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मोबाइल ऐप बताएगा कब आने वाली है आंधी, कब गिरेगी बिजली  

पिछले साल बिजली गिरने और आंधी के कारण 200 लोगों की मौत हो गई थी

Mobile app : alarm of thunder and storm

mobile app for alarm of thunder and storm : आँधी-बिजली से पिछले साल उत्तरी भारत में जान-माल की भारी क्षति के मद्देनजर देश के मौसम वैज्ञानिकों ने इसकी पूर्व चेतावनी की प्रणाली तैयार कर ली है और अप्रैल से मोबाइल ऐप के जरिये आम लोगों को यह चेतावनी मिलनी शुरू हो जाएगी।  

नई दिल्ली. आँधी-बिजली से पिछले साल उत्तरी भारत में जान-माल की भारी क्षति के मद्देनजर देश के मौसम वैज्ञानिकों ने इसकी पूर्व चेतावनी की प्रणाली तैयार कर ली है और अप्रैल से मोबाइल ऐप के जरिये आम लोगों को यह चेतावनी मिलनी शुरू हो जाएगी।  

 

200 लोगों की चली गई थी जान 
पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन ने सोमवार को यहाँ संवाददाताओं को बताया कि पिछले साल मानसून से पहले बड़े पैमाने पर बिजली गिरने के साथ तेज आँधी की घटनायें सामने आई थीं, जिनमें दो सौ से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। इनमें संपत्ति का भी भारी नुकसान हुआ था। 

 

अप्रैल में लॉन्च होगा ऐप 
उन्होंने बताया कि भारतीय मौसम विभाग ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मिटिरोलॉजी (आईआईटीएम) के वैज्ञानिकों ने मिलकर ऐसी प्रणाली विकसित की है जो बिजली गिरने और उसके साथ आँधी का पूर्वानुमान जारी करने में सक्षम है। इसका ऐप इस साल अप्रैल तक जारी कर दिया जाएगा। 

 

ऐप का नाम होगा दामिनी 
डॉ. हर्षवर्द्धन ने बताया कि बिजली गिरने की रियल टाइम जानकारी देने के लिए देश भर में 48 लाटनिंग सेंसर लगाये गये हैं। यह जानकारी ‘दामिनी’ ऐप पर आम लोगों को मिलनी शुरू भी हो गयी है। 

 

12 घंटे पहले मिलेगी जानकारी 
पृथ्वी विज्ञान सचिव माधवन राजीवन ने बताया कि यह जानकारी दो चरणों में उपलब्ध होगी। पहले चरण में आँधी-बिजली की संभाविता बतायी जायेगी। करीब 12 घंटे पहले इसकी जानकारी दी जा सकेगी। इसके बाद छह घंटे का पूर्वानुमान जारी किया जायेगा। यह किसी शहर के क्षेत्र विशेष के लिए होगा जिसमें बताया जायेगा कि फलाँ क्षेत्र में अगले छह घंटे में बिजली गिरने की आशंका है। 

 

ऐसे तैयार होगा पूर्वानुमान 
डॉ. राजीवन ने बताया कि इस पूर्वानुमान को जारी करने में कई तरह के आँकड़ों का सहारा लिया जायेगा। बादल का आकार, घनत्व, उसका आयनिक ध्रुवीकरण आदि के विश्लेषण के आधार पर पूर्वानुमान तैयार होगा। उन्होंने बताया कि बादल के भीतर हजारों की संख्या में बिजली कड़कती रहती है। उनमें से बिजली के जमीन तक पहुँचने की कितनी संभावना है, यह इस प्रणाली के माध्यम से तय करने की कोशिश की जा रही है। 

 

मौसम की चेतावनी के लिए भी बनेगा ऐप 
डॉ. हर्षवर्द्धन ने बताया कि इसके अलावा मौसम की समग्र जानकारी और चेतावनी आम लोगों को उपलब्ध कराने के लिए भी एक ऐप विकसित किया जा रहा है। यह इस साल जून से एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध करा दिया जायेगा।
 

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