्‍टमेंट को बढ़ा दि‍या। 

 

अमीरों के लि‍ए कोई सब्‍सि‍डी नहीं 

 

2015 इकोनॉमि‍क सर्वे में इस बात की ओर इशारा कि‍या कि‍ अमीरों को सब्‍सि‍डी छोड़ देनी चाहि‍ए। सब्‍सि‍डी रि‍फॉर्म और बेहतर टारगेट के लि‍ए आधार तैयार कि‍या। इसके अलावा, उन्‍होंने फर्टि‍लाइजर्स, पावर, केरोसि‍न, दाल और कपड़ों के लि‍ए पॉलि‍सी इनपुट उपलब्‍ध कराया। 

 

बैड बैंक का सुझाव 

 

उन्‍होंने बैड बैंक का सुझाव दि‍या लेकि‍न सरकार ने नया दि‍वालि‍या कानून पेश कि‍या जि‍से पूरी तरह से लागू कर दि‍या गया।

 

दरों को कम करने का सुझाव

 

जब महंगाई दर कम थी तो इकोनॉमी को बूस्‍ट देने के लि‍ए सुब्रमण्‍यन ने ब्‍याज दरों को कम करने का सुझाव दि‍या। लेकि‍न आरबीआई ने उनकी यह बात नहीं सुनी।

 

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