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तीन साल में राज्य सरकारों ने माफ किया 90 हजार करोड़ का कर्ज, आपको चुकानी होगी कीमत

कर्ज माफी से बढ़ती है एनपीए की समस्या

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नई दिल्ली।  राज्य सरकारों ने 2016 से अब तक यानी लगभग 3 साल में किसानों का लगभग 90,000 करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज माफ किया है। कर्ज माफ करने वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, पंजाब, मध्य प्रदेश सहित 10 राज्य और केंद्र शासित क्षेत्र शामिल हैं।  ऐसे समय में जब पीएसयू बैंक पहले ही नॉन परफॉर्मिंग असेट यानी एनपीए की समस्या का सामना कर रहे हैं, राज्यों द्वारा किसानों का कर्ज माफ करने से बैंकों पर दबाव बढ़ा है। रिजर्व बैंक की चेतावनी के बावजूद राज्य सरकारें लगातार किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा कर रही है। आखिरकार  इसकी कीमत आम जनता को ही चुकानी पड़ती है। 

 इन राज्यों ने किया कर्ज माफ

 

राज्य   कर्ज माफी   करोड़ में 
तमिलनाडु  5318.75 
महाराष्ट्र  30,500 
उत्तर प्रदेश  36,359
कर्नाटक  8,165
पंजाब  10,000
जम्मू कश्मीर  244
छत्तीसगढ़  129.76 

 

कर्ज माफी से बढ़ती है एनपीए की समस्या 

 

भारतीय स्टेट बैंक के एक पूर्व अधिकारी ने moneybhaskar.com को बताया कि जब केंद्र या राज्य सरकारें किसानों का कर्ज माफ करती हैं तो इससे किसानों को इस बात की उम्मीद बढ़ जाती है कि आगे भी सरकारें कर्ज माफ करेंगी। इससे ऐसा किसान भी कर्ज नहीं चुकाता है तो कर्ज चुकाने में सक्षम है और इससे बैंकों का लोन फंस जाता है। इससे पहले ही एनपीए की समस्या का सामना कर रहे बैंकों पर दबाव बढ़ जाता है। 

 

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आम जनता को होता है नुकसान 

 

राज्य सरकारें या केंद्र सरकार अगर किसानों का कर्ज माफ करती हैं तो उनको माफ किए गए कर्ज की भरपाई बैंकों को करनी पड़ती है। राज्य सरकारें या केंद्र सरकार यह पैसा आम  जनता की हितों की कीमत पर ही बैंकों देती हैं। अगर कर्ज माफ नहीं हुआ होता है तो सरकार यह पैसा विकास से जुड़ी गतिविधियों पर या स्वास्थ्य या शिक्षा से जुड़ी सुविधाओं को बढ़ावा देने पर खर्च करती। यानी कर्ज माफी से आखिरकार जनता को ही नुकसान उठाना पड़ता है। 


रिजर्व बैंक पहले ही दे चुका चेतावनी 

 

भारतीय रिजर्व बैंक पहले किसानों की कर्ज माफी स्कीम को लेकर राज्य और केंद्र सरकार को चेतावनी दे चुका है। रिजर्व बैंक के गर्वनर ऊर्जित पटेल एक बयान में कहा है कि किसानों की कर्ज माफी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं है और इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि किसानों की कर्ज माफी से राज्यों की वित्तीय स्थिति कमजोर हो सकती है और इससे महंगाई बढ़ सकती है। 

पीएसयू बैंकों का एनपीए 9 लाख करोड़ 

मार्च, 2018 में पीएसयू बैंकों का एनपीए बढ़ कर लगभग 9 लाख करोड़ रुपए हो गया है। वहीं अगर प्राइवेट सेक्टर के बैंकों का एनपीए भी मिला लिया जाए बैंकों का कुल एनपीए 10.25 लाख करोड़ रुपए हो गया है। 

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