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सूरत में आधार डाटा चुरा कर रहे थे राशन चोरी, क्राइम ब्रांच ने 2 को कि‍या गिरफ्तार

गुजरात में सरकारी राशन दुकानदारों के अवैध तरीके से आधार डाटा चोरी करने का मामला सामने आया है।

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सूरत. गुजरात में सरकारी राशन दुकानदारों के अवैध तरीके से आधार डाटा चोरी करने का मामला सामने आया है। आरोप हैै कि‍‍ डाटा चोरी करने के बाद आरोपि‍यों ने अनाज चोरी की है। पुलि‍स के अनुसार, दो दुकान मालिक एक जाली सॉफ्टवेयर की मदद से जरूरमंदों के हक का राशन चोरी कर रहे थे। क्राइम ब्रांच ने दोनों आरोपि‍यों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, बॉयोमैट्रिक डाटा और जाली सॉफ्टवेयर मुहैया कराने वाले शख्स की तलाश की जा रही है। बता दें कि आधार डाटा की सेफ्टी को लेकर कई बार सवाल उठ चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट भी इससे जुड़े मामले पर सुनवाई कर रहा है। 

 
कैसा है राशन बांटने का इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम? 
 
- इंस्पेक्टर बीएन दवे (क्राइम ब्रांच) ने बताया कि गुजरात सरकार ने नेशनल फूड सिक्युरिटी एक्ट के तहत अप्रैल, 2016 में अन्नपूर्णा योजना शुरू की थी। इसके जरिए खोली गई सरकारी राशन की दुकानों को बाद में कंम्युटराइज्ड कर पंडित दीनदयाल ग्राहक भंडार नाम दिया गया। ताकि राशन की चोरी रुके और यह जरूरतमंदों को मिले।
 
- सरकार ने दुकान मालिकों के लिए एक एप्लीकेशन (E-FPS) तैयार किया। इसमें राशन लेने वाले सभी जरूरतमंदों का डाटा पहले से सेव किया गया। दुकानदारों को यूजर आईडी और पासवर्ड भी दिया ताकि वे राशन खरीदने वाले लोगों का इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड रख सकें।
 
- अब सरकारी मदद पर राशन लेने वाले लोगों को दुकान पर जाकर सिर्फ अपना आधार नंबर और फिंगर प्रिंट डिटेल देनी होती है। आधार के बॉयोमैट्रिक डाटा से डिटेल मैच होने के बाद एक पर्ची निकलती है।
 
फर्जी सॉफ्टवेयर के जरिए लगा रहे थे चपत 
 
पुलिस के मुताबिक, आरोपी दुकानदारों बाबूभाई बोरिवाल (53) और संपतलाल शाह (61) ने किसी अनजान शख्स से डुप्लीकेट सॉफ्टवेयर और जरूरतमंदों का बॉयोमैट्रिक डाटा हासिल किया। इसके जरिए राशन खरीदने वालों का फर्जी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा था।
 
अब क्राइम ब्रांच की टीम फर्जी सॉफ्टवेयर और बॉयोमैट्रिक डाटा मुहैया कराने वाले व्‍यक्‍ति‍ की तलाश कर रही है। इसके पहले लोगों ने राशन नहीं दिए जाने की शिकायत की थी। अफसरों ने सूरत में आपराधिक धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत अलग-अलग 8 रिपोर्ट दर्ज कराई हैं। 
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