बिज़नेस न्यूज़ » Economy » Policyमोदी, मैक्रों ने किया यूपी के सबसे बड़े सोलर प्‍लांट का इनॉगरेशन, 650 करोड़ आई है लागत

मोदी, मैक्रों ने किया यूपी के सबसे बड़े सोलर प्‍लांट का इनॉगरेशन, 650 करोड़ आई है लागत

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पीएम की मौजूदगी में UP के सबसे बड़े सोलर पावर प्लांट का इनॉग्रेशन करेंगे।

1 of

 

मिर्जापुर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्‍ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मिर्जापुर में सोमवार को सोलर पावर प्‍लांट का इनागरेशन किया। यह प्‍लांट 650 करोड़ रुपए की लागत में 18 महीने में बनकर तैयार हुआ है।  यह प्लांट छानबे दादर कला गांव में बना है। फ्रांस की कंपनी एनवॉयर सोलर प्राइवेट लिमिटेड और नेडा की मदद से यह सोलर प्लांट तैयार किया गया है। इस मौके पर प्रोजेक्ट ऑपरेटर प्रकाश ने Dainikbhaskar.com से कुछ बातें शेयर कीं। 18 महीने में बनकर हुआ तैयार...

 

- प्रोजेक्ट ऑपरेटर ने बताया, 382 एकड़ में लगे इस प्लांट की कुल लागत 650 करोड़ रुपए है।

- ये पूरी तरह से ऑटो मैटिक है। इसे स्वीच ऑन या ऑफ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

- इस प्लांट में 3 लाख 18 हजार सोलर प्लेट्स लगाए गए हैं।

- वहीं, 200 से ज्यादा वर्कर और 20 से ऊपर इंजीनियर्स की मदद से 18 महीने में इसे तैयार किया गया है।

- खास बात यह है कि इस प्लांट को लगाने में उपजाऊ जमीन का इस्तेमाल नहीं किया गया है।

- इस पावर प्लांट को 'जिग्ना पावर हाउस' से कनेक्ट किया गया है। यहां प्लांट से 2 किमी दूर है

- यहां से बिजली मिर्जापुर ए और बी ब्लॉक में बांटकर दी जाएगी। बची बिजली इलाहाबाद को भी दी जाएगी।

- तुषार मलिक पोजेक्ट मैनेजर ने बताया, हमारा टारगेट 18 से 20 हजार घरों में बिजली पहुंचाने का है।

- 5 लाख यूनिट पर डे सप्लाई करेंगे। पावर हाउस की कैपेसिटी 75 मेगावाट है।

 

बुनियादी सुविधाओं को तरस रहा गांव

- गांव प्रधान विजय कुमार बिंद के मुताबिक, दादर कला गांव में चार-पांच लोग ही ग्रेजुएट हैं।

- 3 हजार आबादी वाले इस गांव में शिवशंकर पाल नाम का शख्स ही केवल सरकारी नौकरी में है। बाकी रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं।

- गांव में केवल एक ही प्राइमरी और जूनियर हाई स्कूल है।

- इसके अलावा प्राथमिक स्वास्थ केंद्र, बैंक, पोस्ट ऑफिस जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं।

- ऐसे में यहां के लोग पावर प्लांट के उद्घाटन से गांव की बेहतरी उम्मीद लगाए हुए हैं।

 

खेती के भरोसे लोग

- प्रधान के मुताबिक, गांव के अधिकांश लोग खेती-मजदूरी पर निर्भर हैं।

- वहीं, सिंचाई का साधन नहीं होने पर यहां के लोग बारिस के भरोसे खेती करते हैं।

- यहां करीब 50 एकड़ जमीन में सब्जी और फूलों की खेती की जाती है।

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट