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खास खबर: GDP @ 7.2% : इकोनॉमी की सेहत अच्‍छी, खास ट्रीटमेंट का समय

जीडीपी की 7.2 फीसदी ग्रोथ रेट अपने आप में दिखाती है कि हमारे देश की इकोनॉमी एक बार फिर से मजबूती की राह पर है।

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नई दिल्‍ली। मौजूदा वित्‍त वर्ष की दिसंबर तिमाही  में  जीडीपी की 7.2 फीसदी ग्रोथ रेट अपने आप में दिखाती है कि हमारे देश की इकोनॉमी एक बार फिर से मजबूती की राह पर है। लेकिन अगर हम जून तिमाही मे 5.3 फीसदी जीडीपी ग्रोथ रेट को याद करें तो जीडीपी का यह आंकड़ा बेहद अहम हो जाता है। जून तिमाही के बाद जीडीपी डाटा की चौक चौराहे से लेकर टीवी स्‍टूडियो में इकोनॉमी की खराब सेहत पर चिंता जताई जा रही थी। ऐसे में 7.2 फीसदी जीडीपी ग्रोथ रेट क्‍या अपने आप में इकोनॉमी की सेहत को लेकर उठ रहे तमाम सवालों का जवाब दे देती हैं या यह डाटा भी इकोनॉमी को लेकर कई सारे सवाल खड़े करता है। 

 

एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि 7.2 फीसदी जीडीपी ग्रोथ यह दिखाती है कि इकोनॉमी के कुछ अंग बेहतर तरीके से काम कर रहे हैं वहीं कुछ अंग अपनी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पर पा रहे हैं। ऐसे में अगर आप इकोनॉमी की तुलना अपने शरीर से करें से इकोनॉमी को पूरी तरह से सेहतमंद नहीं कहा जा सकता है। अभी भी कई ऐसे फैक्‍टर हैं जो इस बात पर जोर देते हैं कि अभी इकोनॉमी को फिट घोषित करने से पहले अगली कुछ तिमाही के डाटा का इंतजार करना होगा। वैसे दिसंबर तिमाही का जीडीपी डाटा सबको टाकिंग प्‍वाइंट देता है। चाहे वह सरकार हो विपक्ष के राजनीतिक दल हों या स्‍वतंत्र विश्‍लेषक। आप जिस चश्‍मे से चाहे जीडीपी के ताजा डाटा को देख सकते हैं। 

 

एग्रीकल्‍चर और इन्‍वेस्‍टमेंट दिखाते हैं अच्‍छी तस्‍वीर 

 

तीसरी तिमाही में एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर और इन्‍वेस्‍टमेंट इकोनॉमी की अच्‍छी तस्‍वीर दिखाते हैं। इकोनॉमस्टि पई पनिंदकर ने moneybhaskar.com को बताया कि एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर की ग्रोथ 4.1 फीसदी रही है तो उम्‍मीद से काफी अधिक है। इसके अलावा इन्‍वेस्‍टमेंट खास कर पब्लिक सेक्‍टर का खर्च बढ़ा है। इन्‍वेस्‍टमेंट बढ़ने से रोजगार पैदा होता है। इस लिहाज से यह इकोनॉमी की अच्‍छी तस्‍वीर दिखाता है। क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्‍ट डीके जोशी का कहना है कि पिछले कुछ सालों के दौरान इन्‍वेस्‍टमेंट नहीं बढ़ रहा था। इसमें ग्रोथ दिख रही है। यह इकोनॉमी के लिए अच्‍छा संकेत है। इसके अलावा कंस्‍ट्रक्‍शन सेक्‍टर की ग्रोथ भी अच्‍छी रही है। कंसट्रक्‍शन सेक्‍टर बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करता है। 

 

सस्‍टेनेबल ग्रोथ वाले फैक्‍टर कमजोर 

 

अगर सस्‍टेनेबल ग्रोथ की बात करें तो यह इंडस्‍ट्री, मैन्‍यूफैक्‍चरिंग और सर्विस सेक्‍टर के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। पई पनिंदकर का कहना है कि तीसरी तिमाही में इंडस्‍ट्री, मैन्‍यूफैक्‍चरिंग और सर्विस सेक्‍टर के प्रदर्शन में खास सुधार नहीं दिख रहा है। ऐसे में अभी यह पूरी तरह से नहीं कहा जा सकता है कि इकोनॉमी अपनी कमजोरी को पीछे छोड़ चुक है। पनिंदकर के मुताबिक एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर का प्रदर्शन मानसून जैसे फैक्‍टर्स पर ज्‍यादा निर्भर करता है। इस पर किसी का नियंत्रण नही है। अगली तिमाही में एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर की ग्रोथ घट कर 2 फीसदी पर भी रह सकती है। 

 

आगे पढें- मांग और एक्‍सपोर्ट का डाटा है कमजोर 
 

 

मांग और एक्‍सपोर्ट का डाटा है कमजोर 

तीसरी तिमाही का जीडीपी डाटा बताता है कि इकोनॉमी में मांग नहीं बढ़ रही है। मांग स्थिर है। किसी भी इकोनॉमी में अगर मांग स्थिर है तो यह इकोनॉमी के लिए अच्‍छी बात नहीं होती है। डीके जोशी का कहना है कि तीसरी तिमाही में एक्‍सपोर्ट सेक्‍टर का प्रदर्शन कमजोर रहा है। एक्‍सपोर्ट सेक्‍टर का कमजोर डाटा जीडीपी ग्रोथ को पीछे खींच रहा है। 

नोटबंदी और जीएसटी का असर हो रहा है खत्‍म 

डीके जोशी का कहना है कि जीडीपी डाटा बताता है कि नोटबंदी का असर इकोनॉमी पर से खत्‍म हो रहा है। इसके अलावा जीएसटी लागू होने से जो दिक्‍कतें पैदा हुई थीं उसका असर भी धीरे धीरे कम हो रहा हे। आने वाले समय में भी जीडीपी ग्रोथ में तेजी का मोमेंटम बरकरार रहने की उम्‍मीर है। हालांकि अभी हमें इकोनॉमी की स्थिति को लेकर कोई राय बनाने  के लिए अगली कुछ तिमाही का इंतजार करना होगा। 

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