Home » Economy » PolicyGovernment to spend Rs. 44,000 crore rupees to link Char Dham via Rail Network

ट्रेन से जा सकेंगे चारों धाम, 44,000 करोड़ रुपए खर्च करेगी सरकार

जल्द ही तैयार होगी इस योजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट

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मनी भास्कर नई दिल्ली।

सरकार चार धाम को रेल से जोड़ने की तैयारी कर रही है। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में मनी भास्कर को बताया कि चार धाम को रेल से जोड़ने की योजना तैयार की जा रही है। जल्द ही इस योजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयारी की जाएगी। गोयल ने बताया कि चारों धाम को रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए 44,000 करोड़ रुपए का लागत का अनुमान है। उन्होंने बताया कि चार धाम की यात्रा को रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए राज्य सरकार के साथ भी बातचीत की जा रही है। उन्होंने बताया कि सरकार की इच्छा है कि चार धाम तक परिवहन की सरल और सस्ती सुविधा मिले। उसे पर्यटन के लिहाज से भी आकर्षक बनाना होगा। विदेशों में दूरस्थ क्षेत्रों को परिवहन से जोड़ने के लिए कई माध्यमों का इस्तेमाल होता है। इससे पर्यटन के लिए भी संभावनाएं खुलती हैं। इस मार्ग पर पर्यटन के लिहाज से संभावनाओं वाले क्षेत्रों को भी विकसित किया जाएगा। चार धाम में केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री एवं युमनोत्री शामिल हैं।

 

आगे पढ़ें, 16 हजार करोड़ का होगा ऋषिकेश से कर्णप्रयाग रेल नेटवर्क

ऋषिकेश से कर्णप्रयाग रेल नेटवर्क का पहला चरण 2020 तक

 

गोयल ने मनी भास्कर को बताया कि ऋषिकेश से कर्णप्रयाग को रेल नेटवर्क से जोड़ने की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है और 2020 तक इस काम को अंजाम तक पहुंचाया जा सकता है। इस परियोजना पर 16,200 करोड़ रुपए लागत आने का अनुमान है। इसकी मंजूरी मिल चुकी है। उन्होंने बताया कि ऋषिकेश से कर्णप्रयाग रेलवे लाइन पर बिजली से ट्रेन दौड़ेगी। केंद्र सरकार ने पर्यावरण के संरक्षण के तहत यह फैसला किया है। 16 हजार करोड़ के इस प्रोजेक्ट का पहला चरण वर्ष 2020 में पूरा होगा। इसके साथ ही चारधाम यात्रा मार्ग को परिवहन के विभिन्न माध्यमों के जरिए सरल और आकर्षक बनाया जाएगा। इसमें रेल लाइन, वर्नीकुलर रेल, रोप एव सड़क परिवहन भी शामिल है। इसका प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है।

 

आगे पढ़ें, नहीं होगी पर्यावरण की अनदेखी

पर्यावरण का रखा जाएगा पूरा ख्याल

उत्तराखंड में आयोजित इंवेस्टर्स समिट के बाद गोयल ने बताया कि पर्यावरण और विकास को साथ-साथ लेकर चलना होगा। पर्यावरण की किसी सूरत में अनदेखी नहीं होगी।इसलिए ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट को बिजली पर आधारित किया है इससे पेट्रोल-डीजल से निकलने वाले धुएं से हिमालयी पर्यावरण को बचाया जा सकेगा। कहा कि इस प्रोजेक्ट के पहले चरण के तहत वर्ष 2020 तक वीरभद्र से नया ऋषिकेश तक लाइन तैयार होगी। ऋषिकेश को विश्वस्तरीय मॉडल रेलवे स्टेशन की तरह विकसित किया जाएगा।

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