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देशभर में 20% महंगी होगी बिजली, पावर प्लान्ट्स की अपग्रेडिंग का पड़ेगा कंज्यूमर्स पर बोझ

देशभर में बिजली 62 से 93 पैसे प्रति किलोवाट यानी 20% महंगी हो सकती है।

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नई दिल्ली.    देशभर में बिजली 62 से 93 पैसे प्रति किलोवाट यानी 20% महंगी हो सकती है। पावर मिनिस्टर आरके सिंह ने मंगलवार को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि कोयला बेस्ड पावर प्लान्ट्स की अपग्रेडिंग के दौरान पहले साल से ही बिजली की दरें बढ़ाई जा सकती हैं। बता दें कि देश में करीब तीन-चौथाई बिजली इन्हीं प्लान्ट्स से बनती है। फिलहाल, बिजली की एवरेज दर 5 रुपए प्रति किलोवाट के आसपास है।

 

दिल्ली समेत बड़े शहरों में स्मॉग बढ़ने से सरकार पर दबाव 

- पिछले कुछ साल से राजधानी दिल्ली समेत बड़े शहरों में स्मॉग की समस्या पैदा हो गई है। स्मॉग बढ़ने से लोगों के हेल्थ के लिए पैदा हुई चुनौती से निबटने के लिए सरकार और बिजली पैदा करने वाली कंपनियों पर कोयला बेस्ड पावर प्लान्ट्स को अपग्रेड करने का दबाव है, ताकि इनसे पॉल्यूशन कम हो।

- एक अनुमान के तौर पर इसमें खर्च होने वाले फंड की भरपाई करने के लिए सरकार बिजली की दरों में एवरेज 20% तक की बढ़ोत्तरी कर सकती है।

 

80% हानिकारक कणों के लिए थर्मल प्लान्ट जिम्मेदार

- पावर मिनिस्टर ने लिखित जवाब में कहा कि सेंट्रल इलेक्ट्रिकल अथॉरिटी (CEA) ने ऐसी योजना बनाई है। अलग-अलग फेस में नए एन्वायरन्मेंटल नॉर्म्स लागू करने से पावर प्लान्ट्स की प्रोडक्टिविटी नहीं गिरेगी।

- फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले पार्टिकल्स, सल्फर और नाइट्रस ऑक्साइड्स के इमिशन में बाकी इंडस्ट्रीज के मुकाबले थर्मल पावर कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 80% है।

 

तीन-चौथाई बिजली कोयला बेस्ड प्लान्ट्स से बन रही 

- देश में करीब तीन-चौथाई बिजली कोयला बेस्ड पावर प्लान्ट्स से बनती है। बिजली की औसत दर करीब 5 रुपए प्रति किलोवाट है। देश में बिजली की दरों का मुद्दा राजनीतिक तौर पर बेहद संवेदनशील रहा है।

- रॉयटर्स की नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी सरकार बिजली कंपनियों के इमिशन (उत्सर्जन) में कमी लाने वाले इक्विपमेंट लगाने की लागत का बोझ कंज्यूमर्स पर डालने पर विचार कर रही है।

 

2022 तक इमिशन कम करने का टारगेट

- वहीं, सेंट्रल इलेक्ट्रिकल अथॉरिटी (CEA) के चेयरमैन रविंद्र कुमार वर्मा ने पिछले महीने एक रिपोर्ट में कहा था कि अब उनका टारगेट 2022 तक देश के सभी कोयला बेस्ड पावर प्लान्ट्स में इमिशन कटिंग नॉर्म्स लागू करना है। इसके लिए केंद्र सरकार बिजली कंपनियों को लोन देने पर विचार कर रही है।

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