RBI से 3.6 करोड़ लेकर रहेगी सरकार, भले हो जाए गवर्नर का इस्तीफा

मोदी सरकार भारतीय रिजर्व बैंक से 3.6 लाख करोड़ रुपए की मांग पर अड़ गई है। मोदी सरकार का कहना है कि वह इस मांग को लेकर रिजर्व बैंक पर दबाव बनाए रखेगी। अगर इससे रिजर्व बैंक के गवर्नर ऊर्जित पटेल का इस्तीफा होता है तो हो जाए। मोदी सरकार रिजर्व बैंक के इस पैसे से पीएसयू बेंकों में पूंजी डालना चाहती है। सरकार का मानना है कि इससे बैंक लोगों को आसानी से कर्ज दे पाएंगे।

moneybhaskar

Nov 06,2018 04:59:00 PM IST

नई दिल्ली। मोदी सरकार भारतीय रिजर्व बैंक से 3.6 लाख करोड़ रुपए की मांग पर अड़ गई है। मोदी सरकार का कहना है कि वह इस मांग को लेकर रिजर्व बैंक पर दबाव बनाए रखेगी। अगर इससे रिजर्व बैंक के गवर्नर ऊर्जित पटेल का इस्तीफा होता है तो हो जाए। मोदी सरकार रिजर्व बैंक के इस पैसे से पीएसयू बेंकों में पूंजी डालना चाहती है। सरकार का मानना है कि इससे बैंक लोगों को आसानी से कर्ज दे पाएंगे।

सरकार बोर्ड पर बढ़ाएगी दबाव

रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा लगता था कि पिछले सप्ताह मोदी सरकार और रिजर्व बैंक के बीच चल रही तनातनी में कुछ नरमी आई है। उस समय सरकार की ओर से कहा गया था कि वह आरबीआई की स्वायत्ता का सम्मान करती है। वहीं सूत्रों का कहना है कि सरकार 19 नवंबर को होने वाली बैठक में रिजर्व बैंक के सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स पर दबाव बढ़ाएगी। इस बैठक में रिजर्व बैंक के गवर्नर ऊर्जित पटेल बोर्ड के उन डायरेक्टर्स के निशाने पर होंगे जो सरकार की राय का समर्थन करते हैं।

रिजर्व बैंक को माननी होगी सरकार की बात

रॉयटर्स ने सरकारी सूत्रों के हवाले से लिखा है कि हम चाहते हैं कि आरबीआई गवर्नर अर्थव्यवस्था की प्राथमिकताओं को स्वीकार करें और इस पर बोर्ड के सदस्यों से बातचीत करें। अगर वे एकपक्षीय तरीके से फैसला लेना चाहते हैं तो उनके लिए बेहतर होगा कि वे इस्तीफा दे दें।


आरबीआई का निर्णय एकतरफा


इससे पहले रिजर्व बैंक ने 3.6 लाख करोड़ रुपए के सरप्लस फंड को सरकार को ट्रांसफर करने का प्रस्ताव ठुकरा दिया था।केंद्र सरकार ने सुझाव दिया था कि सरप्लस को सरकार और आरबीआई दोनों मिलकर मैनेंज करें, क्योंकि वित्त मंत्रालय की नजर में आरबीआई का फंड ट्रांसफर से जुड़ा सिस्टम काफी पुराना है। वहीं आरबीआई का मानना है कि सरकार की आरबीआई से इस तरह से इकोनॉमी पर बुरा असर पड़ेगा। साथ ही अर्जेंटीना जैसी आर्थिक हालात में सरप्लस की रकम मददगार साबित होगी। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने 26 अक्टूबर की अपनी स्पीच में इस मुद्दे का जिक्र किया था।

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