RBI को कब्जे में लेने का प्रयास कर रही मोदी सरकारः चिदंबरम

वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम (Chidambaram) ने गुरुवार को आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार अपने आर्थिक संकट से पार पानेके लिए रिजर्व बैंक (RBI) को अपने कब्जे में लेने की कोशिश कर रही है। उन्होंने सरकार को आगाह किया कि ऐसे किसी भी कदम के परिणाम भयावह होंगे।

moneybhaskar

Nov 08,2018 06:34:00 PM IST

कोलकाता. वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम (Chidambaram) ने गुरुवार को आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार अपने आर्थिक संकट से पार पानेके लिए रिजर्व बैंक (RBI) को अपने कब्जे में लेने की कोशिश कर रही है। उन्होंने सरकार को आगाह किया कि ऐसे किसी भी कदम के परिणाम भयावह होंगे।

पूर्व वित्त मंत्री ने एक प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान कहा, ‘सरकार फिस्कल डेफिसिट के संकट को देख रही है। सरकार चुनावी साल में खर्च बढ़ाना चाहती है। खर्च के स्रोत खत्म होने से हताश सरकार आरबीआई के रिजर्व से एक लाख करोड़ रुपए मांग रही है।’

आरबीआई से 1 लाख करोड़ मांग रही है सरकार

उन्होंने दावा किया कि यदि आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल अपने रुख पर अड़े रहते हैं तो केंद्र आरबीआई एक्ट, 1934 के सेक्शन 7 के अंतर्गत डायरेक्शन जारी करके सरकार के खाते में 1 लाख करोड़ रुपए जमा करने के निर्देश देने की योजना बना रहा है। आरबीआई एक्ट का सेक्शन 7 सरकार को जनहित में आरबीआई गवर्नर को दिशानिर्देश देने के अधिकार देता है।

19 नवंबर को होनी है आरबीआई की बोर्ड मीटिंग

चिदंबरम ने आरोप लगाया कि सरकार ने केंद्रीय बैंक के बोर्ड में अपने चहेते लोगों को भर दिया है और 19 नवंबर को होने वाली बोर्ड मीटिंग में अपने प्रपोजल को विचार के वास्ते रखे जाने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘यदि आरबीआई सरकार को इनकार करता है या आरबीआई गवर्नर इस्तीफा देते हैं, दोनों ही स्थितियों में परिणाम भयावह होंगे।’ कांग्रेस नेता ने कहा कि इस स्थिति में पटेल के लिए दो ही विकल्प होंगे, वह या तो इस्तीफा दें या सरकार को धनराशि ट्रांसफर कर दें।

खत्म हो सकती है संस्थान की गरिमा

उन्होंने कहा, ‘मेरे विचार में गवर्नर जो भी विकल्प चुनते हैं, उससे आरबीआई की विश्वसनीयता और छवि को धक्का लगेगा। इससे एक और अहम संस्थान की गरिमा खत्म हो जाएगी।’

पिछले कुछ महीनों से आरबीआई और सरकार विभिन्न मुद्दों पर एकमत नहीं हैं। हाल में आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य की सख्त स्पीच से दोनों के बीच विवाद सामने आ गया था। आचार्य ने कहा था कि केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता बचाने में नाकाम रहने का ‘फाइनेंशियल मार्केट पर व्यापक असर दिखेगा।’

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