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अनंत कुमार ने खुलवाए 4000 से अधिक जन औषधि केंद्र, मिलती है 700 से ज्यादा सस्ती जेनरिक दवाएं

पेटेंटेड दवाओं की तरह ही इलाज में कारगर हैं जेनरिक दवाएं

anant kumar big effort toward jan aushdhi scheme


महेंद्र सिंह, दिल्ली। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री अनंत कुमार ने अपने कार्यकाल में 4,000 से अधिक जनऔषधि केंद्र खुलवाए है। इन जन औषधि केंद्रों पर 700 से अधिक जेनरिक दवाएं उपलब्ध हैं। जेनरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में काफी सस्ती होती हैं। हालांकि वे दवाएं ब्रांडेड दवाओं के समान ही इलाज में प्रभावी होती हैं। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री अनंत कुमार का आज सुबह निधन हो गया है। उनका कैंसर का इलाज चल रहा था। 

 

सस्ती दवाओं के लिए खुलवाएं 4,000 से अधिक जनऔषधि केंद्र 

 

2014 में जब मोदी सरकार सत्ता में आई थी उस समय देश में कुल 99 जनऔषधि केंद्र थे। मौजूदा समय में देश भर में जन औषधि केंद्रों की कुल संख्या 4,300 से अधिक हो गई है। यानी केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री अनंत कुमार ने अपने 4 वर्ष से अधिक समय के कार्यकाल में भारतीय जन औषधि परियोजना के तहत 4000 से अधिक जन औषधि केंद्र खुलवाए। इससे देश के तमाम इलाकों में लोगों तक सस्ती दवाओं की पहुंच सुनिश्चत की गई। 

 

गुणवत्ता पूर्ण जेनरिक दवाएं उपलब्ध कराना है स्कीम का मकसद 

 

मोदी सरकार ने 2014 में सत्ता में आने के बाद भारतीय जन औषधि परियोजना के तहत देश भर में बड़े पैमाने पर जन औषधि केंद्र खोलने का काम शुरू किया गया। इस स्कीम का मकसद आम लोगों को कम कीमत में गुणवत्तापूर्ण जेनरिक दवाएं उपलब्ध कराना है। 

 

क्यों सस्ती होती है जेनरिक दवाएं 

 

जेनरिक दवाएं भी ब्रांडेड या पेटेंटेड दवाओं की तरह ही इलाज में कारगर होती है। जब भी कोई कंपनी नई दवा की खोज कराती है तो उसे एक तय समय के लिए उस दवा का पेटेंट मिल जाता है। यानी वह दवा वही कंपनी बना कर बेच सकती है। उस कंपनी को उस दवा की कीमत तय करने का अधिकार भी होता है। इस वजह से पेटेंटेड दवाएं बहुत महंगी होती हैं। पेटेंट की अवधि खत्म हो जाने के बाद उस दवा को बनाने का फार्मूला सार्वजनिक कर दिया जाता है। अब यह दवा कोई भी कंपनी बना सकती है। इसे ही जेनरिक दवा कहते हैं। जेनरिक दवाएं इसीलिए सस्ती होती हैं। कुछ कंपनियां इन दवाओं को बना कर अपने ब्रांड नेम से बेचती हैं। कंपनियां अपने ब्रांड को प्रमोट करने के लिए मार्केटिंग पर पैसा खर्च करती हैं। इसलिए ब्रांडेड दवाओं की कीमत अधिक होती है। इन दवाओं को ब्रांडेड जेनरिक भी कहते हैं। 


यूपीए सरकार ने शुरू की थी जन औषधि स्कीम 

 

यूपीए-1 के दौरान जन औषधि स्कीम शुरूकी गई थी। स्कीम का मकसद आम लोगों को सस्ती दवाएं मुहैया कराना था। तत्कालीन केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री राम विलास पासवान  के कार्यकाल में इस स्कीम के तहत देश भर में 100 से अधिक जन औषधि केंद्र खोले गए थे। लेकिन केंद्र पर दवाओं की उपलब्धता न होने और जेनरिक दवाओं की बिक्री कम होने के कारण यह स्कीम आम लोगों को खास राहत नहीं दे सकी। 

 

 

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