Home » Economy » Policy1 रुपए की फल-सब्‍जी के लिए आप चुकाते हैं 50 रुपए, खेत से मंडी तक 50 गुना बढ़ जाती है कीमत

1 रुपए की मिर्च के लिए आप चुकाते हैं 50 रुपए, खेत से मंडी तक बढ़ जाती है फल सब्‍जी कीमत

देश के कई राज्‍यों में किसानों ने फल सब्‍जी और दूध अगले 10 दिनों तक मंडियों में न भेजने का फैसला किया है।

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नई दिल्‍ली। देश के कई राज्‍यों में किसानों ने फल सब्‍जी और दूध अगले 10 दिनों तक मंडियों में न भेजने का फैसला किया है। किसान अपनी फल सब्जियों की सही कीमत न मिलने से नाराज हैं। वे अपनी फल सब्जियां सड़क पर फेंक कर विरोध प्रदर्शित कर रहे हैं। इसका कारण यह है कि किसान को सब्‍जी और फलों की कीमत 1 से 5 रुपए प्रति किलो तक मिलती है उसी सब्‍जी और फल की कीमत मंडी तक पहुंच कर 50 रुपए प्रति किलो तक हो जाती है। यानी खेत से चल कर मंडी तक आने में सब्‍जी और फल की कीमत 50 गुना तक बढ़ जाती है। 

 

कैसे बढ़ जाती है 50 गुना तक कीमत 

 

एग्री एक्‍सपर्ट विजय सरदाना ने moneybhaskar.com को बताया कि हरियाणा के ग्रामीण इलाके में किसान को मिर्च की प्रति किलो कीमत 1 से 1.5 रुपए किलो मिल रही है वहीं दिल्‍ली की आजादपुर मंडी में पहुंच कर इस मिर्च की कीमत 50 रुपए किलो हो जाती है। इसी तरह से दूसरी सब्जियों ओर फलों की कीमतों में भी खेत से मंडी तक पहुंचने में 10 से 50 गुना तक इजाफा हो जाता है। विजय सरदाना का कहना है कि किसान और उपभोक्‍ता के लिए सबसे बड़ी समस्‍या 1 से 50 रुपए के बीच का अंतर है। किसान को अपनी उपज की सही कीमत नहीं मिलती है और उपभोक्‍ता को भी इसके लिए काफी अधिक कीमत चुकानी पड़ती है। इसका बड़ा फायदा विचौलिए उठाते हैं। 

 

2500  बड़ी मडियों तय करती हैं किसानों की किस्‍मत 

 

मौजूदा समय में देश में लगभग 2500  एग्रीकल्‍चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी यानी (एपीएमसी) मंडियां हैं। ये देश की बड़ी मंडिया हैं। केंद्र सरकार के एपीएमसी एक्‍ट में प्रावधान है कि किसानों को अपना उत्‍पाद इन्‍हीं मंडियों में बेचना है। विजय सरदाना का कहना है कि इस एक्‍ट की वजह से एपीएमसी मंडियों में बैठे कारोबार फल सब्जियों और किसानों की उपज की कीमत तय करते हैं। किसान के पास कोई और विकल्‍प न होने की वजह से उसे मजबूरी में इन मंडियों में कारोबारियों की तय कीमत पर अपना उत्‍पाद बेचना पड़ता है। 

कई सरकारी कमेटियां कर चुकी हैं एपीएमसी मंडियों का एकाधिकार खत्‍म करने की सिफारिश 

 

विजय सरदाना का कहना है कि खुद सरकार कई कमेटियां सिफारिश कर चुकी हैं कि एपीएमसी मंडी में ही अपना उत्‍पाद बेचने की अनिवार्यता खत्‍म की जाए। किसान को जहां सही कीमत मिले उसे वहां अपना उत्‍पाद बेचने की छूट मिलनी चाहिए लेकिन अब तक कोई भी सरकार इसके लिए कदम नहीं उठा रही है। जब तक मंडियों का एकाधिकार खत्‍म नहीं होगा किसानों को अपनी उपज की सही कीमत नहीं मिलेगी। 

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