Utility

24,712 Views
X
Trending News Alerts

ट्रेंडिंग न्यूज़ अलर्ट

मोदी के वादों का 4 साल में हुआ ये हाल, आप खुद तय करें कि अच्‍छे दिन आए या नहीं Petrol Price: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव के आसार कम, क्रूड में गिरावट का मिल सकता है फायदा मोदी के 4 साल में निवेशकों को मिला 41% रिटर्न, लेकिन आगे हैं बड़े चैलेंज 4 साल में कहां चूक गए मोदी, जानिए नौकरी से लेकर जीडीपी तक का हाल फाइनेंशियल ईयर 2018 के लिए PF पर मिलेगा 8.55% ब्याज, 5 साल में सबसे कम FY-18 के लिए PF पर मिलेगा 8.55% ब्याज, 5 साल में सबसे कम टेक महिंद्रा को 1222 करोड़ का हुआ मुनाफा, 14 रुपए/शेयर डिविडेंड का ऐलान खास खबर: एक साल में अब क्या कर पाएंगे पीएम मोदी, बीत गए चार साल ICICI बैंक की चंदा कोचर को सेबी का नोटिस, वीडियोकॉन लोन केस में कार्रवाई मार्च क्वार्टर में बैंक ऑफ बड़ौदा को 3102 करोड़ रुपए का घाटा, बैड लोन्स बढ़ने का असर स्पोर्ट्सवियर कंपनी प्रोलाइन के साथ RIL की पार्टनरशिप क्रूड में बड़ी गिरावट, ओपेक और रूस के पॉजिटिव संकेतों से क्रूड 77 डॉलर के नीचे Modi Govt 4 years: सरकार ने नोटबंदी को बताया सबसे बड़ी उपलब्धि, गिनाए 10 फायदे खास स्टॉक: सुदर्शन केमिकल में 16% की तेजी, बेहतर Q4 नतीजे का मिला फायदा Forex Market: रुपए में भारी रिकवरी, 61 पैसे मजबूत होकर 67.74/$ पर पहुंचा
बिज़नेस न्यूज़ » Economy » Policyटेलिकॉम सेक्‍टर का रेवेन्‍यू 8.56% घटकर रह गया 2.55 लाखCr, सरकार को भी नुकसान

टेलिकॉम सेक्‍टर का रेवेन्‍यू 8.56% घटकर रह गया 2.55 लाखCr, सरकार को भी नुकसान


नई दिल्‍ली. वर्ष 2017 में टेलिकॉम सेक्‍टर का ग्रॉस रेवेन्‍यू 8.56 फीसदी घटकर 2.55 लाख करोड़ रुपए रह गया है। इसके चलते इस सेक्‍टर से सरकार को मिलने वाला टैक्‍स भी घट गया है। ट्राई की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार इससे सरकार को लाइसेंस फीस, स्‍पेक्‍ट्रम चार्ज के रूप में कम पैसे मिले हैं। 2016 में टेलिकॉम कंपनियों का ग्रॉस रेवेन्‍यू 2.79 लाख करोड़ रुपए रहा था। 

 

 

सरकार को लगा झटका

टेलिकॉम सेक्‍टर की घटी कमाई से सरकार को लाइसेंस फीस के रूप में 2017 में 18.78 फीसदी और स्‍पेक्‍ट्रम चार्ज में 32.81 फीसदी कम पैसा मिला है। 


 

सब्‍सक्राइबर बेस बढ़ा

एक तरफ जहां रेवेन्‍यू घटा वहीं इसी समय के दौरान सब्‍सक्राइबर बेस बढ़ा है। दिसबंर 2016 तक देश में जहां 115 करोड़ सब्‍सक्राइबर थे, वहीं यह दिसबंर 2017 में बढ़कर 119 करोड़ हो गए। इस प्रकार सब्‍सक्राइबर बेस में करीब 3.38 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई है। 


 

एडजेस्‍टेड ग्रॉस रेवेन्‍यू भी घटा

टेलिकॉम कंपनियों का एडजस्‍टेड ग्रॉस रेवेन्‍यू भी घटा है। यह 2017 में 18.87 फीसदी घटकर 1.60 लाख करोड़ रुपए गया, जो एक साल पहले 1.98 लाख करोड़ रुपए था। 

 

 

सरकार को मिली कम फीस

सरकार को एडजस्‍टेड ग्रॉस रेवेन्‍यू (AGR) पर ही लाइसेंस फीस (LF) और स्‍पैक्‍ट्रम यूजेज चार्ज (SUC) मिलता है। FY17 में लाइसेंस फीस के रूप में सरकार को 12,976 करोड़ रुपए मिला जो एक साल पहले की तुलना में 3 हजार करोड़ रुपए कम रहा। एक साल पहले इस रूप में सरकार को 15,975 करोड़ रुपए मिला था। वहीं SUC के रूप में सरकार को पिछले साल 5,089 करोड़ रुपए मिला, जिसमें 2,485 करोड़ रुपए की गिरावट दर्ज की गई। एक साल पहले सरकार को इस मद में 7,574 करोड़ रुपए मिला था। 

 

 

रिलासंय Jio की AGR बढ़ी

ट्राई की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार सिर्फ रिलासंय Jio की AGR बढ़ी है। बाकी टेलीकॉम कंपनियों की रेवेन्‍यू घटा है। इस दौरान भारती एयरटेल का AGR 24.46 फीसदी गिरकर 36,922 करोड़ रुपए रह गया। यह एक साल पहले 48,880 करोड़ रुपए था। वहीं वोडाफोन का AGR 24.14 फीसदी गिरकर 26,308 करोड़ पर आ गया। इसके अलावा आइडिया का AGR 23.17 फीसदी घटकर 22,616 करोड़ रुपए, BSNL का AGR 19.42 फीसदी घटकर 10,564 करोड़ रुपए और MTNL का 30.76 फीसदी घटकर 1,985 करोड़ रुपए रहा गया। सिर्फ Jio का AGR 2,563.9 फीसदी बढ़कर 7,466 करोड़ रुपए हो गया। एक साल पहले कंपनी यह आंकड़ा निगेटिव 303 करोड़ रुपए था। 

 

 

घट गईं मोबाइल कंपनियां

ट्राई के डाटा के अनुसार वर्ष 2016 में जहां 13 मोबाइल कंपनियां देश में थीं, वहीं वर्ष 2017 में यह घट कर 12 रह गईं। इस दौरान वीडियोकॉन ने अपनी सेवाएं बंद की थीं। बाद में रिलायंस कम्‍युनिकेशंस, सिस्‍टेमा श्‍याम और क्‍वाडरेंट ने भी अपनी सेवाएं बंद कर दी थीं। 

 

 

और देखने के लिए नीचे की स्लाइड क्लिक करें

Trending

NEXT STORY

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.