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आपके अकाउंट में जमा हो रहा है कितना पैसा, बैंक सरकारी एजेंसियों को देता है डिटेल

बैंक इनकम टैक्‍स विभाग, केंद्रीय सतर्कता आयोग और प्रवर्तन निदेशालय से आपके बैंक अकाउंट की डिटेल साझा करता है।

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नई दिल्‍ली. आपने अपने बैंक अकाउंट में जो पैसा जमा कर रखा है, बैंक आम तौर पर इसकी जानकारी किसी को नहीं देता है। लेकिन कई ऐसी सरकारी एजेंसियां है जिनके साथ बैंक आपके अकाउंट की डिटेल साझा करता है। ऐसे में अगर आपने बैंक अकाउंट में कोई ऐसा ट्रांजैक्‍शन किया है जो आपकी टैक्‍स प्रोफाइल से मैच नहीं करता है तो आप इनकम टैक्‍स विभाग सहित दूसरी सरकारी एजेंसियों के रडार पर आ सकते हैं और सरकारी एजेंसियां आपसे इस ट्रांजैक्‍शन और पैैसे के सोर्स के बारे में आपसे पूछताछ कर सकती हैं। बैंक इनकम टैक्‍स विभाग, केंद्रीय सतर्कता आयोग और प्रवर्तन निदेशालय से आपके बैंक अकाउंट की डिटेल साझा करता है। 

 
इनकम टैक्‍स विभाग 

आजकल ज्‍यादातर बैंक अकाउंट परमानेंट अकाउंट नंबर से लिंक्‍ड हैं। ऐसे में इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट पैन के जरिए आपके बैंक अकाउंट के ट्रांजैक्‍शन को ट्रैक करता है। अगर इनकम टैक्‍स विभाग को आपके बैंक अकाउंट में हुआ कोई ट्रांजैक्‍शन संदिग्‍ध लगता है तो वह बैंक से आपके अकाउंट की सारी डिटेल मांग सकता है। इसके बाद इनकम टैक्‍स विभाग इस डिटेल के आधार पर अपनी जांच को आगे बढ़ाता है। इनकम टैक्‍स विभाग को लगता है कि आपके अकाउंट में हुआ ट्रांजैक्‍शन आपकी इनकम प्रोफाइल को मैच नहीं करता है तो वह नोटिस भेजकर आपसे पूछताछ कर सकता है। 

 

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केंद्रीय सतर्कता आयोग 
फाइनेंशियल इंटेलिजेेंस यूनिट 10 लाख रुपए से अधिक के ऐसे ट्रांजैक्‍शंंस की रिपोर्ट तैयार करता है, जिन पर उसे शक होता है कि यह अपराध या भ्रष्‍टाचार से जुड़ा होता है। इसे सस्‍पेक्‍टेड ट्रांजैक्‍शन रिपोर्ट कहते हैं। अगर यह रिपोर्ट केंद्र सरकार के कर्मचारी से संबंधित है तो फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट इस रिपोर्ट को केंद्रीय सतर्कता आयोग यानी सीवीसी से साझा करता है। इसके बाद सीवीसी ट्रांजैक्‍शन की जांच करता है। 

 

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प्रवर्तन निदेशालय 

प्रवर्तन निदेशालय आम तौर पर काले धन को सफेद करने से जुड़े मामलों की जांच करता है। अगर सरकार को कहीं से जानकारी मिलती है कि किसी अकाउंट में ऐसा ट्रांजैक्‍शन हुआ है जो काले धन को सफेद करने से जुड़ा है तो प्रवर्तन निदेशालय इस मामले की जांच के लिए अकाउंट की डिटेल बैंक से मांग सकता है। हालांकि इसके लिए प्रवर्तन निदेशालय किसी ठोस कारण का हवाला देना होगा। 

 

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