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इकोनॉमिक सर्वे: रेंटल हाउसिंग मॉडल लाए सरकार, तब ही मिलेगा सबको घर

सरकार को रेंटल हाउसिंग और रियल एस्‍टेट के ऑक्‍यूपेंसी पर फोकस करने की आवश्‍यकता है

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नई दिल्‍ली। सोमवार को पेश इकोनॉमिक सर्वे 2017-18 में कहा गया है कि सरकार को रेंटल हाउसिंग और रियल एस्‍टेट के ऑक्‍यूपैंसी पर फोकस करने की आवश्‍यकता है, क्‍योंकि हाउसिंग सेक्‍टर में वैकेंसी रेट लगातार बढ़ता जा रहा है। 

 

बिल्डिंग बनाने पर ही रहा फोकस 
लोकसभा में पेश किए गए सर्वे में कहा गया है कि भारत में घरों की जरूरत के आंकड़े काफी पेचीदा हैं, लेकिन अब तक सरकारों ने पॉलिसी के नाम पर केवल बिल्डिंग बनाने और घर का मालिकाना हक दिलाने पर ही फोकस किया। लेकिन अब हमें अपनी रणनीति बदलनी होगी, जिसमें रेंटल हाउसिंग पर फोकस करना होगा। 

 

रेंटल मार्केट को पहचानना होगा 
हालांकि घरों के मालिकाना हम को लेकर अच्‍छे कारण हैं, लेकिन अर्बन इकोसिस्‍टम में रेंटल मार्केट को पहचानना भी बहुत जरूरी है। 

 

स्‍पाटियल डिस्‍ट्रीब्‍यूशन पर फोकस जरूरी 
सर्वे में सुझाव दिया गया है कि पॉलिसी मेकर्स को कॉन्‍ट्रैक्‍ट इंफोर्समेंट, प्रॉपर्टी राइट्स और घरों की सप्‍लाई का स्‍पाटियल डिस्‍ट्रीब्‍यूशन पर फोकस करना होगा। 

 

कॉन्‍ट्रेक्‍ट इंफोर्समेंट का समाधान हो 
भारत में पिछले दशकों में रेंट कंट्रोल और प्रॉपर्टी राइट्स में क्लीयरिटी न होने के कारण कॉन्‍ट्रैक्‍ट इंफोर्समेंट में परेशानी आती रही है। इस परेशानी का समाधान करना चाहिए, जिसमें होरिजोंटल और वर्टिकल मोबिलिटी को मंजूरी दी जानी चाहिए। साथ ही, हाई वैकेंसी रेट पर भी ध्‍यान देना चाहिए। 

 

मुंबई में खाली हैं सबसे ज्‍यादा घर
हालांकि अर्बन एरिया में हाउसिंग की शॉर्टेज है, साथ ही इन शहरों में वैकेंट हाउस की संख्‍या भी बढ़ रही है। मुंबई में 4.80 लाख घर खाली हैं, जबकि दिल्‍ली-बेंगलुरू में लगभग 3-3 लाख घर खाली हैं। गुरुग्राम में कुल रेसिडेंशियल स्‍टॉक का लगभग 26 फीसदी घर खाली हैं। 

 

जगह के हिसाब से डिस्‍ट्रीब्‍यूशन 
घनी आबादी वाले शहरों में दूरी की वजह से भी वैकेंसी रेट बढ़ता जा रहा है, इसलिए नए रियल एस्‍टेट में जगह के हिसाब से डिस्‍ट्रीब्‍यूशन (स्‍पाटियल डिस्‍ट्रीब्‍यूशन) पर फोकस करना चाहिए। 

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