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Home » इकोनॉमी » पॉलिसीEquity exposure in active choice can be tapered to 50 per cent by the age of 60

PFRDA ने प्राइवेट सेक्‍टर के सब्‍सक्राइबर्स के लिए इक्विटी में निवेश की सीमा 75 फीसदी की

PFRDA ने निजी क्षेत्र के सब्‍सक्राइबर्स के लिए इक्विटी में निवेश की सीमा को सीमा को बढ़ा कर 75 फीसदी कर दिया है।

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नई दिल्‍ली. पेंशन फंड रेग्‍युलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने निजी क्षेत्र के सब्‍सक्राइबर्स के लिए इक्विटी में निवेश की सीमा को सीमा को बढ़ा कर 75 फीसदी कर दिया है। यह छूट उन्‍हीं सब्‍सक्राइबर्स को मिलेगी जिन्‍होंने एक्टिव च्‍वॉइस मोड का विकल्‍प लिया होगा। पहले इक्विटी में सीमा 50 फीसदी थी। हालांकि 60 साल की उम्र पर यह सीमा 50 फीसदी हो जाएगी।

 

 

सब्‍सक्राइबर के लिए दो तरह की च्‍वॉइस

नेशनल पेंशन सिस्‍टम में प्राइवेट सेक्‍टर के सब्‍सक्राइबर्स को निवेश में दो तरह की च्‍वॉइस मिलती हैं। एक है एक्टिव च्‍वॉइस और दूसरी है ऑटो च्‍वॉइस। अभी तक एक्टिव च्‍वॉइस लेने वाले सब्‍सक्राइबर्स का इक्विटी में अधिकतम निवेश 50 फीसदी तक हो सकता था। वहीं ऑटो च्‍वॉइस मोड वाले सब्‍सक्राइबर्स को तीन विकल्‍प मिलते थे। इसमें था एग्रेसिव लाइफ सॉयकिल फंड, मोडरेट लाइफ साइकिल फंड और कंजरवेटिव लाइफ साइकिल फंड। सब्‍सक्रसइबर्स इन्‍हें अपनी रिस्‍क लेने की क्षमता के अनुसार ले सकते हैं।

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2015 में बनी थी कमेटी

पेंशन सेक्‍टर रेग्‍युलेटर ने 2015 में एक कमेटी बनाई थी, जिसके अध्‍यक्ष जीएन बाजपेई थे। इन्‍होंने सिफारिश की थी कि इक्विटी में निवेश की सीमा को बढ़ा कर 75 फीसदी किया जाए। हालांकि सरकारी कर्मचारियों के लिए इक्विटी में निवेश की सीमा अभी भी 15 फीसदी ही है। PFRDA 31 मार्च 2018 तक 2.31 लाख करोड़ रुपए की आसेट मैनेज कर रहा था।

 

 

पैसा भी निकाल सकते हैं सब्‍सक्राइबर

हाल ही नेशनल पेंशन सिस्‍टम में निवेश करने वालों को अपने निवेश का कुछ हिस्‍सा निकालने की छूट दी गई है। अगर ऐसे सब्‍सक्राइबर चाहें तो अपने योग्‍यता बढ़ाने के लिए भी फंड से पैसा निकाल सकते हैं।

 

 

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