अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट से भारतीय रियल्टी सेक्टर में आएगी तेजी

Affordable housing will be the driving force for Indian Realty : बीते कुछ सालों में रेरा, जीएसटी व नोटबंदी के बाद से देश के रियल्टी सेक्टर को तगड़ा झटका लगा है। लेकिन धीरे-धीरे अब इस सेक्टर में तेजी देखने को मिल रही है। बीते कुछ तिमाहियों में कई नए प्रोजेक्ट लाॅन्च हुए हैं और हाउसिंग डिमांड में तेजी देखने को मिल रही है।

Money Bhaskar

Mar 26,2019 04:41:00 PM IST

नई दिल्ली। बीते कुछ सालों में रेरा, जीएसटी व नोटबंदी के बाद से देश के रियल्टी सेक्टर को तगड़ा झटका लगा है। लेकिन धीरे-धीरे अब इस सेक्टर में तेजी देखने को मिल रही है। बीते कुछ तिमाहियों में कई नए प्रोजेक्ट लाॅन्च हुए हैं आैर हाउसिंग डिमांड में तेजी देखने को मिल रही है। इस सेक्टर से जुड़े कई जानकारों का मानना है कि हाल के दिनों में नीतियों में कुछ बदलाव के बाद इस सेक्टर की तस्वीर अब बदलने लगी है।

केंद्र सरकार भी मिड इनकम वर्ग के लिए अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट लेकर आई जिससे इस सेक्टर में और भी ग्रोथ देखने को मिलेगा। देश के कई प्रमुख शहरों में कई नामी डेवलपर्स द्वारा उपयुक्त सुविधाएं देने से भी तेजी की उम्मीद की जा रही है। केंद्र सरकार ने 'प्रधानमंत्री आवास योजना' (पीएमएवाई) के तहत भी इस सेक्टर में तेजी लाने का प्रयास कर रही है। सरकार की इस स्कीम के तहत शहरों में रहने वाले गरीब वर्ग के करीब 2 करोड़ लोगों को बेहद ही किफायती मूल्य पर घर मुहैया कराया जाएगा। साथ ही सरकार ने इस स्कीम के तहत कई तरह की छूट का भी ऐलान किया है। जिसमें CLSS व जीएसटी के तहत छूट शामिल हैं। डेवलपर्स को भी इन सुविधाओं को खरीदारों को मुहैया कराना होगा।

हाउसिंग सेग्मेंट प्राइवेट सेक्टर व रियल सेक्टर डेवलपर्स की भागीदारी होना जरूरी है

हाल ही में उप-राष्ट्रपति ने भी अपने एक संबोधन में लाेगों को दिए जाने वाले किफायती घरों के बारे में एक महत्वपूर्ण बात कही थी। उप-राष्ट्रपति ने कहा कि इस हाउसिंग सेग्मेंट प्राइवेट सेक्टर व रियल सेक्टर डेवलपर्स की भागीदारी होना बेहद ही जरूरी है। किफयाती प्राइसिंग सेग्मेंट घरों के लिए भारत के सभी शहरों में डेवलपर्स घर खरीदारों को मिलने वाले सुविधाआें को ध्यान में रख रहे हैं। लगभग सभी हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां को किफायती हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए कर्ज मुहैया कराने की सुविधा दी जा रही है। देश के कई प्रमुख बैंकों ने भी किफायती हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए प्राइवेट इक्विटी फंड बनाया है। इस सेग्मेंट की कई कंपनियों ने भी इसपर ध्यान दिया है।

5 से 7 सालों में इसमें कई बड़े बदलाव देखने को मिले है

बीते 5 से 7 सालों की बात करें तो वर्तमान में इसमें कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। पहले बेहद ही कम निवेशक किफायत हाउसिंग प्रोजेक्ट में निवेश करने के लिए तैयार होते थे। इसके अतिरिक्त, इंडिपेन्डेंट प्राॅपर्टी कंस्लटेंट्स (आईपीसी) की एक हालिया रिपोर्ट से पता चलता है कि 2018 के तीसरी तिमाही में कुल हाउसिंग यूनिट्स का अब्जाॅर्पशन बढ़ा। इसके पहले की तिमाही के मुकाबले इस आंकड़े में तेजी आई है। इसमें किफायती घरों की बिक्री की सबसे बड़ी वजह लोकेशन, कीमत और किन ब्रांडेड डेवलपर्स के अंतर्गत प्रोजेक्ट का निर्माण हुआ, रहा है। बीते कुछ तिमाहियों मार्केट में रिकवरी देखने को मिली है।

चूंकि, किफायती घरों की मांग में लगातार तेजी देखने को मिल रही है, एेसे में यह कहा जा सकता है कि आगामी एक दो दशकों में इसी से रियल्ट सेग्मेंट में तेजी आएगी। मार्केट को भी इस बात की उम्मीद है कि नीतियों में कुछ खासा बदलाव नहीं देखने को मिलेगा। साथ ही आगामी लोकसभा चुनाव को भी देखते हुए कोई राजनीतिक पार्टी रियल एस्टेट सेक्टर में ग्रोथ कम करने का जोखिम उठाएगी। साल 2020 तक उम्मीद की जा रही है कि हाउसिंग सेक्टर की भारत के कुल जीडीपी में 11 फीसदी हो जाएगा।

(इस आर्टिकल के लेखक एटीएस होमक्राफ्ट के सीईओ प्रसून चौहान है)

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