स्मार्ट हो रहे छोटे शहरों के यूजर्स, टियर-2 और टियर-3 के दम पर बढ़ रहा है ऑनलाइन ट्रांजैक्शन

इस बात में कोई संदेह नहीं है कि टियर 2 और टियर 3 शहरों में उपभोक्ताओं की खरीदारी की आदतों में बड़े पैमाने पर बदलाव आ रहा है। चाहे ऑनलाइन खरीदारी हो, मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल हो या दूसरी इंटरनेट सेवाओं के इस्तेमाल का मामला हो, यह बदलाव साफ दिख रहा है। इस बात को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन रिटेलर टियर 2 और टियर 3 शहरों में बढ़ते बाज़ार के लिए अलग अलग रणनीति बना रहे हैं। ऑनलाइन रिटेलर्स का टियर 2 और टियर 3 शहरों से मुनाफा लगातार बढ़ रहा है।

moneybhaskar

Nov 13,2018 01:47:00 PM IST

नई दिल्ली। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि टियर 2 और टियर 3 शहरों में उपभोक्ताओं की खरीदारी की आदतों में बड़े पैमाने पर बदलाव आ रहा है। चाहे ऑनलाइन खरीदारी हो, मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल हो या दूसरी इंटरनेट सेवाओं के इस्तेमाल का मामला हो, यह बदलाव साफ दिख रहा है। इस बात को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन रिटेलर टियर 2 और टियर 3 शहरों में बढ़ते बाज़ार के लिए अलग अलग रणनीति बना रहे हैं। ऑनलाइन रिटेलर्स का टियर 2 और टियर 3 शहरों से मुनाफा लगातार बढ़ रहा है।

1. बढ़ते बाज़ार को समझना चाहती हैं ई-कॉमर्स कंपनियां

बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां जैसे फ्लिपकार्ट और अमेजन पहले ही समझ चुकी हैं कि ऑनलाइन खरीदारी के लिहाज़ से टियर- 2 और टियर- 3 शहरों में कारोबार बढ़ाने की मजबूत संभावनाएं हैं। फ्लिपकार्ट ने घोषणा की है कि पिछले साल त्योहार के सीजन में उनका 65 फीसदी मुनाफा टियर 2 शहरों से आया था। अमेजन ने भी कहा था कि पिछले साल उनका 85 फीसदी कस्टमर टियर 2 और टियर 3 शहरों से आया था। इससे पहले यह आंकड़ा 70 फीसदी था।

ई-कॉमर्स एक्सपर्ट्स का दावा है कि इन शहरों में ऑनलाइन खरीदारी की ग्रोथ शानदार है। टॉप ब्रांड्स की खपत अब मेट्रो शहरों तक ही सीमित नहीं है। छोटे शहरों में इन ब्रांड को लेकर बढ़ती जागरुकता का एक कारण यह है कि ई-कॉमर्स कंपनियां बड़े पैमाने पर छूट, ईएमआई सुविधा और सुपर वैल्यू की पेशकश कर रहीं हैं।

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2. छोटे शहरों में मोबाइल पर इंटरनेट का इस्तेमाल 

 

ई एंड वाई की एक रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण बाजार में मोबाइल के जरिए इंटरनेट के इस्तेमाल में शानदार ग्रोथ देखी गई है। रिपोर्ट से पता चलता कि वर्ष 2015 में, शहरी बाज़ार में मोबाइल इंटरनेट के यूजर्स 24.6 करोड़ थे, वहीं ग्रामीण बाजार में यह संख्या लगभग 12.9 करोड़ थी। रिसर्च के मुताबिक 2020 तक शहरी इलाकों में मोबाइल  इंटरनेट के यूजर्स  लगभग 35.8 करोड़ होंगे, वहीं ग्रामीण इलाकों में उम्मीद है कि यह संख्या बढ़ कर 38.8 करोड़ हो जाएगी।

 

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3. स्मार्टफोन ने उपभोक्ताओं को बनाया स्मार्ट 

 

इंटरनेशनल डाटा कॉरपोरेशन इंडिया द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार छोटे शहरों में मोबाइल फोन बिक्री की सालाना ग्रोथ रेट 53 फीसदी है जबकि बड़े शहरों में यह ग्रोथ रेट सिर्फ 15 फीसदी है। एक और मार्केट रिसर्च कंपनी काउंटर प्वाइंट के अनुसार 2017 में छोटे शहरों में स्मार्टफोन की बिक्री की ग्रोथ रेट 18 फीसदी थी। वहीं मेंट्रो शहरों और टियर 1 शहरों में यह ग्रोथ रेट सिर्फ 9 फीसदी थी। 

इस्तेमाल करने में आसान होने के अलावा नोटबंदी के प्रभाव की वजह से उपभोक्ताओं ने यह स्वीकार किया है कि स्मार्टफोन एक जरूरत है।

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4. असिस्टेड ऑनलाइन मार्केटप्लेसेज

 

गैर-मेट्रो शहरों में ऑनलाइन खरीदारी का बाज़ार बढ़ने का सबसे बड़ा कारण असिस्टेड ऑनलाइन मार्केटप्लेस है। लखनऊ में रहने वाली 28 वर्षीय हाउसवाइफ साक्षी गुप्ता कहती है, “कई बार जब मैं सुपरमार्केट जाती हूं तो कुछ ऐसे उत्पाद वहां नहीं होते हैं ,जो मैं खरीदना चाहती हूं। ऐसे में कुछ सेंटरों में टैबलेट और कंप्यूटर लगे होते हैं ,जहां पर उन उत्पादों को खरीदने के ऑर्डर देती हूं जो मैं खरीदना चाहती हूं। बाद में यह उत्पाद मेरे घर पहुंचा दिए जाते हैं। ऐसा कई बार होने के बाद मैने ऑनलाइन डिलिवरी का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। इससे मेरे लिए यह जानना आसान हो गया है कि क्या उपलब्ध है और क्या नहीं। और मुझे बाज़ार नहीं जाना पड़ता है जिससे मेरा समय और ऊर्जा बचती है”।

 

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5. पैसा अहम है: ऑनलाइन फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट की ओर बढ़ता रुझान 

 

मौजूदा पीढ़ी अब पैसा निवेश करने या वित्तीय उत्पाद खरीदने के लिए इंटरनेट का सहारा ले रही है। भारत के ग्रामीण बाजार में फैशन/ एक्सेसरी और इलेक्ट्रॉनिक्स की ऑनलाइन खरीदारी के साथ इंटरनेट आधारित फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट भी तेजी से बढ़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट का सबसे अधिक इस्तेमाल मनोरंजन के लिए हो रहा है लेकिन ऐसे लोगों की भी बड़ी संख्या है जो इंटरनेट का इस्तेमाल अपनी जिंदगी को आसान बनाने के लिए कर रहे हैं। इसमें ऑनलाइन वित्तीय उत्पाद खरीदने के अलावा दूसरी खरीदारी से जुड़े फैसले भी शामिल हैं। 
जयपुर में मार्बल डिस्ट्रीब्यूटर के अकाउंटेंट के तौर पर काम करने वाले 27 साल के राजेश खरीनी के उदाहरण से आप इसे समझ सकते हैं। खरीनी कहते हैं, "मेरा काम सुबह 9 बजे शुरू होता है और शाम 6 बजे खत्म होता है। इस दौरान मुझे एंटरप्राइज-बेस्ड अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करना होता है। ऐसे में मेरे लिए अपने बारे में वित्तीय फैसले लेने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल करना स्वभाविक है। इससे मैं अपने सभी वित्तीय मामलों को एक जगह पर ट्रैक कर सकता हूं और इस पर पूरा नितंत्रण रख सकता हूं।“ 

यह पूछने पर कि हाल में उन्होंने कौन सा वित्तीय फैसला लिया है, खरीनी ने कहा, “मैंने लाइफ इन्श्योरेंस खरीदने के अलावा कुछ यूनिट लिंक्ड इन्श्योरेंस प्लॅन्स (ULIPs) निवेश के बारे में फैसला किया है। मैंने  एचडीएफसी लाइफ के साथ शुरुआत की है। मैने पाया कि उनका ऑनलाइन एप्लीकेशन और अकाउंटिंग प्रॉसेस बहुत आसान है जिससे मैं बहुत आसानी से अपने लिए लाइफ इंश्योरंस प्लान ख़रीद पाया।“

 

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6. सबकी ज़रूरत बना बीमा प्रोडक्ट 

 

देश में बढ़ते शहरीकरण, सिंगल फैमिली और बड़े पैमाने पर आबादी को सामाजिक सुरक्षा की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण बीमा प्रोडक्ट सबकी जरूरत बन रहा है। बीमा प्रोडक्ट लोगों को इलाज के महंगे खर्च या किसी अनहोनी की सूरत में परिवार की आर्थिक जरूरतों की चिंता को काफी हद तक खत्म कर रहा है। 
लखनऊ में प्रॉपर्टी डीलर का काम करने वाले विमल सिंह का कहना है कि उन्होंने अपनी फैमिली के लिए स्वास्थ्य बीमा कवर खरीदा है। यह बीमा उन्होंने कंपनी की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन खरीदा है। विमल सिंह का कहना है कि इसमें सबसे अच्छी बात यह कि आप बीमा कंपनी की वेबसाइट पर जाकर प्रोडक्ट के बारे में पूरी जांच पड़ताल कर सकते हैं। अगर आपको प्रोडक्ट का कोई फीचर समझ नहीं आ रहा है तो आप कंपनी के प्रतिनिधि से बात करके जरूरी जानकारी ले सकते हैं। इस तरह से आप ऐसा बीमा प्रोडक्ट ले सकते हैं जो आपकी ज़रूरत को पूर करता हो। वहीं अगर आप एजेंट के ज़रिए बीमा प्रोडक्ट खरीदते हैं तो हो सकता है कि एजेंट बीमा प्रोडक्ट बेचने के लिए आपको गुमराह करे। 
वहीं दिल्ली में एक मीडिया कंपनी में काम करने वाले राजू सजवान कहते हैं, “मुझे टर्म प्लान की ज़रूरत थी इसके लिए मैने एक बीमा कंपनी के एजेंट से बात की लेकिन उसने मुझे ऐसा टर्म प्लान बताया जिसका प्रीमयम काफी अधिक था। वहीं मेरे एक दोस्त ने बताया कैसे आप बीमा कंपनी की वेबसाइट पर जाकर खुद से यह पता कर सकते कि 20 या 30 साल की अविध के लिए 50 लाख रुपए या 1 करोड़ रुपए के टर्म प्लान के लिए कितना प्रीमियम देना होगा। इस तरह से मैने ऑनलाइन टर्म प्लान खरीदा जो एजेंट के बताए प्रीमियम की तुलना में सस्ता था। इसके अलावा ऑनलाइन टर्म प्लान खरीदने में आपको मेडिकल टेस्ट भी नहीं कराना होता है। आपको इसके लिए अपनी हेल्थ से जुड़ी बेसिक जानकारी देनी होती है।“

 

 

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7. टियर 2 और टियर 3 शहरों के लोग ऑनलाइन वित्तीय निर्णय लेना जारी रखेंगे

 

भारत में मोबाइल का प्रसार लगातार बढ़ रहा है, जिसकी वजह से ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की पहुंच कई गुना बढ़ गयी है। वह समय दूर नहीं है जब ज्यादातर भारतीय ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कर सकेंगे। वे ऑनलाइन ट्रांजैक्शन का उपयोग सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए ही नहीं बल्कि अपने जीवन को बेहतर बनाने के साथ वित्तीय फैसलों के लिए भी करेंगे।

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