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पाक का नया पैंतरा, कंगाली दूर करने के लिए चीन और मलेशिया की शरण में

आर्थिक संकट से निपटने के लिए पाक को मदद की जरूरत

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नई दिल्ली। पाकिस्तान ने अपने खाली खजाने को भरने के लिए नया दांव आजमाने का फैसला किया है। इसके लिए पाकिस्तान अपने तीन मित्र देशों, सऊदी अरब, चीन और मलेशिया से आर्थिक मदद हासिल करने का प्लान तैयार किया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अगले दो स्ताह में इन तीन देशों की यात्रा करेंगे और इन देशों से आर्थिक मदद हासिल करने का प्रयास करेंगे। 

 

आर्थिक संकट से निपटने के लिए पाक को मदद की जरूरत 

 

पाकिस्तान के अखबार डॉन की एक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ आज से सऊदी अरब की आाधिकारिक यात्रा पर होंगे। इसके अलावा वे इसी माह मलेशिया और अगले माह चीन की यात्रा पर जाएंगे। रिपोर्ट में पाकिस्तान के एक कैबिनेट मिनिस्टर के हवाले से कहा गया है कि प्रधानमंत्री इन मित्र देशों की यात्रा के दौरान आर्थिक मदद का मुद्दा उठा सकते हैं क्योंकि पाकिस्तान को मौजूदा समय में जारी आर्थिक संकट से निपटने के लिए मदद की जरूरत है। 

 

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पाकिस्तान को 13 अरब डॉलर की तुरंत जरूरत 

 

रिपोर्ट में कैबिनेट मिनिस्टर के हवाले से कहा गया है कि पाकिस्तान को आर्थिक संकट से निपटने और विदेशी कर्ज की किश्त का भुगतान करने के लिए 12 से 13 अरब डॉलर की तुरंत जरूरत है। कैबिनेट मिनिस्टर ने डॉन को बताया कि हमें विदेशी कर्ज चुकाने के लिए 8 अरब डॉलर और दूसरे जरूरी खर्चो के लिए 5 अरब डॉलर की तुरंत जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर हमको मित्र देशों से आर्थिक मदद मिल जाती है तो हमें मदद के लिए इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड यानी आईएमएफ के पास जाने की जरूरत नहीं होगी। 

अमेरिका के समर्थन के बिना आईएमएफ से मदद मिलनी मुश्किल 

 

मौजूदा समय में पाकिस्तान और अमेरिका के संबंध अपने सबसे निचले स्तर पर हैं। दोनों देशों के बीच जारी तनाव की वजह से माना जा रहा है कि अमेरिका आईएमएफ से पाकिस्तान को आर्थिक मदद देने के प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेगा। वहीं पाकिस्तान के लिए अमेरिका के समर्थन के बिना आईएमएफ से आार्थिक मदद हासिल कर पाना मुश्किल है। अगर आईएमएफ पाकिस्तान को आार्थिक मदद देता है तो भी वह इसके साथ कड़ी शर्तें लगा सकता है। पाकिस्तान के लिए आईएमएफ की शर्तो का पालना करना कठिन होगा। ऐसे पाकिस्तान की कोशिश है कि उसे मित्र देशों से मदद मिल जाए और उसे आईएमएफ के पास न जाना पड़े। 

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