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वैज्ञानिकों ने बनाया सोलर पावर 'ट्री', एक पेड़ से रोशन हो जाएगा पूरा घर

वैज्ञानिकों ने एक Solar power Tree (पेड़) बनाया है, जिससे 5 किलोवाट बिजली पैदा होती है

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नई दिल्‍ली. पश्चिम बंगाल स्थित CSIR-सेंट्रल मैकेनिकल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्‍टीट्यूट (CMERI), दुर्गापुर ने एक Solar power Tree (पेड़) बनाया है, जिससे 5 किलोवाट बिजली पैदा होती है। यानी कि यह पेड़ एक घर की औसत पावर डिमांड को पूरा कर सकता है। CMERI केे वैज्ञानिकों का कहना है कि एक पेड़ लगाने के लिए केवल 4 वर्ग फुट की जरूरत हीती है, जबकि 5 किलोवाट बिजली पैदा करने के लिए अभी देश में जो कन्‍वेंशनल सोलर प्‍लांट लग रहे हैं, उनके लिए 400 वर्ग फुट जमीन की जरूरत पड़ती है। सोलर पावर ट्री को सरकार ने मान्‍यता दे दी है और पिछले दिनों एक कार्यक्रम में सरकार की ओर से इसे ऑफिशियली लॉन्‍च भी कर दिया गया है। 

 

क्‍या है सोलर ट्री 

एक स्‍टील के पाइप पर सोलर पैनल पत्तियों की तरह लगाए गए हैं। सभी पैनल को वर्टिकल लगाया गया है। इस सोलर ट्री में दो घंटे का पावर बैकअप वाली बैटरी लगाई गई है, ताकि सूरज छिपने के बाद भी बिजली मिलती रहे। 

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जमीन की समस्‍या से मिलेगी निजात 
पिछले दिनों केंद्रीय विज्ञान, टैक्‍नोलॉजी एवं अर्थ साइंस मिनिस्‍टर डॉ. हर्ष वर्धन ने यह सोलर पावर ट्री लॉन्‍च किया। उन्‍होंने कहा कि यह इनोवेशन ऐसे समय में किया गया है, जब भारत में तेजी से सोलर पावर की डिमांड बढ़ रही है। सरकार 2022 तक 1 लाख मेगावाट सोलर पावर हासिल करना चाहती है, लेकिन चूंकि एक मेगावाट सोलर पावर प्‍लांट लगाने के लिए कम से कम 3.5 एकड़ जमीन की जरूरत पड़ती है। ऐसे में, सोलर पावर का टारगेट हासिल करने के लिए हजारों एकड़ जमीन की जरूरत पड़ेगी। इस वजह से कई राज्‍यों में सोलर प्‍लांट के लिए जमीन अधिग्रहण एक बड़ा मुद्दा बन गया है। ऐसे समय में सोलर पावर ट्री एक अच्‍छा विकल्‍प हो सकता है। 

 

 

पश्चिम बंगाल में लगाए 3 ट्री 
CSIR के डीजी डॉ. गिरीश साहनी का कहना है कि सीएसआईआर अभी जो डिजाइन तैयार किया गया है, उस तरह के पेड़ पश्चिम बंगाल में तीन जगह लगाए गए हैं। इन्‍हें पायलट प्रोजेक्‍ट के तौर पर लगाया गया है। उन्‍होंने कहा कि आने वाले दिनों में सोलर पावर ट्री को इस तरह से विकसित किया जाएगा कि इसके लीफ (पैनल) मोटर मैकेनिज्म सेे सूरज की दिशा के साथ अपनी दिशा बदल देंगे, ताकि पैनल अधिक से अधिक सूरज का ताप ग्रहण कर सकें, इससे इस सोलर ट्री की कैपेसिटी वर्तमान के मुकाबले 10 से 15 फीसदी और बढ़ जाएगी। 

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आगे पढ़ें : कितना आएगा खर्च 

 

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कितने में लगेगा यह सोलर ट्री 
सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि पांच किलोवाट क्षमता वाले इस सोलर ट्री की लागत लगभग पांच लाख रुपए है। हालांकि अभी देश में जो सोलर पैनल मिल रहे हैं, यदि उनसे तुलना की जाए तो 5 किलोवाट का प्‍लांट 3 से 3.50 लाख रुपए में लग जाएगा। यह बात अलग है कि इस प्‍लांट को लगाने में इस्‍तेमाल होने वाली जमीन की कीमत भी जोड़ी जाए तो यह कन्‍वेंंशनल प्‍लांट काफी महंगा पड़ेगा। 

 

 

25 से 30 फुट का होगा यह सोलर ट्री 
वैज्ञानिकों ने जो ट्री डेवलप किए हैं, वे 25 से 30 फुट ऊंचे हैं। एक वीडियो इंटरव्यू में इंस्‍टीट्यूट के चीफ इंजीनियर एसएन मैती ने कहा है कि अभी जो ग्राउंड माउंटेंड सोलर प्‍लांट लगाए जा रहे हैं, उनकी जगह यदि सोलर ट्री लगाए जाएं तो जमीन का इस्‍तेमाल खेती जैसे अन्य कामों के लिए किया जा सकता है। इन पेड़ों को सड़कों, नदियों, नहरों के किनारे लगाया जा सकता है। हालांकि अभी इतना ऊंचा यह पेड़ छत पर लगाने के लिए सुरक्षित नहीं माना जा रहा है। 

 

आगे पढ़ें : कितनी अधिक बिजली मिलेगी 

 


10 फीसदी अधिक बिजली मिलेगी 


सोलर ट्री के इंस्‍टॉलेशन की कॉस्‍ट कंवेंशनल प्‍लांट के मुकाबले लगभग पांच फीसदी महंगी है, क्‍योंकि ट्री का स्‍ट्रक्‍चर स्‍टील से बनाया गया है। ऐसा इसकी मजबूती के लिए किया गया है। हालांकि कन्‍वेंशनल सोलर पैनल को जमीन ग्राउंड लेवल पर लगाया जाता है, जबकि सोलर ट्री को 25 से 30 फुट ऊंचा लगाया जाएगा, जिसके चलते लगभग 10 फीसदी अधिक बिजली मिलेगी। 

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