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RBI ने फिर कहा देश में स्‍टोर करना होगा डाटा, विदेशी कंपनियों की राहत देने की मांग ठुकराई

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ग्राहकों की जानकारी और उसकी निगरानी देश में ही करने के नियमों में ढील देने से मना कर दिया है

rejecting the demand for easing rules for foreign companies RBI ने फिर कहा देश में स्‍टोर करना होगा डाटा, विदेशी कंपनियों की ढील देने की मांग ठुकराई

 

नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ग्राहकों की जानकारी और उसकी निगरानी देश में ही करने के नियमों में ढील देने से मना कर दिया है। रॉयटर्स के मुताबिक RBI ने अमेरिकी कंपनियों की उस अपील को ठुकरा दिया, जिसमें उन्‍होंने इसके चलते करोड़ों रुपए का नुकसान की आशंका जताते हुए निर्देशों को सरल बनाने की अपील की थी।

 

 

कुछ और है डर का कारण

विदेशी पेमेंट कंपनियों को चिंता है कि भारत का ये कदम दूसरे देशों के लिए उदाहरण बन सकता है। ऐसे समय जब ये जांच की जा रही है कि कंपनियां अपने उपभोक्ताओं का डाटा कैसे संभालती है, बाकी देशों की सरकारें भी कंपनियों पर भारत की तरह ही देश में डाटा इकट्ठा करने का दबाव बना सकती हैं।

 

 

कालेधन पर आसानी से निगरानी रख सकेगी सरकार

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी बेहद आक्रामक ढंग से डिजिटल और कैशलेस पेमेंट का प्रचार रहे हैं। डिजिटल पेमेंट का एक फायदा ये है कि इसमें लेनदेन करने वाले उपभोक्ताओं की जानकारी सिस्टम में स्टोर हो जाती है और इसका रिकॉर्ड होने की वजह से काले धन से निपटने में आसानी होती है।

 

 

सरकार लाने जा रही है डाटा सुरक्षा कानून

मोदी सरकार इसके लिए एक अलग से डाटा सुरक्षा कानून लाने वाली है। हालांकि, रिजर्व बैंक अप्रैल में ही कंपनियों को निर्देश जारी कर कह चुका है कि उन्हें अगले 6 महीनों में उपभोक्ताओं के पेमेंट की जानकारी देश में ही रखनी होगी, ताकि इसका स्‍वतंत्रा पूर्वक कभी भी निरीक्षण किया जा सके। आरबीआई के मुताबिक, डाटा को देश में ही एकत्र करने से निगरानी मजबूत और बेहतर होगा।

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