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इमारतें गिरने की घटनाओं से लें सबक, घर खरीदने से पहले करा लें 5 जरूरी जांच

ज्‍यादा के लालच में बिल्‍डर्स बिल्डिंग कंस्‍ट्रक्‍शन की क्‍वालिटी से करते हैं खिलवाड़

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नई दिल्‍ली. नोएडा, गाजियाबाद, चैन्‍नई, दिल्‍ली के द्वारका में एक-एक के बाद बिल्डिंगें गिरने (Building collapse) की घटनाएं हो रही हैं। इससे आपको सचेत होना चाहिए, खासकर तब, जब आप या आपका कोई जानकार घर खरीदने पर विचार कर रहा है। आपको सतर्कता बरतते हुए कुछ ऐसे कदम उठाने चाहिए, जिससे आप ऐसी किसी दुर्घटना से बच सकें। ज्‍यादा के लालच में बिल्‍डर्स बिल्डिंग कंस्‍ट्रक्‍शन की क्‍वालिटी से खिलवाड़ करते हैं, जिसका खामियाजा बायर को भुगतना पड़ सकता है। हम आपको यह बताने की कोशिश करेंगे कि ऐसी कौन सी सावधनियां बरत कर आप इस तरह की दुर्घटनाओं से बच सकते हैं। 

 

बि‍ल्‍डर से मांगें बिल्डिंग प्‍लान 


जब हम घर बुक कराने जाते हैं तो आपको बिल्‍डर से उस बिल्डिंग प्‍लान की कॉपी लेनी चाहिए, जो स्‍थानीय अथॉरिटी से अप्रूव हो। बिल्डिंग प्‍लान को ध्‍यान से देखना चाहिए। इस बिल्डिंग प्‍लान में बिल्डिंग के सेफ्टी फीचर्स दिए जाते हैं। यदि यह बिल्डिंग प्‍लान काफी टैक्‍निकल होने के कारण आपको समझ नहीं आ रहा है तो किसी प्राइवेट आर्किटेक्‍ट से संपर्क करें और उससे प्‍लान की जांच कराएं। साथ ही, लोकल एरिया लेआउट की भी जांच कराएं ।  

 

बि‍ल्‍डर से लें स्‍ट्रक्‍चर इंजीनियर की रिपोर्ट 


भुज में आए भीषण भूकंप के बाद देश के बिल्डिंग कोड में कई तरह के ठोस बदलाव किए गए। इनमें से एक है कि बिल्‍डर को बिल्डिंग प्‍लान अथॉरिटी से पास कराते वक्‍त किसी स्‍ट्रक्‍चर इंजीनियर से भी सर्टिफाई कराना होता है। नोएडा के प्रमुख स्‍ट्रक्‍चरल इंजीनियर प्रदीप खरबंदा ने moneybhaskar.com को बताया कि नक्‍शा पास कराते वक्‍त बिल्‍डर्स को कई ऐसे प्रावधानों का उल्‍लेख करना पड़ता है, जिससे बिल्डिंग सेफ रहे। बायर को यह रिपोर्ट तो लेनी ही चाहिए, बल्कि पजेशन लेते वक्‍त भी बिल्‍डर से पूरी बिल्डिंग का स्‍ट्रक्‍चरल स्‍टेबिलिटी सर्टिफिकेट भी लेना चाहिए। खरबंदा के मुताबिक, अभी बायर्स इस बारे में जागरूक नहीं हैं, इसलिए वे बिल्‍डर से यह सर्टिफिकेट नहीं लेते और ना ही अथॉरिटी द्वारा ऑक्‍यूपेंसी सर्टिफिकेट देते वक्‍त यह सर्टिफिकेट लिया जाता है। इसलिए बायर्स को इस बारे में जागरूक करना बेहद जरूरी है। 

 

बायर्स भी करा सकते हैं टेस्‍ट 
खरबंदा ने कहा कि यदि बायर ने कब्‍जा ले लिया है और उसके बाद उसे बिल्डिंग की कंस्‍ट्रक्‍शन क्‍वालिटी पर शक है तो वह शहर के किसी प्रमुख स्‍ट्रक्‍चरल इंजीनियर से बिल्डिंग और घर की जांच करा सकता है। इसके लिए 20 से 25 हजार रुपए का खर्च आता है, लेकिन इसके लिए स्‍ट्रक्‍चरल इंजीनियर केवल बिल्डिंग प्‍लान और बिल्डिंग को बाहर से ही देख सकता है, परंतु यदि बिल्डिंग की कंस्‍ट्रक्‍शन क्‍वालिटी का पूरी जांच करानी है तो उसमें खर्च सवा लाख से डेढ़ लाख रुपए तक आता है। इसलिए बिल्डिंग में रह रहे सब लोगों को मिलकर बिल्‍डर पर दबाव बनाना चाहिए कि वह बिल्डिंग की स्‍ट्रक्‍चरल जांच कराए या बिल्डिंग में रह रहे सब लोग मिलकर यह खर्च उठा सकते हैं। 

 

आगे पढ़ें : और क्‍या जांच हैं जरूरी 

क्‍या होती है जांच 
खरबंदा के मुताबिक, स्‍ट्रक्‍चरल इंजीनियर न केवल डिजाइन चेक करता है, बल्कि कंस्‍ट्रक्‍शन के दौरान इस्‍तेमाल मसाला (सीमेंट, रेत आदि) सरिया आदि की क्‍वालिटी भी चेक करता है। इतना ही नहीं, बिल्डिंग की लोड सहने की क्षमता भी चेक की जाती है। सरकारी बिल्डिंग की स्‍ट्रक्‍चरल जांच तो आईआईटी रूड़की, सीबीआरआई जैसी संस्‍थाएं करती हैं। पूरी बिल्डिंग की जांच में ज्‍यादा खर्च नहीं आता, इसलिए बिल्‍डर्स को बायर्स पर अपना विश्‍वास जमाने के लिए यह जांच अवश्‍य करानी चाहिए। 

 

आगे पढ़ें : ये जांच भी करा लें  

 

यह भी करें जांच 
आपको यह भी देखने की जरूरत है कि जहां आप घर ले रहे हैं, वहां पहले जमीन रेतीली तो नहीं थी। यदि वहां जमीन रेतीली थी तो बिल्‍डर से मिट्टी की जांच रिपोर्ट अवश्‍य मांगें। इसके अलावा बिल्डिंग का सीवरेज डिस्‍पोजल सिस्‍टम, पानी का लीकेज आदि की भी विशेष तौर पर जांच करा लें । क्‍योंकि यह लीकेज बिल्डिंग को कमजोर करती हैं। यदि आपकी बिल्डिंग में बेसमेंट हैं तो यह भी जांच लें‍ कि बरसात के दिनों वहां पानी तो नहीं भरता। यदि ऐसा है तो यह पूरी बिल्डिंग के लिए खतरनाक हो सकता है। 

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