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सर्विस PMI 50 के ऊपर निकला, 7 साल में सबसे ज्‍यादा मिलीं मार्च में नौकरियां

मार्च 2018 में सर्विस सेक्‍टर की गतिविधियाें ने फिर से जोर पकड़ लिया है। इसका मुख्‍य कंपनियों का भर्ती बढ़ाना है।

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नई दिल्‍ली. मार्च 2018 में सर्विस सेक्‍टर की गतिविधियाें ने फिर से जोर पकड़ लिया है। इसका मुख्‍य कंपनियों का भर्ती बढ़ाना है। नौकरियां मिलने की स्थिति पिछले सात साल में सबसे दर्ज की गई है। मार्च में निक्केई इंडिया सर्विसेज बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स फरवरी में 47.8 के मुकाबले बढ़कर 50.3 पर आ गया। इसका मतलब है कि देश में कारोबारी गतिविधियां तेजी से बढ़ीं हैं।

 

 

50 के ऊपर अच्‍छा होता है इंडेक्‍स

निक्केई इंडिया सर्विसेज बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स फरवरी में 50 के नीचे चला गया था। इंडेक्‍स जारी करने वाली कंपनी आईएसएस मार्किट के अर्थशास्‍त्री आशना ढ़ोंढिया का कहना है कि देश की सर्विस सेक्‍टर की गतिविधियों में मार्च तिमाही में स्‍टेबिल्‍टी आती दिखी है। कंपनियों में नए सिरे से काम की शुरुआत हुई है। इससे पता चलता है कि डिमांड बढ़ी है।  वहीं सीजनली एडजेस्‍टेड निक्केई इंडिया कंपाजिट PMI फरवरी में 49.7 की तुलना में मार्च में 50.8 पर आ गया है। इसका मुख्‍य कारण मैन्‍युफैक्‍चरिंग और सर्विस सेक्‍टर में बढ़त दर्ज होना है।

 

फरवरी में गिरावट अस्‍थाई थी

उन्‍होंने आंकड़े जारी करते हुए कहा कि कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि फरवरी में इं‍डेक्‍स में गिरावट अस्‍थाई थी और मार्च में अर्थव्‍यवस्‍था फिर से पटरी पर लौट आई है। मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर में फिर से ग्रोथ के चलते सर्विस सेक्‍टर का प्रदर्शन अच्‍छा रहा है। ऐसा पिछले जनवरी से देखा जा रहा है।

 
 

जून 2011 के बाद सबसे ज्‍यादा तेजी से हुईं भर्तियां

डिमांड में तेजी आने से कंपनियों के वर्तमान संसाधनों पर दबाव पड़ा है, जिसके चलते उन्‍हें अपने कर्मच‍ारियों की संख्‍या में तेज बढ़त करनी पड़ी। जून 2011 के बाद मार्च में सबसे ज्‍यादा नौकरियों के मिलने का डाटा आया है। सरकार की तरफ से अर्थव्‍यवस्‍थ्‍ाा को फार्मल बनाने के लिए किए गए प्रयासों के बाद कंपनियों की तरफ से भर्तियों में अब तेजी अब पीएमआई डाटा में भी दर्ज हो रही है।

 

 

प्राइज के फ्रंट पर दबाव झेल रहीं कंपनियां

सर्वे में एक नोट में कहा गया है कि हालांकि सर्विस सेक्‍टर की कंपनियां मार्च में कास्‍ट बढ़ने का दबाव झेल रही हैं। वहीं दूसरी तरफ रिजर्व बैंक पर ब्‍याज दरें घटाने का दबाव बढ़ा है। ब्‍याज दरें घटाने के लिए एक तर्क महंगाई की दर में कमी आने का भी दिया जा रहा है।


 
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