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मोदी सरकार के लिए मुसीबत बन सकती है GDP, जानें क्या होता है मतलब 

हर व्यक्ति को पता होना चाहिए GDP का मतलब

What is the Gross domestic products : GDP of India

What is GDP : फिच रेटिंग्स ने अगले वित्त वर्ष 2019-20 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान लगाया है। इसके मुताबिक 2019-20 में जीडीपी GDP 7 से 6.8 प्रतिशत हो सकती है, जबकि गौर करने वाली बात है कि पिछले साल दिसंबर में मौजूदा वित्त वर्ष (Financial Year) में देश की जीडीपी 7.8 से 7.2 प्रतिशत रही थी। रेटिंग्स एजेंसी के मुताबिक, जीडीपी उम्मीद से कम रह सकती है। फिच का यह अनुमान मोदी सरकार के लिए मुसीबत बन सकता है, लेकिन चुनाव से ठीक पहले आए इन आंकड़ों का असर क्या होगा, यह कहना मुश्किल है, क्योंकि कई लोग नहीं जानते कि जीडीपी का मतलब क्या होता है, तो आइए समझते हैं कि जीडीपी का मतलब क्या होता है? 


नई दिल्ली. फिच रेटिंग्स ने अगले वित्त वर्ष 2019-20 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान लगाया है। इसके मुताबिक 2019-20 में जीडीपी GDP 7 से 6.8 प्रतिशत हो सकती है, जबकि गौर करने वाली बात है कि पिछले साल दिसंबर में मौजूदा वित्त वर्ष (Financial Year) में देश की जीडीपी 7.8 से 7.2 प्रतिशत रही थी। रेटिंग्स एजेंसी के मुताबिक, जीडीपी उम्मीद से कम रह सकती है। फिच का यह अनुमान मोदी सरकार के लिए मुसीबत बन सकता है, लेकिन चुनाव से ठीक पहले आए इन आंकड़ों का असर क्या होगा, यह कहना मुश्किल है, क्योंकि कई लोग नहीं जानते कि जीडीपी का मतलब क्या होता है, तो आइए समझते हैं कि जीडीपी का मतलब क्या होता है? 

इन तीनों चीजों पर टिकी है जीडीपी 
ग्रॉस डोमस्टिक प्रोडक्ट (GDP)  किसी भी देश की आर्थिक सेहत को मापने का पहला और जरूरी पैमाना है। जीडीपी किसी खास अवधि के दौरान कुल वस्तु और सेवाओं के उत्पादन की कीमत है। भारत में जीडीपी की गणना प्र‍त्‍येक तिमाही में की जाती है। जीडीपी का आंकड़ा अर्थव्‍यवस्‍था के प्रमुख उत्‍पादन क्षेत्रों में उत्‍पादन की वृद्धि दर पर आधारित होता है। भारत में कृषि, उद्योग व सेवा तीन प्रमुख घटक हैं जिनमें उत्‍पादन बढ़ने या घटने की औसत के आधार पर जीडीपी दर तय होती है। अगर हम कहते हैं कि देश की जीडीपी में सालाना तीन फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है तब यह समझा जाना चाहिए कि अर्थव्यवस्था तीन फीसदी की दर से बढ़ रही है। लेकिन अक्‍सर यह आंकड़ा महंगाई की दर को शामिल नहीं करता। 

दो तरह से प्रस्‍तुत किया जाता है 
जीडीपी को दो तरह से प्रस्‍तुत किया जाता है, क्‍योंकि उत्‍पादन की कीमतें महंगाई के साथ घटती बढ़ती रहती हैं। पह पैमाना है कांस्‍टैंट प्राइस, जिसके अंतर्गत जीडीपी की दर व उत्‍पादन का मूल्‍य एक आधार वर्ष में उत्‍पादन की कीमत पर तय होता है जबकि दूसरा पैमाना करेंट प्राइस है जिसमें उत्‍पादन वर्ष की महंगाई दर शामिल होती है।

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