Home » Economy » Policy7.7 % जीडीपी ग्रोथ पर मत इतराओ सरकार, तेल कीमतें, निजी निवेश और एक्‍सपोर्ट थाम सकते हैं तरक्‍की की रफ्तार

खास खबर: कब तक रहेगी 7.7% GDP ग्रोथ, इकोनॉमी में बने हुए हैं 3 बड़े खतरे

वित्‍त वर्ष 2017- 18 की मार्च तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 7.7 फीसदी रही। आम जनता से ज्‍यादा यह सरका के लिए अच्‍छी खबर है

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नई दिल्‍ली. वित्‍त वर्ष 2017- 18 की मार्च तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 7.7 फीसदी रही। आम जनता से ज्‍यादा यह सरकार के लिए अच्‍छी खबर है। लेकिन ऊंची ग्रोथ रेट के बावजूद देश की अर्थव्‍यवस्‍था की सेहत बहुत अच्‍छी नहीं है। एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि तेल कीमतों में इजाफा, निजी निवेश का अपेक्षा के अनुरूप न बढ़ना और एक्‍सपोर्ट सेक्‍टर का खराब प्रदर्शन जारी रहना और एग्रीकल्‍चर सेक्‍टर की ग्रोथ में सुस्‍ती अर्थव्‍यवस्‍था के लिहाज से बड़ी चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों का समाधान करके ही देश की अर्थव्‍यवस्‍था की ग्रोथ को लगातार ऊंची बनाए रखा जा सकता हैैै। 

सेक्‍टर वाइज ग्रोथ रेट  (फीसदी में )

मार्केट प्राइस पर 2014 2015 2016 2017 2018
निजी क्षेत्र का निवेश  7.3 6.4 7.4 7.3 6.6
सरकारी निवेश  0.6 7.6 6.8 12.2 10.9
फिक्‍स्ड निवेश  1.6 2.6 5.2 10.1 7.6
निर्यात  7.8 1.6 -5.6 5.0 5.6
आयात  -8.1 0.9 -5.9 4.0 12.4
जीडीपी   6.4 7.4 8.2 7.1 6.7

 सोर्स- क्रि‍सिल 

 

नहीं बढ़ रहा है प्राइवेट सेक्‍टर का निवेश 

 

सेक्‍टर के आधार पर ग्रोथ देखें तो पता चलता है कि प्राइवेट सेक्‍टर का निवेश अपेक्षा के अनुरूप नहीं बढ़ रहा है। इकोनॉमिस्‍ट पई पनिंदकर का कहना है कि जब तक प्राइवेट सेक्‍टर का निवेश तेजी से नहीं बढ़ेगा, इकोनॉमी को वो मजबूती नहीं मिलेगी जो लंबी अवधि में ऊंची ग्रोथ रेट बनाए रखने के लिए जरूरी है। इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर सरकारी निवेश भी कुछ खास नहीं बढ़ रहा है। 

 

 

तेल कीमतों में इजाफा 

 

केंद्र सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में तेल कीमतें बढ़ने की है। क्रूड की कीमतें 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। तेल कीमतें अगर 75 डॉलर प्रति बैरल से नीचे नहीं आती हैं तो यह इकोनॉमी के लिहाज से यह बड़ी चुनौती बन सकती है। पई पनिंदकर का कहना है कि 75 डॉलर प्रति बैरल के स्‍तर पर तेल कीमतें रहने से जीडीपी ग्रोथ 0.5 फीसदी तक कम हो जाती है। 'इकोनॉमी इन रिकवरी मोड' शीर्षक से जारी क्रिसिल की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर तेल कीमतें मौजूदा स्‍तर पर बनी रहती हैं तो यह जीडीपी ग्रोथ की रफ्तार को सुस्‍त कर सकती है। 

 

 

निर्यात के मोर्चे पर कमजोर प्रदर्शन 

निर्यात के मोर्चे पर कमजोर प्रदर्शन जारी है। वित्‍त वर्ष 2014 में निर्यात की ग्रोथ 7.8 फीसदी रही थी, वहीं 2018 में यह 5.6 फीसदी रही है। सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद निर्यात के मोर्चे पर प्रदर्शन कमजोर बना हुआ है। निर्यात में खराब प्रदर्शन की वजह से इकोनॉमी पर खतरा बना हुआ है। 

 

 

चालू खाता घाटा बढ़ने का खतरा 

 

एसबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक अगले एक जीडीपी ग्रोथ को लेकर ऊंची तेल कीमतें और कॉपर की सप्‍लाई में बाधा जैसे जोखिम हैं। इससे देश का चालू खाता घाटा बढ़ सकता है इसके अलावा बाढ़ और भूराजनैतिक जोखिम भी हैं। केंद्र सरकार को जीएसटी लागू करने की प्रक्रिया को और आसान बनाने और रिफंड की प्रक्रिया को तेज करने के लिए कदम उठाने होंगे। पीएसयू लाभांश और किसानों को उनकी उपज की लागत पर 50 फीसदी मुनाफा जोड़कर एमएसपी देने से राजकोषीय मोर्चे पर दबाव बढ़ सकता है और सरकार को इसे दूसरे स्रोत से संतुलित करना होगा।

 

मूडीज ने घटाया जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 

 

मूडीज इन्‍वेस्‍टर्स सर्विस ने 2018 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7.5 फीसदी से घटाकर 7.3 फीसदी कर दिया है। रेटिंग एजेंसी ने कहा है कि भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में रिकवरी है लेकिन तेल की बढ़ती कीमतें और राजकोषीय दबाव बढ़ने से इसकी रफ्तार धीमी होगी। हालांकि, मूडीज ने 2019 के लिए 7.5 फीसदी ग्रोथ रेट के अनुमान को बरकरार रखा है। 

 

 

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