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इंपोर्ट में बढ़ोत्तरी से CAD को लगा झटका, घटकर आधा हुआ FDI इनफ्लोः RBI डाटा

करंट अकाउंट डेफिसिट (सीएडी) के मोर्चे पर मोदी सरकार को तगड़ा झटका लगा है और एफडीआई इनफ्लो भी घटकर लगभग आधा रह गया है।

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नई दिल्ली. करंट अकाउंट डेफिसिट (सीएडी) के मोर्चे पर मोदी सरकार को तगड़ा झटका लगा है और एफडीआई इनफ्लो भी घटकर लगभग आधा रह गया है। रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के दौरान सीएडी बढ़कर 13.5 अरब डॉलर हो गया जो जीडीपी का 2 फीसदी है, जबकि एक साल पहले समान क्वार्टर के दौरान यह आंकड़ा महज 8 अरब डॉलर यानी जीडीपी का 1.4 फीसदी रहा था।

 

ज्यादा इंपोर्ट से बढ़ा करंट अकाउंट डेफिसिट
सीएडी अर्जित फॉरेन एक्सचेंज और खर्च के बीच का अंतर होता है। केंद्रीय बैंक द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक सितंबर क्वार्टर में सीएडी 7.2 अरब डॉलर यानी जीडीपी का 1.1 फीसदी रहा था।  आरबीआई ने एक बयान में कहा, ‘सालाना आधार पर सीएडी में बढ़ोत्तरी की वजह ट्रेड डेफिसिट रहा, जो एक्सपोर्ट की तुलना में ज्यादा मर्चेंडाइज इंपोर्ट की वजह से दिसंबर क्वार्टर में 44.1 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया।’

 

अप्रैल-दिसंबर में दोगुना बढ़ा सीएडी
अप्रैल-दिसंबर, 2017 के बीच की अवधि की बात करें तो सीएडी दोगुने से ज्यादा बढ़कर जीडीपी का 1.9 फीसदी हो गया, जबकि एक साल पहले समान अवधि में 0.7 फीसदी रहा था। इसकी वजह ट्रेड डेफिसिट में बढ़ोत्तरी रही, जो इस अवधि के दौरान 82.7 अरब डॉल से बढ़कर 118.9 अरब डॉलर हो गया।


सर्विसेस रिसीट्स में 17.8 फीसदी की बढ़ोत्तरी
वहीं सॉफ्टवेयर सर्विसेस और ट्रैवल सर्विसेस से हुई अर्निंग्स के सहारे नेट सर्विसेस में रिसीट्स 17.8 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। 
प्राइवेट ट्रांसफर रिसीट्स भी एक साल पहले की तुलना में 16 फीसदी बढ़कर 17.6 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया, जिसमें मुख्य रूप से रेमिटैंस आता है।


फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट आधे से भी कम
इसके अलावा नेट फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट भी लगभग 55 फीसदी घटकर 4.3 अरब डॉलर रह गया, जबकि एक साल पहले समान क्वार्टर के दौरान यह 9.7 अरब डॉलर रहा था।
हालांकि दिसंबर, 2017 में समाप्त क्वार्टर के दौरान नेट पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट का इनफ्लो 5.3 अरब डॉलर रहा, जबकि एक साल पहले समान अवधि के दौरान यह 11.3 अरब डॉलर रहा था। इसकी मुख्य वजह डेट और इक्विटी मार्केट में खरीददारी में कमी रही।
वहीं अप्रैल-दिसंबर, 2017 के दौरान नेट एफडीआई इनफ्लो 23.7 अरब डॉलर रह गया, जबकि एक साल पहले समान क्वार्टर के दौरान यह 30.6 अरब डॉलर रहा था।

 
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