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फूड आइटम्स सस्ते होने से घटी थोक महंगाई, 5.09% के स्तर पर WPI

फलों और सब्जियों सहित अधिकांश फूड आइटम्स सस्ते होने से जुलाई में WPI घटकर 5.09 फीसदी पर आ गई।

Wholesale inflation eases to 5.09% in July

 

नई दिल्ली. फलों और सब्जियों सहित अधिकांश फूड आइटम्स सस्ते होने से जुलाई में थोक महंगाई (WPI) घटकर 5.09 फीसदी पर आ गई, जबकि जून में यह आंकड़ा 5.77 फीसदी रही थी। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई है। एक साल पहले के समान महीने यानी जुलाई, 2017 में यह आंकड़ा 1.88 फीसदी रही थी। वहीं एक दिन पहले आए खुदरा महंगाई (CPI) के आंकड़ों ने भी राहत दी, जो 4.17 फीसदी के साथ 9 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई।

 

 

सब्जियां और फल हुए सस्ते

कॉमर्स मिनिस्ट्री द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में फूड आर्टिकल्स की थोक कीमतों में 2.16 फीसदी की कमी दर्ज की गई, जबकि जून में इनमें 1.80 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई थी।

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अन्य बास्केट की बात करें तो जुलाई में सब्जियों की कीमतों में 14.07 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि जून में इस में 8.12 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई थी। इसी प्रकार फलों की कीमतों में 8.81 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि जून में फल 3.87 फीसदी महंगे हुए थे।

 

 

दालों की कीमतों में भी गिरावट

वहीं दालों की कीमतों में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई। जुलाई में दालों की थोक कीमतों में 17.03 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि जून में दालें 20.23 फीसदी सस्ती हुई थीं।

 
 

9 महीने के निचले स्तर पर खुदरा महंगाई

इससे पहले सोमवार को आए खुदरा महंगाई के आंकड़ों के मुताबिक, सब्जियों और फलों की कीमतों में नरमी के चलते खुदरा महंगाई (CPI) 4.17 फीसदी के स्तर पर आ गई, जो 9 महीने का निचला स्तर है। हालांकि जून के लिए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (सीपीआई) का आंकड़ा संशोधित करके 4.92 फीसद कर दिया गया, जो पहले 5 फीसदी रहने का अनुमान था। इससे पहले सीपीआई का निचला स्तर अक्टूबर, 2017 में रहा था, जब महंगाई 3.58 फीसदी रही थी।

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सब्जियां हुईं सस्ती

हालांकि सालाना आधार पर तुलना करें तो बीते साल जुलाई में खुदरा महंगाई में 2.36 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई थी। सीएसओ द्वारा जारी डाटा के मुताबिक, जुलाई में सब्जियों की खुदरा महंगाई में 2.19 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि जून में यह आंकड़ा 7.18 फीसदी रहा था।

वहीं फलों की कीमतों में बढ़ोत्तरी सुस्त होकर 6.98 फीसदी पर आ गई, जबकि पिछले महीने में यह आंकड़ा 10 फीसदी रहा था। हालांकि फ्यूल और लाइट इन्फ्लेशन बढ़कर 7.96 फीसदी हो गई, जो जून में 7.14 फीसदी के स्तर पर रही थी।

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खुदरा महंगाई को ट्रैक करता है RBI

रिजर्व बैंक (आरबीआई) रिटेल महंगाई को ट्रैक करता है। इसका मतलब है कि आरबीआई की पॉलिसी दरों के लिहाज से खुदरा महंगाई दर का आंकड़ा अहम है। 1 अगस्त को बायमंथली मॉनिटरी पॉलिसी समीक्षा में रिजर्व बैंक ने 2018—19 की दूसरी छमाही के लिए खुदरा महंगाई दर का अनुमान बढ़ाकर 4.8 फीसदी कर दिया है, जो पहले 4.7 फीसदी था।

 

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