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Home » Economy » PolicyNCLT helps recover Rs 80k cr in 2018; Kitty may cross Rs 1-lakh cr in 2019

मोदी सरकार का एक फैसला, दूसरे साल भी जमा हो गए 80 हजार करोड़ रु

कर्ज से दबी कंपनियों से वसूल ली बड़ी रकम

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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली केंद्र सरकार का दो साल पहले लिया गया एक फैसला इतना कारगर रहा कि उससे सरकारी खजाना भरने में अभी भी मदद मिल रही है। दरअसल नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने वर्ष 2018 के दौरान 80,000 करोड़ रुपए के बकाया कॉरपोरेट लोन की रिकवरी की है और ऐसा दिसंबर, 2016 में लागू इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) की वजह से संभव हुआ है।  

 

 

2019 में 1 लाख करोड़ से ज्यादा हो सकती है रिकवरी

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, सरकार की आगे जजों और बेंचों की संख्या बढ़ाकर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) को मजबूत बनाने की योजना है। इसके साथ ही प्रोसेस को गति देने के लिए पर्याप्त इन्फ्रास्ट्रक्चर भी उपलब्ध कराया जाएगा। इसीलिए माना जा रहा है कि अगले साल यानी 2019 में रिकवर अमाउंट बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच सकता है।

 

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नए साल में होगी बैंकरप्सी कोड की असली परीक्षा

एक्सपर्ट ने कहा कि नए साल में न सिर्फ इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC), बल्कि एनसीएलटी और उसकी अपीली बॉडी एनसीएलएटी की क्षमताओं को पता चलेगा। इसकी वजह यह है कि ट्रिब्यूनल में एस्सार स्टील (80 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा) और भूषण पावर एंड स्टील (लेंडर्स का लगभग 45 हजार करोड़ रुपए का बकाया) जैसे कुछ बड़े मामले भी लंबित हैं।

 

आगे पढ़ें-2018 में कितने की हुई रिकवरी

 

 

 

2018 में 80 हजार करोड़ रु की रिकवरी

कंपनी मामलों के मंत्रालय में सचिव इंजेति श्रीनिवास ने बताया कि वर्ष 2018 में आईबीसी के अंतर्गत कई कॉरपोरेट कर्जदारों से 80,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की रिकवरी हुई, जो डिफॉल्टर हो चुके थे।  एक अनुमान के मुताबिक दिसंबर, 2016 में लागू होने के बाद आईबीसी से 3 लाख करोड़ रुपए की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संकट में फंसी हुए एसेट का हल निकालने में मदद मिली।

उन्होंने कहा, ‘इस अनुमानित रकम में रिजॉल्यूशन प्लान के माध्यम से हुई रिकवरी और एनसीएलटी द्वारा सेटल किए केस शामिल हैं।’

 

देश भर में हैं एनसीएलटी की 11 बेंच

वर्ष 2019 में एनसीएलटी द्वारा देश भर में सक्रिय 11 बेंचों के माध्यम से संकट में फंसी कई एसेट के कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्युशन प्रॉसेस को अंतिम रूप दिए जाने का अनुमान है। इन मामलों में एस्सार स्टील, भूषण पावर एंड स्टील, वीडियोकॉन पावर, मोनेट इस्पात, एमटेक ऑटो, रुचि सोया, लैंको इन्फ्राटेक, जेपी इन्फ्राटेक सहित अन्य शामिल हैं।

 

आगे पढ़ें-बड़े मामलों का होगा समाधान

 

 

 

बड़े मामलों का होगा समाधान

लॉ फर्म लक्ष्मीकुमारन एंड श्रीधरन के एग्जीक्यूटिव पार्टनर पुनीत दत्त त्यागी के मुताबिक, नए साल में ‘आईबीसी के साथ ही एनसीएलटी और एनसीएलएटी की मजबूती की परीक्षा होगी।’

उन्होंने कहा, ‘एनसीएलटी में लंबित अधिकांश मामलों का समाधान होने का अनुमान है। साथ ही कर्ज के बोझ से दबी ये कंपनियों का कुछ सफल बिडर्स के हाथ में आ सकती हैं।’

 

2018 में निबटे ये मामले

वर्ष 2018 में भूषण स्टील, इलेक्ट्रोस्टील, बिनानी सीमेंट सहित कुछ कंपनियों के खिलाफ इनसॉल्वेंसी प्रोसीडिंग लगभग पूरी हो गई हैं। टाटा मोटर्स, वेदांता ग्रुप और आदित्य बिड़ला की अगुआई वाली अल्ट्राटेक जैसी सफल बिडर्स के नए प्रबंधन ने संकट में फंसी कंपनियों के मैनेजमेंट का कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया है।

 
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