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पहले इश्यू में 222 करोड़ रु के बिके इलेक्टोरल बॉन्ड, सरकार ने संसद में दी डिटेल

भारत में अभी तक 222 करोड़ रुपए के इलेक्ट्रोरल बॉन्ड्स की बिक्री हो चुकी है। सरकार ने शुक्रवार को संसद में यह जानकारी दी।

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नई दिल्ली. भारत में अभी तक 222 करोड़ रुपए के इलेक्ट्रोरल बॉन्ड्स की बिक्री हो चुकी है। सरकार ने शुक्रवार को संसद में यह जानकारी दी। इलेक्टोरल बॉन्ड्स की शुरुआत नाम का खुलासा किए बिना पॉलिटिकल पार्टीज को चंदा देने के लिए की गई है। इसका उद्देश्य चुनावों में ब्लैकमनी के इस्तेमाल पर रोक लगाना भी है। इन बॉन्ड्स का पहला इश्यू सब्सक्रिप्शन के वास्ते 10 दिन के लिए 1 मार्च को खुला था।

 
 
पहले इश्यू से मिले 222 करोड़ रु
वित्त राज्य मंत्री पी राधाकृष्णन ने लोकसभा में दिए एक लिखित जवाब में कहा, ‘स्कीम के पहले इश्यू के तहत इलेक्टोरल बॉन्ड्स की बिक्री 9 मार्च, 2018 तक 222 करोड़ रुपए हासिल हुए।’
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पॉलिटिकल पार्टीज को होने वाली फंडिंग को साफ-सुथरी बनाने के उद्देश्य से आम बजट 2017-18 में ‘इलेक्टोरल बॉन्ड’ स्कीम पेश की थी। डेट इंस्ट्रुमेंट्स की तुलना में इन बॉन्ड के माध्यम से डोनर पॉलिटिकल पार्टीज को चंदा दे सकते हैं, जिसमें बैंक सिर्फ इंटरमीडियरी के तौर पर काम करेंगे।  इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए रजिस्टर्ड पॉलिटिकल पार्टीज के ऑथराइज्ड अकाउंट में डोनेशन दे सकते हैं। ये बॉन्ड स्टेट बैंक ऑफ इंडिया कुछ ब्रांचेस में बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।
उन्होंने कहा, ‘स्कीम के अंतर्गत इलेक्टोरल बॉन्ड्स को इश्यू करने और इनकैश करने के लिए एसबीआई एक मात्र अधिकृत बैंक है।’ 
 
जनवरी में नोटिफाई हुए थे बॉन्ड
एक अन्य सवाल पर उन्होंने कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को इस साल जनवरी में नोटिफाई किया गया था। इसका पहला इश्यू जनवरी में ही खुला था। बॉन्ड्स खरीदे जाने के लिए 1-10 मार्च के बीच खुले थे। उन्होंने कहा कि इस इंटरेस्ट फ्री बैंकिंग इंस्ट्रुमेंट को भारत का कोई भी नागरिक या एक इनकॉर्पोरेटेड बॉडी खरीद सकती है।
 
15 दिनों के लिए वैलिड होगा बॉन्ड
वित्त मंत्रालय के मुताबिक इलेक्टोरल बॉन्ड जारी होने के 15 दिनों तक वैलिड होगा और वैलिडिटी पीरियड के एक्सपायर होने के बाद बॉन्ड जमा करने पर राजनीतिक दल को कोई भुगतान नहीं किया जाएगा। किसी भी पात्र राजनीतिक दल द्वारा जमा किए गए बॉन्ड की रकम को उसी दिन अकाउंट में जमा कर दिया जाएगा।
 
आम चुनाव वाले साल में 30 दिन मिलेंगे बॉन्ड
मंत्री ने कहा था कि स्कीम के अंतर्गत बॉन्ड खरीद के लिए जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर में हर महीने 10 दिन के लिए बिक्री के वास्ते उपलब्ध होंगे। सरकार आम चुनाव वाले वर्ष के लिए 30 अतिरिक्त दिनों के बारे में बाद में सूचित करेगी।
उन्होंने कहा, ‘इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम से जहां डोनर की पहचान गुप्त रहेगी, वहीं पॉलिटिकल फंडिंग सिस्टम में एक ट्रांसपरेंसी स्थापित होगी।’ बॉन्ड्स को एक केवाईसी कंप्लायंट अकाउंट के माध्यम से पेमेंट करने के बाद ही खरीदा जा सकता है।
 
ऐसे राजनीतिक दल ही होंगे पात्र
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के सेक्शन 29ए के अंतर्गत रजिस्टर्ड वही राजनीतिक दल इलेक्टोरल बॉन्ड लेने के पात्र हैं, जिन्हें पिछले लोकसभा चुनाव या राज्य विधानसभा चुनाव में मिले वोटों की संख्या 1 फीसदी से कम न हो।
 
बॉन्ड को कैसे भुना सकेंगे दल?
वित्त मंत्रालय के मुताबिक राजनीति दल किसी अधिकृत बैंक में एक बैंक अकाउंट के माध्यम से ही इन बॉन्ड्स को भुना सकेंगे।
 
कितने बॉन्‍ड खरीदे जा सकेंगे?
इससे पहले जनवरी में की गई घोषणा के मुताबिक इलेक्‍टोरल बॉन्‍ड 1000, 10000, 1 लाख, 10 लाख और 1 करोड़ रुपए के गुणांक में होंगे।
 
क्या आधार जरूरी होगा?
जेटली ने आधार के सवाल को लेकर लोकसभा में जवाब दिया था। उन्होंने कहा था, "इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम के तहत चंदा देने वालों के लिए आधार को जरूरी करने की कोई योजना नहीं है।"
 
कैश में कितना चंदा ले सकती हैं पार्टियां?
जेटली ने पिछले साल के बजट में राजनीतिक दलों के लिए होने वाली फंडिंग के नियमों में बदलाव करने का एलान किया था। सरकार का कहना था कि वह इसके लिए RBI एक्‍ट में बदलाव करेगी। इसके तहत पॉलिटिकल पार्टीज किसी एक शख्स से सिर्फ 2000 रुपए कैश डोनेशन ले सकेंगी। इससे ज्‍यादा पेमेंट के लिए इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए होगा।
 
चेक या ड्राफ्ट से चंदे पर रोक लगेगी?
सरकार ने साफ किया था कि चेक या ड्रॉफ्ट के जरिए राजनीतिक दलों को दिए जाने वाले चंदे पर कोई रोक नहीं लगाई जाएगी।
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