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इन 4 नंबरों ने बढ़ाई मोदी की मुसीबत, फेल कर सकते हैंं 2019 का प्लान

हाल में इकोनॉमी से जुड़े ऐसे चार आंकड़े सामने आए हैं, जो सरकार का सिरदर्द बढ़ाने के लिए काफी हैं।

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नई दिल्ली. हाल में इकोनॉमी से जुड़े ऐसे चार आंकड़े सामने आए हैं, जो सरकार का सिरदर्द बढ़ाने के लिए काफी हैं। देश के लिए ये आंकड़े इतने निगेटिव हैं, जो जल्द हालात नहीं सुधरने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2019 के चुनाव के लिए की जा रही प्लानिंग को फेल कर सकते हैं। इनसे जहां देश की इकोनॉमी की कमजोर होती स्थिति का पता चलता है, वहीं वे यह भी बताते हैं कि अगर जल्द ही इकोनॉमी को बूस्ट देने के लिए कुछ नहीं कहा गया तो आगे मुश्किलें और भी बढ़ सकती हैं। इससे पीएम मोदी सरकार के लिए सोशल वेलफेयर की अपनी स्कीम्स के लिए फंड जुटाना मुश्किल होगा और उनकी 2019 आम चुनाव की उम्मीदों को झटका लग सकता है। हम यहां इन 4 आंकड़ों के बारे में बता रहे हैं....

 

 

1. 5 महीनों में पहली बार घटा एक्सपोर्ट  

 

ग्लोबल ट्रेड की चिंताओं और अमेरिका द्वारा की जा रही सख्ती के बीच 5 महीनों में पहली बार मार्च में एक्सपोर्ट में कमी दर्ज की गई। जेम्स एंड ज्वैलरी, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट में कमी के चलते मार्च में एक्सपोर्ट 0.66 फीसदी घटकर 29.11 अरब डॉलर रह गया।

इससे पहले एक्सपोर्ट में अक्टूबर, 2017 के दौरान गिरावट दर्ज की गई थी, जब एक्सपोर्ट में 1.12 फीसदी की कमी आई थी।

कॉमर्स मिनिस्ट्री द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान एक्सपोर्ट 9.78 फीसदी बढ़कर 302.84 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। वहीं वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान एक्सपोर्ट 275.85 अरब डॉलर रहा था।

 

 

2. इंपोर्ट में भारी बढ़ोत्तरी

वहीं इंपोर्ट 7.15 फीसदी बढ़कर 42.8 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। मार्च में समाप्त वित्त वर्ष की बात करें तो इस दौरान इंपोर्ट 19.6 फीसदी बढ़कर 459.7 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया।

मार्च के दौरान ऑयल इम्पोर्ट 13.92 फीसदी बढ़कर 11.11 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। वहीं नॉन ऑयल इंपोर्ट 4.96 फीसदी बढ़कर 31.69 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया।

वित्त वर्ष 2017-18 की बात करें तो ऑयल इंपोर्ट 25.47 फीसदी बढ़कर 109.11 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया।

 

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3. ट्रेड डेफिसिट 4 साल के हाई पर

वहीं वित्त वर्ष के दौरान इंपोर्ट में बढ़ोत्तरी से ट्रेड डेफिसिट को तगड़ा झटका लगा, जो बढ़कर 156.83 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया, जबकि एक साल पहले समान अवधि में यह आंकड़ा 108.5 अरब डॉलर रहा था।

इस प्रकार ट्रेड डेफिसिट 4 साल के हाई पर पहुंच गया। इससे पहले वित्त वर्ष 2012-13 में ट्रेड डेफिसिट 190.30 अरब डॉलर रहा था।

 

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4. 40 महीने के हाई पर पहुंचा क्रूड

ग्लोबल टेंशन से इंडियन बास्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़कर 69 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गईं, जो 40 महीने का हाई लेवल है। वहीं इससे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाने का प्रेशर बढ़ा है।

वहीं अमेरिका के सीरिया पर हमले के बाद टेंशन बढ़ गई है, जिससे क्रूड की कीमतें और गहराने के आसार बन गए हैं।

 
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