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मोदी सरकार के 5 बड़े वादों का लेखा-जोखा, जानिए आपको अब तक क्या मिला

आज हम आपको बताएंगे कि मोदी सरकार की इन फ्लैग शिप योजनाओं का स्‍टेट्स क्‍या है?

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नई दिल्‍ली. 16 मई 2014 को 16वें लोकसभा चुनाव का परिणाम घोषित किया गया और भारतीय जनता पार्टी ने पूर्ण बहुमत से जीत हासिल की। इसके 10 दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व में नई सरकार बनी, जिसे अब चार साल पूरे होने वाले हैं। चार साल के दौरान मोदी सरकार ने कई महत्‍वपूर्ण योजनाओं की शुरुआत की। आज हम आपको बताएंगे कि मोदी सरकार की इन फ्लैगशिप योजनाओं का स्‍टेटस क्‍या है?

 

स्‍मार्ट सिटी मिशन

चुनाव से पहले भाजपा ने वादा किया था कि देश में 100 नई स्‍मार्ट सिटी बनाई जाएंगी। लगभग एक साल तक स्‍मार्ट सिटी के कॉन्‍सेप्‍ट को लेकर गफलत का दौर रहा और 25 जून 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्‍मार्ट सिटी मिशन लॉन्‍च भी कर दिया। मिशन लॉन्‍च हुए 3 साल होने वाले हैं, लेकिन अब तक केवल 3.41 फीसदी ही काम पूरा हो पाया है।

मिनिस्‍ट्री की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक चुनी गई 99 स्‍मार्ट सिटीज में लगभग 3,183 प्रोजेक्‍ट्स पर काम चल रहा है। इन पर लगभग 1,45,245 करोड़ रुपए की लागत का अनुमान है। इनमें से अब तक केवल 4,960 करोड़ (3.41 फीसदी) के प्रोजेक्‍ट्स पूरे हो पाए हैं। इसके अलावा 23,243 करोड़ रुपए के प्रोजेक्‍ट्स पर काम शुरू हो चुका है, जबकि 17,213 करोड़ रुपए के प्रोजेक्‍ट्स के टेंडर मांगे गए हैं।

 

प्रधानमंत्री आवास योजना

चुनावी घोषणा पत्र में वादा किया गया था कि शहरों में दो करोड़ से अधिक घर बनाए जाएंगे। 25 जून 2015 को ही प्रधानमंत्री आवास योजना (अर्बन) की शुरुआत की गई। साल 2022 तक दो करोड़ घर बनाने का टारगेट रखा गया था। अब इस स्‍कीम को तीन साल पूरे होने वाले हैं, लेकिन अप्रैल, 2018 तक लगभग 4 लाख घर ही बन पाए हैं। मिनिस्‍ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स की स्‍टेट्स रिपोर्ट बताती है कि अब तक 19.30 लाख घर बनाने का काम (अंडर कंस्‍ट्रक्‍शन) चल रहा है। इस टारगेट को हासिल करने के लिए सरकार को तीन से चार गुनी रफ्तार बढ़ानी होगी। राज्‍य सरकारों का सपोर्ट न मिलने के कारण यह स्‍कीम अब तक तेजी नहीं पकड़ पाई है।

 

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना

बेरोजगारी पर अंकुश लगाने और छोटे कारोबारियों को आसानी से लोन देने के लिए वर्तमान सरकार ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की शुरुआत की थी। मुद्रा की रिपोर्ट बताती है कि तीन साल के दौरान अब तक 9.29 करोड़ से अधिक लोगों को लोन सैंक्‍शन किया गया। लेकिन इसमें से नए कारोबारी 2.25 करोड़ के आसपास ही हैं। यानी सरकार के मकसद के मुताबिक, बैंक नए लोगों को लोन देने से कतरा रहे हैं और टारगेट हासिल करने के लिए पहले से स्‍थापित कारोबारियों को लोन दे रहे हैं।

 

स्‍टार्ट अप इंडिया

युवाओं को लुभाने के लिए जनवरी 2016 को मोदी सरकार ने स्‍टार्ट अप इंडिया की शुरुआत की थी। इसका मकसद टेक्‍नोलॉजी बेस्‍ड स्‍टार्ट-अप्‍स को फाइनेंशियल सपोर्ट देना था। इसके लिए 10 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था और कम से कम 2.5 लाख युवाओं को लाभ पहुंचाने का टारगेट रखा गया था। लेकिन दो साल से अधिक समय बीतने के बावजूद अब तक केवल 99 स्‍टार्ट अप्‍स को फंड दिया गया है।

 

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हर घर तक बिजली

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर घर तक बिजली पहुंचाने का वादा किया था। इसके लिए मिनिस्‍ट्री ऑफ पावर द्वारा पावर फॉर ऑल मिशन की शुरुआत की गई। इसके तहत, अप्रैल में हर गांव तक बिजली कनेक्‍शन पहुंचाने का वादा पूरा करने का दावा किया गया, लेकिन अक्‍टूबर 2017 से शुरू हुई सौभाग्‍य स्‍कीम अभी पूरी रफ्तार नहीं पकड़ पाई है। सौभाग्‍य का टारगेट 31 दिसंबर, 2018 तक लगभग 4 करोड़ घरों तक बिजली पहुंचाना है, लेकिन अब तक 57,61,324 घरों तक बिजली पहुंची है। अभी भी 3.26 करोड़ घरों में बिजली पहुंचानी है।

 
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