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मासूम से बलात्‍कार के मामलों में होगी फांसी, कैबिनेट ने अध्‍यादेश को दी मंजूरी

मासूम से बलात्‍कार के मामलों में मौत की सजा दी जा सकेगी

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नई दिल्‍ली। लाबालिग से बलात्‍कार के मामलों में मौत की सजा दी जा सकेगी। केंद्र सरकार ने शनिवार के इसके लिए क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट को मंजूरी दे दी है। हाल देश के अलग अलग इलाकों में नाबालिग बच्च्यिों से बलात्‍कार के कई मामले सामने आए है। इन मामलों को लेकर आम जनता में आक्रोश है। केंद्र सरकार ने इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए इस संशोधन को मंजूरी दी है। 

 

12 साल से कम उम्र के बच्‍चों के लिए हुआ संशोधन 

 

12 साल कम उम्र के बच्‍चों के बलात्‍कार के मामलों मौत की सजा का प्रावधान करने के लिए प्रोटेक्‍शन ऑफ चिल्‍ड्रेन फ्रॉम सेक्‍सुअल ऑफेंस एक्‍ट में संशोधन के लिए अध्‍यादेश को मजूरी दी गई है। पोक्‍सो एक्‍ट के मौजूदा प्रावधानों के तहत बलात्‍कार के मामलों में आजीवन कारावास की सजा दी जा सकती है। निर्भया केस के बाद 2012 में केंद्र सरकार ने ऐसे मामलों में मौत की सजा का प्रावधान किया था जिनमें बलात्‍कार के बाद विक्टिम की मौत हो जाती है। 

 

क्रिमिनल लॉ में संसोधन से क्‍या होगा बदलाव 

 

-महिला से बलात्‍कार के मामले में न्‍यूनतम सजा को 7 साल से बढ़ा कर 10 साल कर दिया गया है। इस सजा को उम्र कैद तक तक बढ़ाया जा सकता है। 

-16 साल से कम उम्र की लड़की से बलात्‍कारी के मामले में न्‍यूनतम सजा को 10 से बढ़ा कर 20 साल कर दिया गया है। इस मामले में भी सजा को बढ़ा कर आजीवन कारावास तक किया जा सकता है। यहां आजीवन कारावास का मतलब है कि जब तक सजा पाए व्‍यक्ति की प्राकृतिक मौत नहीं हो जाती है। 

-16 साल से कम उम्र की लड़क के गैगरेप के मामलें में दोषी को आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी। 

 

चार राज्‍यों ने बनाया है कानून 

 

हाल में चार राज्‍यों ने नाबालिग से बलात्‍कार के मामलों में मौत की सजा देने के लिए कानून पारित किया है। इससे पहले केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने 12 साल से कम उम्र के बच्‍चों पर योन हमलों के मामलों में मौत की सजा देने के लिए पो पोक्‍सो एक्‍ट में संशोधन का प्रस्‍ताव किया है। 

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