RBI का बड़े कॉरपोरेट पर हमला, कहा-डिफॉल्ट से सीधे आम जनता को होता है नुकसान

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)और मोदी सरकार के बीच जारी टकराव के बीच रिजर्व बैंक ने मोदी सरकार और कॉरपोरेट घरानों पर एक बार फिर निशाना साधा है। रिवर्ज बैंक के डिप्टी गवर्नर एनएस विश्वनाथन ने हाल में कहा है कि बैंक जो पैसा कर्ज के तौर पद देते हैं यह पैसा डिपॉजिटर्स का है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति बैंक को वह पैसा समय पर नहीं चुकाता है या डिफॉल्ट करता है तो इससे आम जनता के हितों को नुकसान होता है।

moneybhaskar

Nov 05,2018 01:31:00 PM IST

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)और मोदी सरकार के बीच जारी टकराव के बीच रिजर्व बैंक ने मोदी सरकार और कॉरपोरेट घरानों पर एक बार फिर निशाना साधा है। रिवर्ज बैंक के डिप्टी गवर्नर एनएस विश्वनाथन ने हाल में कहा है कि बैंक जो पैसा कर्ज के तौर पद देते हैं यह पैसा डिपॉजिटर्स का है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति बैंक को वह पैसा समय पर नहीं चुकाता है या डिफॉल्ट करता है तो इससे आम जनता के हितों को नुकसान होता है।

कॉरपोरेट बनाते हैं बहाना

डिप्टी गवर्नर एनस विश्वनाथन का कहना है कि अगर बैंक से कर्ज लेने वाले कारोबारी या कॉरपोरेट समय पर कर्ज नहीं चुकाते हैं या डिफॉल्ट करते हैं तो बैंक कर्ज की वसूली के लिए कानूनी कदम उठाता है। इस तरह से बैंक डिफॉल्ट करने वाले कारोबारी या कॉरपोरेट से डिपॉजिटर्स का पैसा वसूल करने का प्रयास कर रहा होता है। डिफॉल्ट का कारण चाहे कुछ भी हो। हालांकि कर्ज पर डिफॉल्ट करने वाला पक्ष बैंक के कदम को ऐस पेश करता है कि बैंक उसके साथ ज्यादती कर रहा है और उसकी असेट्स पर कब्जा कर रहा है। विश्नाथन का कहना है कि यहां तक कि बड़े कॉरपोरेट भी इस तरह का बहाना बनाते हैं।

टैक्सपेयर्स के पैसे से लोन देते हैं सरकारी बैंक

डिप्टी गवर्नर का कहना है कि हमें इस अंतर को साफ तौर पर समझना चाहिए कि प्राइवेट सेक्टर के बैंक अपना पैसा कर्ज के तौर पर मुनाफ कमाने के लिए देते हैं। वहीं पीएसयू बैंक बड़े पैमाने पर डिपॉजिटर्स या टैक्सपेयर्स का पैसा कर्ज के तौर देते हैं। ऐसे में अगर कोई कॉरपोरेट कर्ज पर डिफॉल्ट करता है तो वह डिपॉजिटर्स या टैक्सपेयर्स के हितों को नुकसान पहुंचाता है।

बड़े इंडस्ट्री समूह के डिफॉल्ट पर सख्त एक्शन चाहता है रिजर्व बैंक

सीनियर इकोनॉमिक जर्नलिस्ट एमके वेणु के मुताबिक देश के शीर्ष 6-7 इंडस्ट्री ग्रुप पर 6 लाख करोड़ रुपए का लोन बकाया है। इसमें से लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक का लोन डिफॉल्ट हो चुका है। रिजर्व बैंक ने इस डिफॉल्ट पर सख्त एक्शन चाहता है। रिजर्व बैंक ने इन इंडस्ट्री ग्रुप को साफ कर दिया है कि या तो लोन चुकाएं या आपका मामला एनसीएलटी में जाएगा। वहीं सरकार 2019 चुनाव से पहले बड़े औद्योगिक घरानों के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाना चाहती है। वेणु का कहना है कि सरकार एक तरफ आईबीसी कोड को अपनी उपलिब्ध बता रही है कि इसके जरिए बड़े कारोबारियों से कर्ज की वसूली होगी। वहीं सरकार बड़े औद्योगिक घरानों के मामले को एनसीएलटी में नहीं ले जाना चाहती है। वहीं रिजर्व बैंक इस मसले पर समझौता नहीं करना चाहता है।

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